बुधवार, 31 दिसंबर 2008

स्वागत 2009



स्वागत है २००९
चूम रहे है पलों की खुशियों को


आओ सींचे नए सपने
आने वाले दिनों की उच्चाकांक्षा के लिए

बिदा 2008

सारे हसीं सपनो को
नित नई बातों को
जीत के आनंद को
फ़िर एक बार संजोने का
ख्वाब दिलाने
बिदा हो रहा साल २००८
जो कुछ आपने हासिल किया बीते दिनों
उनकी यादे जुटाने का दिन ३१ दिसम्बर
आप सभी को विदा दे रहा है
आईये हम भी विदा कर दे इसे
और संजोये खुशियों की नई सौगातों के आरम्भ के अनमोल समय को
करें पलक पावडे बिछाकर स्वागत २००९ का

शनिवार, 27 दिसंबर 2008

आतंक और आज के नए दस चेहरे

देश पर आतंकी हमले हुए ।
संसद पर , कारगिल में और भी छुटपुट, कश्मीर में लगातार ।
हर बार हमारी संसद की नेता अचानक हीरो बन जाया करते है ।
अब इस बार गृह मंत्री हटा दिए गए , फ़िर प्रणब जी आ धमके , प्रधान मंत्री जी ने अपनी कही, राज ठाकरे , फ़िर अंतुले , और ही कई मुह खुले ........
पकिस्तान की रणनिति देखो जरदारी और सेना सिर्फ़ दो .....
माना हम विद्वान हैं, मगर पकिस्तान के समक्ष दस अलग अलग राजनैतिक चेहरे, अलग अलग बयानी, क्या आज रावण का वजूद नही दिखाते ?

अपनी बयानबाजी से हम कब तक बाज नही आयेंगे । पत्रकार भी माईक उठाये पहुँच जाते हैं और राष्ट्रिय हित सोचे बगैर अपनी हीरो गिरी से बाज नही आते । सोचें क्या ये ठीक है ?

गुरुवार, 25 दिसंबर 2008

मेरी क्रिसमस

क्या चिडियाघर में बंद पशुओं को रास आयेगा आपका ये तरीका ?

रविवार, 21 दिसंबर 2008

रोटरी के मेल से A German's View on Islam


Aman, whose family was German aristocracy prior to World War II, owned a number of large industries and estates. When asked how many German people were true Nazis, the answer he gave can guide our attitude toward fanaticism. 'Very few people were true Nazis,' he said, 'but many enjoyed the return of German pride, and many more were too busy to care. I was one of those who just thought the Nazis were a bunch of fools. So, the majority just sat back and let it all happen. Then, before we knew it, they owned us, and we had lost control, and the end of the world had come. M y family lost everything. I ended up in a concentration camp and the Allies destroyed my factories.'We are told again and again by 'experts' and 'talking heads' that Islam is the religion of peace, and that the vast majority of Muslims just want to live in peace. Although this unqualified assertion may be true, it is entirely irrelevant. It is meaningless fluff, meant to make us feel better, and meant to somehow diminish the spectra of fanatics rampaging across the globe in the name of Islam.The fact is that the fanatics rule Islam at this moment in history. It is the fanatics who march. It is the fanatics who wage any one of 50 shooting wars worldwide.It is the fanatics who systematically slaughter Christian or tribal groups throughout Africa and are gradually taking over the entire continent in an इस्लाम
ic wave.It is the fanatics who bomb, behead, murder, or honor- kill.It is the fanatics who take over mosque after mosque.It is the fanatics who zealously spread the stoning and hanging of rape victims and homosexuals. It is the fanatics who teach their young to kill and to become suicide bombers.The hard quantifiable fact is that the peaceful majority, the 'silent majority,' is cowed and extraneous.Communist Russia was comprised of Russians who just wanted to live in peace, yet the Russian Communists were responsible for the murder of about 20 million people. The peaceful majority were irrelevant.China 's huge population was peaceful as well, but Chinese Communists managed to kill a staggering 70 million people.The average Japanese individual prior to World War II was not a warmongering sadist. Yet, Japan murdered and slaughtered its way across South East Asia in an orgy of killing that included the systematic murder of 12 million Chinese civilians; most killed by sword, shovel, and bayonet.And, who can forget Rwanda , which collapsed into butchery. Could it not be said that the majority of Rwandans were 'peace loving'?History lessons are often incredibly simple and blunt, yet for all our posers of reason we often miss the most basic and uncomplicated of points: Peace-loving Muslims have been made irrelevant by their silence.Peace-loving Muslims will become our enemy if they don't speak up, because like my friend from Germany , they will awaken one day and find that the fanatics own them, and the end of their world will have begun.Peace-loving Germans, Japanese, Chinese, Russians, Rwandans, Serbs, Afghans,Indians, Iraqis, Palestinians, Somalis, Nigerians, Algerians, and many others have died because the peaceful majority did not speak up until it was too late.As for us who watch it all unfold, we must pay attention to the only group that counts; the fanatics who threaten our way of life.Lastly, anyone who doubts that the issue is serious and just deletes this email without sending it on, is contributing to the passiveness that allows the problems to expand. So, extend yourself a bit and send this on and on and on! Let us hope that thousands, worldwide, read this and think about it, and send it on - before it's too late.Emanuel Tanay, M ...D.

शुक्रवार, 19 दिसंबर 2008

गिद्ध दिखने का सुकून

पर्यावरण का रक्षण करना सभी का कर्तव्य है । कल सागर से भोपाल लौट कर आते हुए जब गैरतगंज ८ किलोमीटर के फासले पर रह गया । गिद्धों की लुप्त हो रही प्रजातियों के गिद्ध एक साथ दिख जाना सुकून भरे लगे । किंग वल्चर, इजिप्शियन वल्चर, व्हाइट कालर्ड वल्चर के साथ एक गिद्ध जिसे मै नाम से अभिव्यक्त कर पाने में कठिनाई महसूस कर रहा हूँ के झुंड जिनमे संख्या के नाप से क्रमशः ९, ७, १८, १२ के योग में कुल ४६ गिद्ध देख पाया । मैंने गाड़ी रुकवाकर देखा तो पता चला एक लंगूर का भोजन ये प्राकृतिक सफाई कर्मी कर रहे थे ।
गिद्धों पर आए संकट का मूल कारण अब डाईक्लोफेनेक सोडियम को माना जाता है और ये दवा पालतू गाय भैंसों को खाने की वजह से गिद्धों में किडनी खराबी का कारण रही है, एसा ज्ञात तथ्य है । मेरे साथ अशोक डांगी, अशोक गंगवाल , बाबूलाल सेठिया दौरे पर थे । मेरे वाईल्ड लाइफ सेंस से सभी वाकिफ है और गिद्ध दिखने से मेरी जाहिर खुशी उन्हें हतप्रभ कर गई । किसी परिंदे को देख कर होने वाली ऐसी खुशी से वे पहली बार रुबरु हुए थे । गिद्धों पर आए संकट और लुप्त प्रायः परिंदों के बारे में उन्हें खुलकर बताया तब जा कर वे मेरी खुशी को समझ सके । रतलाम में डी ऍफ़ ओ रहे श्री विवेक जैन से मैंने चर्चा कर बताया की मैं इस वक्त चार अलग अलग प्रजाति के गिद्धों के एक समूह के बीच खडा हूँ और हड़बड़ी में घर से केमेरा ले जाना भूल गया हूँ लेकिन ये मेरे जीवन का अद्भुत पल है की एक साथ विभिन्न प्रजातियों को देख पा रहा हूँ । पहले किसी एक प्रजाति के बड़े समूह से साक्षात्कार रहा है लेकिन कई सारी प्रजातियाँ देख रहा हूँ जो एक विरला अनुभव है । मेरे समाचार भर से उनकी आवाज़ में गजब की चमक थी । भोपाल पहुँच कर जाहिद मीर जो मेरे द्वारा स्थापित बर्ड्स वाचिंग ग्रुप के किसी वक्त सह सचिव रहे और अब भोपाल में पदस्थ हैं को रतलाम के ही सुभाष नायडू जो अब भोपाल में एक्स्प्लोड़ रेस्टोरेंट का संचालन करते हैं को यह बात बताई तो वे भी खुशी से भर गए । अब आपको यह समाचर जाहिर कर रहा हूँ ....... पर्यावरण के हितैषी ब्लॉग सदस्य इस समाचार से खुश होंगे ही ....... पूरा यकीन है

मंगलवार, 16 दिसंबर 2008

सोमवार, 15 दिसंबर 2008

financial-crises


उपाय किए तो

आर्थिक मंदी ने विश्व भर में जकड की है । भारत की और सभी की निगाहें लगी हैं , कुछ विश्लेषक मानते हैं की उपायों को देरी से लागू किया गया। बैंक दरों में कमी ने बैंकों को पूँजी की उपलब्धता के बावजूद कर्ज देने में कटौती किए जाने के उपाय ढूंढ डाले हैं । बगैर सुरक्षा के दिए ऋणों की वसूली संभवतः कठिन या कहें नही की जा सकने योग्य ठहरा दी गई है जिससे किए जा रहे उपाय लागू नही किए जा रहे हैं , इस तरह की खबरें अखबारों में पढने को आई तो फ़िर लगा की वाकई हम संवेदनशील हैं देश के प्रति?
आज वित्त मंत्रीजी का बयान है की भारत आर्थिक मंदी की चपेट से बचा हुआ है । रोजगार के बारे में ४०००० नियुक्तियों पर समाचार दिखा तो कुछ सुकून मिला ।

पैसा ये पैसा


शुक्रवार, 12 दिसंबर 2008

बधाई श्री शिवराज सिंह जी को २९ वे मुख्य-मंत्री बनने की


Dec 12, 05:38 pm
भोपाल। शिवराज सिंह चौहान को शुक्रवार को मध्यप्रदेश के राज्यपाल डा. बलराम जाखड़ ने प्रदेश के 29वें मुख्यमंत्री के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।
चौहान ने यहां जंबूरी मैदान पर हजारों लोगों के सामने ईश्वर के नाम पर हिंदी में शपथ ली। इस अवसर पर अकेले मुख्यमंत्री ने शपथ ली। वह अपने मंत्रिमंडल का गठन बाद में करेंगे। इस अवसर पर भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह, प्रदेश के चुनाव प्रभारी एम. वैंकेया नायडू, प्रभारी महामंत्री अनंत कुमार, वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी, संगठन महामंत्री रामलाल, भाजपा शासित राज्यों एवं गठबंधन सरकारों के मुख्यमंत्री रमन सिंह, नीतीश कुमार व प्रकाश सिंह बादल आदि समेत कई नेता मौजूद थे। समारोह स्थल पर भाजपा सरकार एवं चौहान की सलामती की दुआ करने के लिए शपथ ग्रहण से पहले सर्वधर्म प्रार्थना सभा हुई तथा बालीवुड संगीतकार रवींद्र जैन एवं उनके आर्केस्ट्रा ने भजन और देशभक्ति गीत पेश किए तथा इस मौके पर अभिनेत्री हेमामालिनी एवं पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू भी उपस्थित थे।
दैनिक जागरण से साभार

गुरुवार, 11 दिसंबर 2008

आतंकवाद : भारतीय मुस्लिम त्रस्त

House for Mr अली

Fri, Dec 12 03:27 AM
In a recent meeting, some 300 real estate brokers in Surat declared that they will not sell or rent houses to Muslim clients। The ostensible reason for this "boycott" is that the terrorists who attacked Mumbai had local supporters. In other words, even if the terrorists are foreign, they rely on the support of India's Muslims, all of whom, in this thesis, are suspect. Muslims have long found it hard to buy houses in urban India. Tales of discrimination now form a clear pattern of prejudice. Many middle-class Muslims find that otherwise pliant homeowners and building societies suddenly develop cold feet on learning of the buyer's religion. This is especially true in Gujarat post-2002, with segregation becoming disturbingly visible. But this is unprecedented in its brazenness.

गुजरात में ली गई यह कदम ताल आतंकवाद के मंसूबों पर पानी फेरने की है । याहू मुख प्रष्ट के पर्सपेक्टिव पर इसे पढा जा सकेगा। आज रतलाम में एक दिन बिजली बंद रख कर शहीदों के नाम दीप जलाए जाने का एलान है .......... आप भी कर दिखाए एसा कुछ जो ब्लॉग पर छा जाए ।

"दैनिक भास्कर" द्वारा मेरी पोस्टिंग "बुजदिलों का आतंक" को छापा गया आप सभी को बधाई

मंगलवार, 9 दिसंबर 2008

देश में राजनितिक बदलाव की मांग


देश में राजनितिक बदलाव की मांग पर याहू के मुख पृष्ठ पर आज खबर है ।
देश आतंक की राह पर है और जिम्मेदारों को बदल देने की मांग । क्या असल बात यही है की हम सिर्फ कुर्सी को ही टटोलते रहेंगे ?
देश की सुरक्षा पर अमल नहीं करेंगे ।
आप के घर मे आपका भाई गलती करे तो क्या आप गलती सुधरने के बजाय भाई बदल डालते हैं?
गलती सुधारे और लड़ें असल आतंकी तत्वों से राजनीती की जगह नहीं है राष्ट्र की संप्रभुता .........jay hind

मृत सागर से सागर के मरने तक

मृत सागर का यह द्रश्य जहां पानी में जीवन न होने के संकेत से भरा है ।
तो हम इंसान भी, सागर जहां जीवन समृद्ध है को मार देने का उपक्रम किये हैं ।

सोमवार, 8 दिसंबर 2008

श्रद्धा सुमन वीरों को


कैसे?............

आज प्रधानमंत्रीजी का बयान रियायतों से अर्थ तंत्र सुद्रढ़ किए जाने की आश्वस्ति से जुड़ा है । आज देश के जों हालात हैं उनपर गौर किया जाए तो गरीबी रेखा से नीचे कई बेरोजगार उच्च शिक्षा लिए मिलेंगे और वर्तमान हालातों पर जो वर्तमान प्रतिक्रिया है वह सिर्फ़ और सिर्फ़ तुष्टिकरण भर के तरीकों और अर्थ निति के सिद्धांतों से प्रेरित भर है। इन तरीकों में देश की जनता महज कर्जदार बनेगी , बैंक दरों की कमी और ऋण की सहजता कोई जबरदस्त तरीके नही मगर बकौल प्रधानमंत्रीजी यह लोक लुभावने तरीके से प्रस्तुत किया गया है । मंदी के दौर में राहत की साँस जनता को मिले न मिले । उपाय किए गए हैं , इसी में अपनी खुशियाँ तलाश लीजिये बस............

रविवार, 7 दिसंबर 2008

रोजगार

नई पीढी अब उच्च शिक्षा को समर्पित कर दी गई । ये पीढी अब देश में चिकित्सक, अभियंत्री, कम्प्यूटर क्षेत्र के जानकारों की एक बड़ी टीम तैयार करते कराते, प्रबंध की दिशा में आगे बढ़ गई है । एम बी ऐ को अत्यावश्यक मानते हुए पढ़ाई जारी रखे है।
मगर जनाब हमारे इन्फ्रास्ट्राक्चर में कोई बदलाव नही है आने वाले समय में भी हम नौकरियाँ या रोजगार संसाधन की उपलब्धता पर कोई विचार नही किए है । यह पढ़ी लिखी उच्च दक्षता वाले नौजवान जायेंगे कहाँ सोचा है?

बुधवार, 3 दिसंबर 2008

नमन देश से











आतंकवाद पर प्रतिक्रियाए

देश में एक बार फ़िर से शहीद हुए देश भक्तों को नमन किया जा रहा है । राजनीतिज्ञों के लिए उहा पोह से भरा समय है और जब जैसे मौका मिला अपना बयान दर्ज कराने की कोशिशें करने पर आमादा हैं । अपनी कुर्सी अपना राज का आलम इन के सर माथे दिखता है अपने दल और अपनी सीमाओं से बाहर नही निकल सके है ये। रक्षा , सुरक्षा , गुप्तचरी, विदेश एवं अन्तर-राष्ट्रिय समझ से परे इनके बयान आज भी पढने को मिले हैं । राष्ट्र ध्वज में इन्हे क्यों विदाई देते हैं हम जबकि इनकी सोच दलगत निष्ठा से आगे ही नही दिखाई देती ।
आज हमें लीडर की तलाश है । देश के प्रति बलिदान हुए सच्चे देशभक्तों के समक्ष नमन करना था तब क्षेत्रवाद की बयार चला दी गई । उन्निक्रिश्ननके बजाय किसी अन्य शहीद के घर जाना केरल के माननीय मुख्य मंत्री महोदय को क्यों न सुहाया ?
लालू जी की भी बोलती बंद है , नरेन्द्र मोदीजी को करारा जवाब मिला । वाकई अगर ये प्रदेश अपनी सोच व्यक्त करना चाहते तो क्या इन्हे श्रद्धांजलि देने के लिए राज्य या देश में राष्ट्रिय शोक की गुंजाइश नही थी ?
आज गाँव, नगर, प्रदेश, देश के हर कोने में शहीदों को जनता की सच्ची भावनाए प्रस्तुत की जा रही है । एक दिन का राष्ट्रिय शोक इन शहीदों के लिए अभिव्यक्त नहीं किया जा सकता है ? पूर्व प्रधान मंत्री के निधन पर सात दिन का राष्ट्रिय शोक घोषित रहा। क्या हमारी विनम्रता शहीदों के प्रति इतना न्याय भी नही बरतेगी कि इन्हे उचित सम्मान राष्ट्र के स्तर पर मिले ?
वे लोग जो अनजाने में मारे गए उन लोगों का सरकारी चरित्र देखा जायेगा ? राष्ट्र पर कुर्बान उनकी जिंदगी को सम्मान दिए जाने में कोई ऐतराज हो सकता है ? अन्तर-राष्ट्रिय स्तर पर हमारे चिंतन को कब टटोलेंगे हमारे स्वजन, जिन्हें हम कुर्सी पर बैठाते आए है ?

सोमवार, 1 दिसंबर 2008

आतंकवाद : द हिंदू और अन्य समाचार पत्रों से

Washington (IANS): Asserting that sovereign nations have a right to protect themselves, US President-elect Barack Obama Monday assured India that he was absolutely committed to remove the threat of terrorism wherever it may exist.
Asked if he backed India's right to go into Pakistan in case it found the terror threat originated from there, Obama, who during the election campaign advocated US taking similar action as it fights the Taliban on the porous Pakistan-Afghan border, said: "Sovereign nations have a right to protect themselves."
"Our thoughts and prayers go out to the people of India," he added.
The president-elect said his expectation was that Pakistan too would extend India all cooperation in investigating the attacks as assured by Pakistan President Asif Ali Zardari।

इस्राइल ने लड़ाई के तरीके पर ऊँगली उठाई है , सारे युवाओं को जिस देश में अनिवार्य फौजी की सेवाएं देना होती है उन देशों में इस्राइल का नाम शुमार है । वह कहता है उनका अनुभव कभी इस तरह की लड़ाई का नही रहा है लेकिन एक्शन लेने का भारतीय तरीका ढीला ढाला है ।

सहमती है, क्योंकि हमारी एक्शन बगैर सरकार के अनुमति के नही की जाना बेहतरीन विकल्प तो नही है। प्रजातांत्रिक देश में फौजी कदम अचानक बगैर सरकार की इजाजत लिए जाना सम्भव नही ।

इस्राइल जैसी फौजी व्यवस्था हमारे यहाँ लागु नही है। लेकिन सुरक्षा प्रणाली के तहत असफलताओं को ढूँढना पडेगा । हमारी गुप्तचर व्यवस्था को संदेह भरी निगाहों से न देखे । सूचनाओं के समय संवेदनशीलता अनिवार्य पहलु होना चाहिए न की सूचित करने वाले स्रोत की प्रासंगिकता ।

पाकिस्तान एक और तो कह रहा है कि वह भारत के साथ है उस पर संदेह न करें तो दूसरी और सेनाध्यक्ष को कबीलाई क्षेत्र के लोग आतंकवादियों के बजाय भारतीय सीमा पर तैनाती का पक्ष प्रकट कर रहे हैं जो डबल स्टेंडर्ड दर्शाते हैं । पकिस्तान, दाऊद को सौपने को तैयार नही है । अन्तर-राष्ट्रिय प्रश्नों का समाधान करने को उनकी तैयारी नही । बचाव के पक्ष पर समय जाया किया जा रहा है , डिप्लोमसी कि इस प्रकार कि करतूतों पर आक्रमण किया जाए, तुंरत ही ।

मानते है कि फलों से लदे वृक्ष पर ही पत्थर मारे जाते हैं । अन्तर-राष्ट्रिय आर्थिक मंदी के समय पर भारत कि अर्थव्यवस्था का ठीक से खडा ढांचा भी आतंकवादी कारर्वाई का कारण होना चाहिए । बड़ी "सोच" का यह आक्रमण हलके से नही लिया जावे । थोथी राजनीति कर समय जाया ना करे ठोस एक्शन ले। चाहे तो पकिस्तान के समर्थन से ( जो बकौल आसिफ अली जरदारी के बयान से कि वे पूरी तरह से भारत को मदद के लिए तैयार हैं ) वरना ९/११ कि तरह बगैर चिंता के फौजी कदम उठाकर आतंवादी ठिकानो को नेस्तनाबूद कर देने कि मंशा रखें ।

रविवार, 30 नवंबर 2008

सलाम सपूतों

आतंक की चीख गूंजी















मगर शहादत ने

फख्र से

उंचा किया सर

बहाल कर अमन ।

सलाम तुम्हे वीरों .........


गम है हमें के

देश के लिए

कुर्बान हम न हुए ।

चौडी कर दी

छाती तुमने,


किन शब्दों? से

एहसान करें

देश के लाडलों.........

एहसास


सुबह कुछ यूँ लगा
जैसे खनके हो स्वर
आपके...... पापा
गुजर गया एक महीना
यूँ ही मगर
एहसास है आप के
लौट आने का
गुजर रहा वक्त
दरमियाँ मगर
आप के होने का
एहसास तो है

शुक्रवार, 28 नवंबर 2008

राजनीती पर शर्म है

मीडिया के लोग दुनिया भर में है और जिन शब्दों को वे कहें उनका इको गूंजना चाहिए एसा वे सोचते होंगे । राजनीतिज्ञों की दुम बने ये लोग राष्ट्र धर्म और हमारे सुरक्षा संसाधनों के प्रति लगातार मनोबल को नीचा दिखाने का जतन करते पाये जाते रहे है नकारात्मक सोच वाले इन लोगों से अब नफरत सी होने लगी है । आतंकवादियों के होंसले बुलंद होते तो वे छद्म युद्ध का सहारा ना लेते । चाहे जो हो अलकायदा, सिमी, या अन्य आतंकवादी दल जितना प्रचार मीडिया में इन संगठनो को तरजीह दी जाती है और इनका महिमा मंडन और हमारी नीतियों पर टीका टिपण्णी के जो अवसर परोसे जाते हैं क्या वे वाकई हमारे देश के प्रति सम्मान को व्यक्त कर पाते है? सोचें इन बुजदिल आतंकवादियों को मानसिक साहस कौन देता है।

बुजदिलों का आतंक

कुछ आतंकवादी सोच समझ कर मुंबई की होटलों में जा घुसे और गोलीबारी कर हत्याएं करने लगे । इन बुजदिल लडाकों ने जान बूझकर जनता के मध्य घुस कर लड़ाई का मैदान बनाया । जिस देश के रखवाले दुसरे देश में भी शान्ति कायम करने का काम करते है ऐसे देश में आतंक फैलाने की कारगुजारियों को अंजाम देने वाले आतंकवादी दिल से मजबूत नही हैं । वे वाकई कमजोर हैं । शान्ति चाहने वाले हमारे देश ने कभी घ्रणित कार्यों को मर्यादा लांघकर नही किया । जब भी हम गए, चाहे नामीबिया हो चाहे नाइजीरिया हमारी सेना दुःख बांटने का साधन जुटा कर लौटी है ।

कल के धमाकों ने दहशत फैलाने को , डराने को जो अंजाम पहुंचाना चाहा है , उसके विरुद्ध हम सभी भारतीय पूर्ण निष्ठा से देश के साथ हैं । श्री विजय सालसकर श्री हेमंत करकरे की शहादत को सलाम करते हैं ।

पकड़े गए आतंकवादियों के पक्ष में कोई भी केस अपने हाथो लेकर कोर्ट में अगर इन गंदे लोगों का साथ देता है तो उनकी देश भक्ति को संदेह की निगाह से देखा जाकर देश निकाले की सजा के बारे में माननीय न्यायालय से अनुरोध है । इस बारे में याचिका लगाने की जरूरत न पड़े। देश सेवा के प्रति सच्चा समर्पण यह होगा की निर्णय सीधे से आए ।

हस्ताक्षर है ये आँखे जिनकी बेक़सूर जिंदगी इस हमले में तबाह हुई है ........


शुक्रवार, 21 नवंबर 2008

राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व क्या हैं ?

चुनावों की धूम से सारा शहर हलचल से भर गया है । आरोप, प्रत्यारोप , मान मर्दन , कार्य प्रणाली और जन आकांक्षा के आशा निराशाजन्य सुर आदि सुनाई दे रहे हैं । देश के बारे कोई सोचने को कोई आगे नही आया है । अपनी ढपली अपना राग गाया बजाया जा रहा है ।
आज की दोपहर में चुनावों की इस सरगर्मी के बावजूद भारतमाता की आरती का कार्यक्रम समीप के गाँव धराड में सुनने का अवसर प्राप्त हुआ । बाबा सत्यनारायण मोर्य द्वारा गैर राजनितिक कार्यक्रम में उत्साह और इस समय पर इस प्रकार का आयोजन बधाई योग्य रहा । सुभाष चंद्र बोस, रामप्रसाद बिस्मिल , भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद की याद दिलाना चुनावी अवसर पर मुद्दा नही है मगर देश भक्ति की मिसाल प्रस्तुति अवश्य ही सराहना के योग्य है । धन्य है ग्रामीण जनता जो इस समय देश धर्म को याद कर रही है।

सोमवार, 17 नवंबर 2008

पापा, आपके पदचिन्ह


पापा, आपका रक्षा कवच है ये


पग पग पर आपकी याद है


आपने सिखाया था ...... जीना

राहे कैसी भी हो
कंटक विहीन ...... चाहे.......... काँटों भरी ........
एकाकी हो चाहे ........
दुनिया के दस्तूर हमने जाने आपसे
ऐसे थे बाबा आप ........

आपके पद-चिन्हों पर चलने का स्मरण रहेगा.... बाबा


आपके किए काम और आशीर्वाद हमारे साथ हैं ।
स्मरण रहेगा आपका हमेशा ...................

रविवार, 16 नवंबर 2008

स्मरण पथ पर आपका सान्निध्य


बाबा : आपके काम, जो याद किए जायेंगे




* नेहरू स्टेडियम इंदौर का निर्माण १९६४




* आई टी आई भवन रतलाम का निर्माण १९६५




* ई एस आई हॉस्पिटल निर्माण




* रतलाम की अलकापुरी, विक्रम नगर, जवाहर नगर एल आई जी कालोनी,




* झाबुआ की हाऊसिंग कालोनी




* नीमच हाऊसिंग बोर्ड कालोनी




* सामाजिक क्षेत्र के निर्माणों में

वाल्मिक आश्रम सैलाना

श्री राम-कृष्ण विवेकानंद आश्रम जवाहर नगर रतलाम

तथा

महाराष्ट्र समाज संचालित नूतन बाल मन्दिर की भूमि खरीदी स्कूल अध्यक्ष के रूप में

बाबा : आपकी बाट में हैं हम सभी आपके

शुक्रवार, 14 नवंबर 2008

गुरुवार, 13 नवंबर 2008

Baba : I miss you

बाबा (पूज्य पिताजी)
आप भाई दूज मनाने बुआ जी के यहाँ वडोदरा गए। बड़े सवेरे ६:०५ पर आप खुशी खुशी जनता एक्स्रेस ट्रेन से मम्मी और पारुल परिधि को लेकर सकुशल वडोदरा रवाना हुए। आशु आपके लिए ऑटो लाया , आपने वहाँ वडोदरा में दोपहर १२ बजे बुआजी के घर पहुंचकर परम्परा के तहत बहन के हाथों स्नान किया, भोजन किया । दोपहर को आराम किया। शाम को संतोष की सगाई शादी की बातें पूरी की और अचानक कुछ ही पलों में आप ने प्रयाण कर दिया ।
कल शाम को भी मुझसे आपने रक्त परिक्षण शिविर में सेवाएं देने को कहा था फ़िर अचानक आप विदा क्यों ले गए ।
Baba : I miss you Baba .................
कितने लोग आपकी यादे बता गए ........
जाने क्या क्या जता गए............
ग्राहक भी तो कहते रहे की अभी कल ही तो मिले थे आप ...........
पता है आप वापस नही आयेंगे .......
आपका साया हमारे साथ है .......
जो पग पग पर आपकी याद और सान्निध्य का अहसास करा करा के प्रेम से जीने की सीख दे रहा है ..........
कभी आपने कोई शिकायत हमसे नही की .......
ना कभी किसी बात पर रोका टोका ........
मगर आपके जाने ने हमें जो सिखाया उसके बारे में कुछ अभिव्यक्त कर पाना मेरे लिए ही नही आपके सभी परिचितों तक के लिए भी असंभव है ........
बाबा , आपके लिए आपके सभी आज भी दरवाजा बजने का इन्तेजार कर रहे है
बाबा सभी आपको miss कर रहे हैं ।
We miss you baba

मंगलवार, 28 अक्तूबर 2008

दीप प्रार्थना

शुभम् करोति कल्याणं,
आरोग्यम धन सम्पदा,
शत्रु बुद्धि विनाशाय,
दीप ज्योति नमोस्तुते
,

रविवार, 26 अक्तूबर 2008

दीप पर्व की हार्दिक शुभकामनाये


रक्ताल्प बच्चों के लिए

अब एक शिविर जिसमे बच्चों का हिमोग्लोबिन और आर एच फेक्टर काउंट किया जाकर तथ्य की पुष्टि फ़िर उनको आयरन की टेबलेट की खुराक खिलाने की नियमित व्यवस्था पर चर्चा का दौर प्रारम्भ कर दिया गया है ।


आप आपके सुझाव दे ताकि व्यवस्था जमाने का कोई सुलभ मार्ग मिल सके ।

फिलवक्त नगर के सभी सामाजिक संगठनो की बैठक जिला प्रशासन के साथ मिलकर आयोजित करने की रूप रेखा बना चुका हूँ जो दिवाली के बाद करवाना है ।

सभी को दीपावली के अवसर पर हार्दिक अभिनन्दन


आज का ख़ास दिन अमृत मंथन के दौरान निकले देव धन्वन्तरी; जिन्हें हम सब आयुर्वेद को जानने वाले चिकित्सा शास्त्र केजनक के रूप में जानते आए है को समर्पित है ।


बच्चों का स्वास्थ्य शीघ्र सुधरे इस हेतु भगवन धन्वन्तरी आशीर्वाद दे .........

शुक्रवार, 24 अक्तूबर 2008

रक्ताल्प बच्चे

कल डॉक्टर लीला जोशी साहिबा से चर्चा हुई । वे रतलाम जिले में कई विभिन्न संस्थाओं से जुड़ कर अपनी गतिविधियाँ संचालित करती हैं । रोटरी, लायंस, रतलाम ओब्स्त्रेटिक्स एंड गाय्नेकोलोजिकल सोसायटी आदि कई संस्थाओं की वे सक्रीय सदस्या हैं ।


श्री सेवा संस्थान के मध्यम से सेवा करते हुए उन्होंने चोकाने वाली जानकारी दी और साथ ही मुझसे एक इवेंट मेनेजर की तरह सहयोग चाहा। सामाजिक क्षेत्र में मेरा यह रूप मुझे नया सा लगा लेकिन मेरी गतिविधियों से जुड़ी सहोगात्मक अवधारणा मुझे सहयोगी के रूप में काम करने को प्रेरित कर गयी ।


उन्होंने जो मुझे बताया उसके अनुसार "जिले के आदिवासी अंचल में शिविर के जरिये उन्हें पता चला की स्कूली छात्रों का एक बड़ा समूह रक्ताल्पता का शिकार है, वे इस बारे में जागरूकता के साथ हिमोग्लोबिन और लाल रक्त कणों की कमी को घटाने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता महसूस कर रही है। और राजेश तुमसे उम्मीद है की तुम एक शिविर आयोजन करवाने में मदद करो ताकि एक कम उम्र वाला वर्ग जो बहुतायत में जिले में बसर कर रहा है को स्वास्थ्य लाभ मिल सके ।


मैं जानकारी पाकर चोंका क्योंकि मुझे जहाँ तक पता है प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों के माध्यम से शासन दवाईयां पहुंचाता रहा है । फ़िर न्यून रक्त वाले लोगों का इतने बड़ी संख्या में होना चोकाने वाली बात ही तो हुई ना। लेकन एक नोबल कॉज लक्षित हुआ है तो आने वाले बाल दिवस पर
एक सम्पूर्ण कार्य योजना के जरिये कुछ हो जाना चाहिए खास तौर पर बच्चों के स्वास्थ्य के बारे में ..........


मैं क्या क्या कर सकता हूँ इस आयोजन में कृपया आपके सुझाव बताये ...........

मंगलवार, 21 अक्तूबर 2008

बुध पुष्य से दीपावली तक की बधाईयाँ

दीपावली का त्यौहार नजदीक है ।
व्यापारिक बही चोपडे खरीदने का दिन पुष्यनक्षत्र के समय श्रेष्ठ कहा जाता है ।
इस बार यह बुधवार को आया है सो व्यापारिक हित में शुरुआत गिनी जाएगी ।
आप सभी पर्व की शुरुआत करें ।
सभी को त्योहारों की बधाईयाँ ।
खास तौर पर महालक्ष्मी पूजन के दिन की यानी दीपावली की ।

शनिवार, 18 अक्तूबर 2008

प्रतिभावान छात्र सम्मान समारोह

कल स्कुल ऑफ़ एक्सीलेंस में प्रतिभावान छात्रों का सम्मान किया गया। स्टेट में ६ ठी, ९ वी और दसवी रेंक इस स्कुल के विद्यार्थियों ने हासिल किए । ८५ % छात्र प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए । राज्य में उच्चतम अंकों से मेरिट में स्थान पाए छात्र छात्राओं का सम्मान पूर्व में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह जी के हाथो हो चुका है परन्तु शाला की उपलब्धियां शहर में ही ज्ञात नही थी। प्राचार्य के .पी. शर्मा के समय पर शाला को मिली उपलब्धियां तारीफ़ के काबिल हैं । शाला का पूरा स्टाफ शत प्रतिशत प्रथम श्रेणी में छात्रों के भविष्य के प्रति संकल्पित दिखा जो अपने आप में विशिष्टता है । स्कुल ऑफ़ एक्सीलेंस शासकीय होने के बाद भी उच्चतम शिक्षण के प्रति प्रतिबद्धता प्रदर्शित कर रहा है जो निश्चित ही सराहनीय कदम है । मेरा सौभाग्य रहा इस कार्यक्रम में अतिथि के रूप में जाने का जहाँ प्रो. अजहर हाशमी साहेब मुख्य अतिथि और अशोकजी तांतेड अध्यक्षता कर रहे थे ।

ऐसे में जबकि शिक्षा व्यावसायिकता की और जा चुकी है और शिक्षा से अधिक सुविधाओं के लिए पालक भुगतान कर रहे हैं शासकीय स्कुल के छात्रों की प्रतिभा ने ऐलान किया है की प्रतिभाएं सुविधाओं की मोहताज नही होती ।

स्कुल की प्राचार्या अनिला कँवर ने अभी अभी पदसंभाला है और विरासत में श्रेष्टता उन्हें हासिल है और उत्तरोत्तर प्रगति की पोजिटिव मानसिकता भी, उन्हें बधाई अच्छे स्टाफ और श्रेष्ठ विद्यार्थियों की ।

गुरुवार, 16 अक्तूबर 2008

त्योहारी समय में बाजार की गतिविधियाँ

सारा जगत महामंदी की चपेट में है। भारतीय त्यौहार के साथ अबकी बार पाँच राज्यों के चुनाव और लगनसरा का बाजार सजने लगा है । जहाँ में रहता हूँ , यह शहर रतलाम : सोना , सेव और साडियों के लिए अपना परिचय अन्तर राष्ट्रिय ख्याति के रूप में रखता है। बाजार ने शेयर, स्टॉक की गतिविधि से सोने की और रूख किया है । भारतीय त्यौहार हमेशा से कृषक प्रधान समाज की धरोहर रहे हैं । खेती की कमाई , मानसिकता और लगनसरा के दौर में स्वर्ण मूल्य हमेशा से ही तेजी के रहते आए और अब विश्व महामंदी से प्रेरित बाजार का रूख हमारे स्वर्ण के लोकल मार्केट पर जो प्रभाव दिखा रहा है वह एक नए मोड़ पर है । स्वर्णाभूषण के व्यवसायी इस बार बेहतर कमाई की उम्मीद से लबरेज हैं , इसका भरपूर फायदा उठाने की कोशिशें चुनावी दौर में किए जाने की रणनिति तैयार की जा रही है । मजा तो यह है कि कोई नया प्रकल्प हमारे नगर की गतिविधि में शरीक नही हुआ है फ़िर भी परम्पराओं को भुनाने की राजनीति का चुपके चुपके लाभ लिए जाने कि मानसिकता बनने लगी है।

भूमंडलीकरण की नई व्याख्या

इंग्लेंड की प्रिंसेस डायना अपने इजिप्शियन मित्र के साथ फ्रेंच टनल में दुर्घटना ग्रस्त हुई। वो एक डच ड्राईवर द्वारा चलाई जा रही जर्मन कार में बैठी थी जिसका पीछा इटालियन प्रेस फोटोग्राफर द्वारा जापानी बाइक से किया जा रहा था। पुर्तगाली डोक्टर ने उसका इलाज ब्राजीलियन दवा से किया था। यह संदेश जो आप पढ़ रहे है मुझे एक मित्र ने अपने चाइनीज मोबाइल से भेजा है। उसका मोबाइल एक पाकिस्तानी तस्कर के जरिये नेपाल की सीमा से होकर भारतीय हाथ में पहुंचा है एसा वह बताता आया है ।
उक्त संदेश आपको कई देशों के आयातित पुर्जों से बने कंप्यूटर के जरिये जिस पर अमेरिकी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट द्बारा हिन्दी सोफ्टवेयर की सुविधा मिली है द्वारा एक मराठी मात्रुभाषी ने नेट पर उन सभी हिंदीभाषियों के लिए लिखा है जो धरती के विभिन्न कोनो में गुजर बसर करते हैं।
भूमंडलीकरण की व्याखा करते हुए मुझे जो टिप्पणिया मिलेगी वो कई भाषाई प्रान्तों एवं सरहदों के पार तक से होगी यह मैं जानता हूँ।

बुधवार, 15 अक्तूबर 2008

मंगलवार, 14 अक्तूबर 2008

मेरा काम नही

विद्युत् मंडल द्वारा दीपावली के पहले मेंटेनेंस के नाम पर शाख कटाई की जा रही है । आज सुबह कुछ कर्मचारी आए और पेड़ की शाखाओं को लंबे बांस के जरिये काटा गया । काटने के बाद पेड़ की डालिया सड़क पर ही पटक दी गई उसे रस्ते से हटाना उनका काम नही, यह काम नगर निगम के सफाईकर्मी , मुहल्ले के रहवासियों का ही है उनकी निगाह में । अब हद तो इस बात की है जी की उन्होंने कुछ डालियाँ तोड़ तो दी हैं मगर वे पेडो पर टंगी पड़ी हैं । अब हवा चले तो कभी भी किसी के ऊपर गिर पड़े रस्ते चलते , एक्सीडेंट हो जाय उनकी बला से , मगर यह काम हमारा नही की सोच हावी है । फ़िर अखबार में खबरे छपनी भी तो चाहिए ....... वरना इनका सामाजिक महत्त्व कम नही हो जायेगा क्या ?
अब मैंने भी मेरा काम कर दिया।

आपको सूचित जो किया की वे कैसे करते हैं अपने काम ।
और नही तो क्या, वे जो डालियाँ तोडे उनके पीछे जाकर उठाता फिरूं क्या?
हम सभी तो अपने काम से काम रखते हैं फ़िर उन्होंने रखा तो क्या?
राजेश रोशन जी आपके लिए एक फोटो भी जोड़ दी है , मजाक समझ कर माफ़ करें
अपने घर के सामने के पेड़ पर तो मैं ध्यान रख सका हूँ मगर आपके घर और मुहल्ले का ध्यान आप रखना

प्रदर्शन पर मार-पिटाई ?

मंत्रीजी के घर प्रदर्शन के लिए गए लोगों की जमकर धुनाई कर दी गई । ख़बर अखबारों में पढ़ी । मंत्रीजी भी कभी प्रदर्शन किया करते थे । प्रदर्शन को अपने अधिकारों से जोड़ते रहे हैं।
भाई वाह, खूब की आपके समर्थकों ने भी , अब हर कोई ऊँगली उठाएगा नही, और उठाई तो उठाने से पहले दस बार सोचेगा। जय हो सत्ता की, समर्थकों की ।
और महाशय आप न .......... गए भी तो मंत्रीजी के घर को.......... ,
क्या जिलाधीश कार्यालय पर अपना प्रदर्शन नही कर सकते थे ?
किसी के घर पर प्रदर्शन क्यों?
अब पिट गए तो बवाल क्यो?
चलिए जो भी हुआ । अब अखबार देखें । इन्हे राजनीती के लिए नए शगूफे मिल गए और जनहित की बातें भूल मार पिट को तवज्जो दे रहे हैं। क्या आपको नही लगता की हमारे नेता की छबी ठीक रहे?

सोमवार, 13 अक्तूबर 2008

चुटकी

एक विदेशी किसी शहर में आया । लोगों ने बड़ी सह्रदयता से उसका स्वागत किया ।
एक घर में मेहमान नवाजी के दौरान उसने सवाल किया : क्या कोई "बड़ा आदमी" कभी यहाँ पैदा हुआ?
एक बच्चे ने जवाब दिया : अब तक तो बच्चे ही पैदा हुए हैं..........

शनिवार, 11 अक्तूबर 2008

आर्थिक महा संकट के दौर में

आज वित्त मंत्री ने कहा की विश्व व्यापी मंदी के दौर में पूरक प्रश्न संसद में रखने जा रहे हैं । अगले १० दिनों में हम प्रयास करेंगे तरलता बनाए रखने में । इधर रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने पर्याप्त पूँजी की बात कह धीरज बंधाया है।
रातों रात अमीर से सड़क पर आ गए लोग जो कुल आबादी का मात्र २ प्रतिशत होने चाहिए क्या उनके लिए ये सकून की बात है?
अगले दिनों में क्या क्या होगा?
संसद में क्या हो सकता है?
विचार करने योग्य है।
लाजमी भी है क्योंकि हमारे अर्थशास्त्री मंत्री इसे राजनीति के हवाले जो करने जा रहे है।

फिजिक्स एंड ल्युमेन पावर

सारा देश विद्युत संकट से त्रस्त है । वैकल्पिक विद्युत शक्ति का विचार लगातार होते हुए अब हमने जमीं पर हो रहे ल्युमेन लोस को घटाने के लिए टॉवर खड़े करना शुरू कर दिए है। मगर पुराने जमाने में महलों में फानूस के जरिये लो ल्युमेन को हाई ल्युमेन में बदलने वाली पद्धति को अनदेखा कर रखा है । आज जबकि ऑप्टिक फाईबर एवं क्रिस्टल टॉवर के जरिये से कम ल्युमेन पावर में अधिकतम रौशनी को पा सकते है जिससे रात्रिकालीन जगमगाहट की पर्याप्त मात्रा के बावजूद विद्युत व्यय को घटाया जा सकता है ।
भौतिक शास्त्र के वैज्ञानिक इस विचार पर कुछ कर गुजरेंगे ऐसी आशा है ।

शुक्रवार, 10 अक्तूबर 2008

आर्थिक महामंदी और भारतीय मुद्रा

आज बैठक है विश्व व्यापी आर्थिक मंदी के सम्बन्ध में । हम चिंतित हैं भारतीय मुद्रा मूल्य के गिरने से ।
कारणों की तह में तरल पूँजी की अधिकता हमारी पूँजी को मौद्रिक मूल्य की दशा में गिरने को मजबूर कर रही है । विकासशील देशों की गिनती में आज जब लखपति होना कोई बड़ी बात नही रही , ऐसे में जबकि हमारे वित्त मंत्री लगातार लिक्विडिटी के राज मार्ग पर बढ़ते हुए सम्मानित हो रहे थे अब चुनौती है अन्तर-राष्ट्रिय देखते है किस तरह मुद्रा मूल्यों को वे किस प्रकार संभालेंगे?

गुरुवार, 9 अक्तूबर 2008

प्रेम पाने के लिए ये भी एक तरीका तो है....

हा हा हा


हा हा हा

definately

सोमवार, 6 अक्तूबर 2008

नैनो

मारुती के बाद नैनो के जरिये रतन टाटा आम भारतीय को कार में देखने का सपना संजो बैठे।
देश के हालात बदलने चाहिए ऐसी सोच रखने का दु:साहस भी उन्होंने किया ।
कोई कृषक , तो कोई मजदूर , कोई कृषि भूमि बनाम औधोगिक भूमि , तो कोई निति पर अपना नजरिया दिखाने को आमादा हो गए ।
साम्यवाद , पूंजीवाद , कम्युनिस्म की चर्चाये नैनो की आड़ लेकर होने लगी ।
गुजरात के मोदी, मध्यप्रदेश के शिवराज नैनो के लिए सब कुछ लुटाने को तत्पर दिखे ।
भाई चाहे जो हो, नैनो बाजार में आए , चाहे न आए, एक बात तो तय है ।
एक उद्योगपति ने राजनितिक दलों के चरित्र का मंथन तो करा ही दिया ।

जय माता दी

गणेशोत्सव कि धूम के बाद गरबे का फैशन बूम पर है । आज समाचार छापा कि माताजी को हाथी पर बैठ दिया जाने के बदले कोर्ट में मामला दाखिल कराया गया है।
हमारा गणपति जब स्कूटर, एयर-प्लेन, बाज, मोर, या मोबाइल लिए दिखाया जा सकता है , गणपति बैठा कर तम्बोला खेला जा सकता है। तो माताजी का हाथी पर जा बैठना कानून कि परिधि में ले जाने लायक क्यों ?
अब माताजी भी रेलगाडी, कार,और भी कई साधनों से कही आ जा सकती है कोई जरूरी है शेर लिए घूमें ,जब बैठाया गया या वापस ले जाया जाएगा तब ट्रक आदि साधन का इस्तेमाल भी तो हुआ होगा। हकीकत में शेर पर बैठा कर स्थापित नहीं किया था ।
हाथी पर बैठा देने से मामला इतना संजीदा बना इसके पीछे माताजी पर हो रही राजनीती दिखने तभी तो दकियानूस लोग माताजी को आज के युग में भी शेर ही पर देखना चाहते है।

रविवार, 5 अक्तूबर 2008

quotes

The great pleasure in life is doing what people say you cannot do

इंटर नॅशनल नॉन वायोलेंस डे

महात्मा गाँधी का जन्म दिन २ अक्टूबर अब से अन्तरराष्ट्रिय नॉन वायोलेंस डे के रूप में महात्मा गांधीजी के सम्मान में मनाया जायेगा । सभी को बधाई ।

शनिवार, 4 अक्तूबर 2008

Quote

In God we trust;

all others must pay cash

गुरुवार, 2 अक्तूबर 2008

मेरे मित्र नीरज शुक्ला कि कविता

जिनका हौसला बुलंद, काम चाक चौबंद
और कद हिमालय से ऊंचा होता है,
हर शब्द में अर्थ बात में तथ्य
और खुदी में सामर्थ्य होता है
लेखनी में दम, आवाज में वजन
और नहीं माथे पर शिकन होता है।।
जिन्हें खुद के नहीं
बाकी दुनिया के परिवार और दुख-दर्द से मतलब होता है,
जिनके पास हर वक्त, वक्त कम रहता है
और काम का जुनूं हमेशा सिर पर रहता है,
जिन्हें जगह, समय और डर नहीं सताता है
कैसी भी हो स्थिति कर्त्तव्य निभाना आता है।।
हर रोज निभाते अपने वादे
खुद जागकर दुनिया को हैं सुलाते,
खतरों से हैं खेलते, नहीं कभी कतराते
जिनके मजबूत हौसले हैं, न कभी डगमगाते,
जो लिखते हैं सच, और सच हैं दिखाते
सच लिखने से नहीं है कभी घबराते।।
वो जो नहीं हैं कुछ खास, कलम के सिवा नहीं है कुछ पास
लेखनी है जिनकी साज, खामोशी को दें आवाज
नित करें नई सुबह का आगाज
ऐसा जुदा उनका अंदाज।।
हमेशा ही रहता जिनका दिन न होती कभी शाम
किसी भी कीमत पर नहीं डिगता इमान
नानक ईसा रहीम या राम
इनके लिए सभी एक समान
केवल इंसानियत जिनका मजबह नहीं किसी धर्म की पहचान।।
बुराईंयां जिन्हें नहीं हैं डरा पातीं
सफलता के और करीब हैं पहुंचातीं
स्वभाव में सरलताअभिव्यक्ति में स्पष्टता
और सच बोलना जिसकी निशानी है
सबकी मदद, तथ्य की सनद और काले अक्षर जिसकी कहानी है।।
जिनकों हर पल की रहती खबर, रहने न देते आपको बेखबर
जिनका न कोई सोम या रविवार
जिन पर हर बच्चे-बड़े-बूढे़ को है ऐतबार
एक ऐसी ही शख्सियत का जिससे सरोकार
हाँ मैं हूँ एक पत्रकार
नीरज शुक्ला

लोकगीत बनाम फिल्मी गीत

लोक परम्पराए बरसों से विभिन्न स्वरूपों में विद्यमान हैं । परम्परा जीवीत रहे इसके लिए तीज त्यौहार मनाते हुए कई बातें लगातार सीख के रूप में अगली पीढी तक पहुचाने की कवायदें की जाती हैं । फ़िल्म का रूपहला परदा इस कदर हावी हुआ की जहाँ हर गांव में किशोर वय युवा किसी फ़िल्म एक्टर की नक़ल करते दीखते हैं हमारी और हमारी पिछली पीढी में भी इसका आकर्षण रहा और अब नौबत ये है की सुदूर ग्रामीण अंचलों में लोकगीत भी अब फिल्मी होने लगे है।
भजन हो या कोई अन्य संगीत किसी फिल्मी धुन की मौजूदगी बरबस ध्यान खींच लेती है लेकिन बालिका वधु सीरियल में ढेढ़ राजस्थानी संगीत की महक की कर्ण प्रिय ध्वनि सुनकर लगा की फिल्मी गीत बनाम लोकगीत के बारे में कुछ अभिव्यक्त किया जाना चाहिए था .........
आपकी बारी .......

चित्रकला प्रतियोगिता

आज विश्व वन्य-जीव सप्ताह के अंतर्गत ईद , गाँधी जयंती, शास्त्री जयंती, को मनाते हुए चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। पहली से आठवीं को जूनियर ग्रुप तथा नवीं से कोलेज के अन्तिम वर्ष तक के छात्रों को सीनियर ग्रुप में शामिल करते हुए पर्यावरण एवं वन्य-जीव विषय पर चित्र बनाने थे।
चित्र आज शामिल नही कर पा रहा हूँ इसका मलाल है पर कोशिश करूंगा की आप देख सकें की शहर की हलचल कितना इजाफा करती है क्रिऐटीव नेचर को बढ़ाने में...........

मंगलवार, 30 सितंबर 2008

Civic Sense

15 Rules That India Lives by.....1।The Other Side Law: If my side of the road has a traffic jam, then I can start driving onthe wrong side of the road, and all incoming cars will be rerouted via bhopal .2. The No Queue Rule:If there is a queue of many people, no one will notice me sneaking into the front as long as I am looking the other way.3. The Mind Over Matter Law:If a red light is not working, four cars from different directions can easily pass through one another॥4. The Auto Axiom:If I indicate which way I am going to turn my vehicle, it is an information security leak.5. The In Spit Of Thing:The more I lean out of my car or bus, and the harder I spit, the stronger the roads become.6. The Cinema Hall Fact:If I get a call on my mobile phone, the film automatically goes into pause mode.7. The Brotherhood Law:If I want to win an argument, I need only to repeatedly suggest to the other person that I have illicit relations with his sister.8. The Baraat/ Marriage Right:When I'm on the road to marriage, all the roads in the city belong to me. To ME.9. The Heart Of Things:If I open enough buttons on my shirt, the pretty girl at the bus stop can see through my mal-formed chest into the depths of my soul.10. The Name Game:It is very important for the driver behind me to memorize the nicknames of my children.11. Parking Up The Wrong Tree:When I double-park my car, the road automatically widens so that the traffic is not affected.12. The Chill Bill Move:When I park and block someone else's car I am giving him a chance to pause, relax, chill and take a few moments off from his rushed day.13. The Ogling Stare:If you don't ogle and drool at every hot Chick that passes by, you're gay.14. The Bus Law:If I stop my bus at the correct place near the bus stop, the city will explode and blow into 6 million pieces.15. The VIP Rule:There are only 3 important persons in this city -Me, I, Myself!


देश भक्ति के लिए प्रोत्साहन

एक बालक अपने माँ पिता की उम्मीदों को दिशा देने की इच्छा में माहौल पाता है ।
वो पिता जो ख़ुद फौज में था चाहेगा की उसका बेटा फौज में जाए पर ये जज्बा सम्पूर्ण भारतीय मानसिकता का परिचायक नही । हमारे देश ने फौजी सेवाओ की अनिवार्यता भी नही रखी है ऐसे में एक उपाय जो मुझे बातो बातों में मालूम हुआ आपसे शेयर करना चाहूंगा हो सकता है आपकी सहमती बने , हो सकता है न भी बने मगर सुझाव के रूप में प्रस्तुत है
एक पिता अपनी अभिलाषाओं के पुत्र की अपेक्षा करता है ऐसे में वो देश पर कुर्बान होने वाली पीढी को बनने से बचाता है , यदि पिता को उसके इसी पुत्र की देश सेवा के बदले में बतौर पेंशन कुछ आय होने लगे उस वक्त भी जब वो कर्तव्यों पर मौजूद हो , (शहीद न हुआ हो ) तो शायद वो स्वस्फूर्त होकर अपने बच्चे देश को अर्पित करने को तैयार हो सकता है , एक तरह की हिचकिचाहट भी घटे और नया वातावरण भी तैयार हो ..............
आप इस विचार के बारे में अभिव्यक्ति दे
सहमति या असहमति के रूप में आप के अधिकतम वोट कुछ दिशाएँ तय करने में मददगार हो सकते हैं
फ़िर आपकी इच्छा भी तो है न ?

सोमवार, 29 सितंबर 2008

तात्कालिक भाषण प्रतियोगिता

कल क्लब में तात्कालिक भाषण प्रतियोगिता का आयोजन हुआ भूली बिसरी प्रतियोगिता में उपस्थितों को देखने सुनने के बाद कार्यक्रम की निर्णायिका सबा खान ने प्रसन्नता जताते हुए कार्यक्रम के जरिये परम्परागत तात्कालिक भाषण प्रतियोगिता की तारीफ़ तो की लेकिन साथ ही यह भी कहा कि आज टी वी युग ने जो प्रभाव पुरे समाज पर डाला है उससे कहने वाले कम होने लगे हैं।
सहमति है आपसे लेकिन साथ ही कैरियर ओरीएंटेड एजुकेशन व कंप्यूटर के जमाने में अपनी बात कहने के लिए नई तकनीके भी आ गई है, लेकिन एक बात कि प्रतियोगिता के सभी पुरूस्कार लड़कियों ने जीते जबकि कुल १७ प्रतियोगी कक्षा १२ वीं तक के इसमे शामिल हुए ........
अब आपका क्या मत है?

शनिवार, 27 सितंबर 2008

सर्व रोग चिकित्सा शिविर

भारत भक्ति संस्थान की रतलाम ईकाई द्वारा सर्व रोग निदान शिविर का आयोजन आज संपन्न हुआ । कैंसर , ह्रदय रोग, चर्म रोग आदि इत्यादि बीमारियों का एलोपेथ सिस्टम से ईलाज इस शिविर में किया गया । शहर के बाहर से भी चिकित्सकीय सेवाओं हेतु चिकित्सक यहाँ बुलवाए गए । इस शिविर में सबसे ज्यादा मरीज चर्म रोग के रहे ।
विगत कई वर्षों के अनुभव के बाद तथा नगर में चर्म रोगियों की संख्या में ईजाफे को देखते हुए महसूस हुआ की एक बड़ा जिला जो प्रदेश में सातवें स्थान पर अपना कद बनाए हुए है। एक छोटे से, साधारण से चिकित्सक की नियुक्ति को तरस सा रहा है। तो साथ ही यह विचार भी उपजा की महत्वपूर्ण एवं बड़ी बीमारियों की दशा में कैसे सुधार पाएंगे इन सेवाओं को?

शुक्रवार, 26 सितंबर 2008

हँसे कुछ पल

भगवान हमारे साथ धरती पर क्यों नहीं रहता? स्वर्ग में क्यों रहता है?
ग़लत कही; वो न स्वर्ग में है न नरक में वो तो अलग ही लोक में रहता है , क्योंकि उसके ख़ुद के बनाए जीवो से डरता जो है।

ऐसी कई चाबियाँ बताओ जिनसे दरवाजा नही खुलता है।
म्यूजिक इनस्त्रुमेंटकी चाबिया .....

बुधवार, 24 सितंबर 2008

भारत अब रखेगा कदम चन्द्रमा पर

India's First Mission to the Moon Unveiled!
According to the Indian space agency, India's first mission to the moon is to be launched sometime around October 22-26, 2008 from the coast of the Bay of Bengal। It will be lofted up using the Indian Space Research Organization's (ISRO) workhorse rocket the Polar Satellite Launch Vehicle (PSLV) and the mission is likely to cost Rupees 386 crores. Chandrayaan-I is an unmanned scientific mission designed to map the resources of the moon and would undertake the most intense search for water on the moon surface.

क्या कहूँ रिश्ते जो हैं.........

प्रिया सुधीर शुक्ला की लघु कथा रिश्ते को पढा बड़ा ही भावविभोर कर देने वाला कथानक है ये जो नईदुनिया द्वारा निकाले जाने वाली बुधवारीय पत्रिका नायिका में आज ही छापा गया है।
एक संगठित परिवार की बहू के बाद बिछुड़ने की प्रक्रिया से गुजरते हुए अलग अलग हो जाने के बावजूद वर्तमान पीढी का साहचर्य जिसमे उन्होंने शुक्रवार के व्रत के दिन भतीजे द्वारा लाकर दिए ताजे गुडहल के लाल फूलों से भावविभोर होकर यह विश्वास इन शब्दों में "अलगाव की पुनरावृत्ति इस पीढी में नही होगी , क्योंकि बच्चे बड़ों की गलतियों से सबक ले रहे हैं। लिख कर व्यक्त किया।
भावना आपके मन की है , मगर कर्म का रेखांकन भी एक सबक बना उसका क्या?

रविवार, 21 सितंबर 2008

लार्ज हेड्रोन कोलाईडर

मशीन बंद करना पड़ी का समाचार पढा तो पता चला चुम्बक अत्यधिक गर्म हो जाने की वजह से प्रयोग को रोका गया है । फ़िर पता चला हीलियम गैस भी बड़ी मात्रा में लीक हो गई है।
प्रयोग करना थे , करने हैं , किए जाते रहेंगे ।
मानवीय आवश्यकता के आविष्कार सुखदाई जीवन के लिए हैं तो इनमे रूचि बनी रहती है ।
विश्व के कई महापुरुष ब्रह्म ज्ञान की चर्चा कर गए उसमे लोगों की रूचि नही रही क्या वैज्ञानिक जो ज्ञान प्राप्त करना चाहते हैं वो वाकई रुचिकर होंगे?
विज्ञान पराविज्ञान के अर्थों में लगा है , खोज में लगा है ।
जैन आचार्य भगवन दिगंबर मुनि श्री चन्द्रसागर जी महाराज से पूछने पर उन्होंने कहा निरर्थक प्रयास हैं , अपनी प्रतिष्ठा बनाए रखने का कर्म है . .............

शनिवार, 20 सितंबर 2008

वर्णाक्षर

कहते हैं अंग्रेजी के प्रथमाक्षर "A" में धैर्य है क्योंकि ० से लगाकर ९९९ तक की गिनती को अंग्रेजी के शब्दों में लिख दे तो यह कही नही होता और पहली बार १००० यानी " थाउसेन्ड " में पहली बार इस्तेमाल होगा ।

इसी तरह हिन्दी का प्रथम वर्णाक्षर "अ" इतना शक्तिशाली है कि किसी भी शब्द के मायने बदल कर विपरीत अर्थ देने में यह सक्षम है ।


कर देखें ..........


ठीक है न यह बात

पढ़ कर देखिये

amazing...

fi yuo cna raed tihs, yuo hvae a sgtrane mnid, too .Cna yuo raed tihs? Olny 55 plepoe tuo fo 100 anc.I cdnuolt blveiee taht I cluod aulaclty uesdnatnrd waht I was rdanieg. The phaonmneal pweor of the hmuan mnid, aoccdrnig to a rscheearch at Cmabrigde Uinervtisy, it dseno't mtaetr in waht oerdr the ltteres in a wrod are, the olny iproamtnt tihng is taht the frsit and lsat ltteer be in the rghit pclae. The rset can be a taotl mses and you can sitll raed it whotuit a pboerlm. Tihs is bcuseae the huamn mnid deos not raed ervey lteter by istlef, but the wrod as a wlohe. Azanmig huh? yaeh and I awlyas tghuhot slpeling was ipmorantt! if you can raed tihs forwrad it.

If you can read this, your brain is 50% faster

एक अध्ययन के अनुसार हमारा दिमाग पढ़ते वक्त स्पेल चेकिंग प्रायः नही करता

इसी वजह से आप यह पत्र पढ़ पा रहे हैं

गुरुवार, 18 सितंबर 2008

प्रेम और संत समागम

अचानक एक दिन रोटरी की असेम्बली से निकल कर एक सूफी धर्म गुरु के यहाँ जाने का अवसर हुआ । बिना किसी औपचारिक परिचय के भीड़ भरे वातावरण में प्रेममय सान्निद्ध्य से अभिभूत था । कव्वाली चल रही थी और हम मजा लेने लगे थे । अगले दिन किसी काम से डॉक्टर के यहाँ जाना था जो दिन में देर से होना था सो एक बार फ़िर से बाबा साहेब से मिल लिया जाने का मन बना और हम दोनों दोस्त घर पहुंचे । वहाँ भी पुरे मनोभाव से प्रेम पूरित वातावरण था ।
अचानक एक दिन सूफीसंतश्री घर को आए तो सत्कार का अवसर मिल गया । वे अजमेर ख्वाजा शरीफ जा रहे थे सो उन्हें छोड़ने रेलवे स्टेशन जाने का मन बनाया । स्टेशन पर भरी भरकम भीड़ ने उनके पहुँचते ही एक अनोखा माहौल पैदा कर दिया । मै गया तो महज उन्हें स्टेशन पर छोड़ने, लेकिन हुआ कुछ एसा की ख्वाजा की इबादत को साथ हो लिया, अजमेर से किशनगढ़ जाकर नारोली में दिगंबर जैन धर्मस्थल पर निर्मित हो रहे ऋषभदेव के भव्य स्वरुप के दर्शन का अवसर पाया। वापस अजमेर में कव्वाली का आयोजन था सो दरगाह जाना जरूरी था फ़िर बाबा साहब की इजाजत लेकर वापसी करनी थी क्योंकि क्लब का पदग्रहण समारोह था और जिन्हें अपना चार्ज देना था अशोक जी मेरे ही साथ थे । हम दोनों कव्वाली से लौटे और चित्तोड़ की बस पकड़ कर वहां से रेल यात्रा करना चाहते थे । सुबह अवसर था कि किले का भ्रमण कर लिया जाए । नहा धोकर किले के लिए टैक्सी की और पूरा किला और मन्दिर में देव दर्शन प्रारम्भ किए । अशोकजी जैन मान्यता के होने से जैन मंदिरों में दर्शन किया जाना भी साथ साथ चलता रहा ।
मीरा के मन्दिर में प्रेम का संगीत और प्रातः काल की बेला दोनों के संगम ने पुनः हृदय भर सा दिया जिस अहसास को सूफियाना तौर पर साथ ले चले थे वही अब सनातनी था ।
मीरा के मन्दिर में कृष्ण और संगीत की धुनों में तरंगित अहसास से सराबोर वातावरण में अचानक "विष का प्याला" याद आ गया । मनन करते हुए यह बात भागवत कथा के चलते ऋषिकेश से पधारे संत श्री मतंग बाबा के सम्मुख रख दी । उन्होंने गुनगुनाया पहले वही छंद जो मीरा की वाणी है " विष का प्याला राणा ने भेजा , पीवत मीरा हांसी रे " फ़िर सवाल की "हांसी रे क्यूँ ?" अचानक सवाल की उम्मीद नहीं थी पर जवाब बाबाजी से ही माँगा तो उन्होंने कहा प्रेममय मीरा अपने से पहले श्रीकृष्ण को सभी कुछ प्रदान करती थी सो सुंदर पात्र के इस विष को भी उन्होंने अपने दिव्य प्रेम को सहज ही अर्पित कर दिया था , और अपनी मति पर यह जानकर की यह तो विष है हंसना क्या सहज नहीं था ?
कैसा विलक्षण प्रेम और अनुभूति
अब बारी आपकी

धन के १५ अनर्थ

स्तेयं हिंसान्रितं दम्भः कामः क्रोधः स्मयो मदः ।
भेदो वैरमविश्वासः संस्पर्धा व्यसनानि च। ।
एते पंच्दशानर्था ह्यर्थमूला मता नृणाम ।
तस्मादनर्थमर्थाख्यं श्रेयोर्थीदूरस्त्यजेत। ।

धन के कारण होने wale 15 अनर्थ वाले १५ अनर्थ माने गए हैं : चोरी हिंसा झूठ दंभ काम क्रोध गर्व अहंकार भेदबुद्धि वैर अविश्वास स्पर्धा लम्पटता जुआ और शराब । जो व्यक्ति अपना कल्याण चाहता है, वह स्वार्थ और परमार्थ का विरोध करने वाले इस अनर्थ को जिसे अर्थ (धन)कहा है , दूर ही से त्याग दे।

मुक्ति के सन्दर्भ में वेद वाणी

पुंसो यम् संसृतेहेतुरसन्तोषोर्थकामयोः
यदृच्छयोपपन्नेन सन्तोषो मुक्तये स्मृतः ।
धन और भोगों से संतोष न होने के कारण ही आदमी को जन्म - मरण के चकार में पड़ना होता है। तदनुसार , जो मिल जाए , उसी में प्रसन्न रहने वाला मुक्ति पाता है ।

वेद वाणी

दंडन्यासः परं दानं कामत्यागस्तपः स्मृतम।
स्वाभाव विजयः शौर्यम सत्यम च सम दर्शनम्। ।

किसी को दंड न देना, सबको अभय देना दान है ।
कामनाओं को त्याग करने का नाम तप है। अपनी वासनाओं को जीतने का नाम है वीरता ।
सभी में समता भावः निहित करना सत्य है ।

नोट : ध्यान दें कि "ही " का इस्तेमाल कहीं नही है सो स्वरुप में इन्हे शामिल करें ।

बुधवार, 17 सितंबर 2008

कंजूस

कंजूस कई तरह के होते हैं
पहली श्रेणी में वे आते है जो सिर्फ़ कमाना चाहते हैं खर्चना बिल्कुल नही
दुसरे वे जो सिर्फ़ ख़ुद पर खर्चकर सकते हैं
तीसरे जो कभी कभार दूसरो पर खर्च करते हैं
चौथे वो जो खर्च करते कम हैं पर दिखावा ज्यादा करते हैं
पांचवे वो जो किसी पर खर्च कर दें तो उस पर किए खर्च की इतनी दुहाई देते हैं की सामने वाला इस स्थिति में आ जाता हैं कि भरपाई तक कर देता हैं फ़िर भी ये दुहाई देते नही थकते

आइये इनसे सीखे जीवन की कला क्योकि गुणीजनलक्ष्मी के महान पुजारी जो हैं

नायाब प्रेमियों की गत

याद आ गए

रांझा हीर

महिवाल सोनी

शीरी फरहाद

पर असर नही दिलों पर अब

भटकते हैं गलियों में वो अब रद्दी अखबारों के बहाने , बेचने चूडियाँ कंगन

न हीर है कहीं न शीरी न सोनी

रांझे बंद हैं चोरी के जुर्म में, फरहाद आतंकवाद में और महिवाल को पकडा था कल गली में सट्टा करते

अहिंसा

अहिंसा प्रतिष्ठायाम तत्सन्निधौ वैरःत्यागः ।

अहिंसा जहाँ स्थापित या प्रतिष्ठित हो जाती है वहाँ सभी प्रकार के वैर भाव समाप्त हो जाते हैं ।

कहते हैं अहिंसा जहाँ स्थापित ही जाती है वहाँ शेर और गाय एक घाट पर पानी पीते हैं ।
हमारा दुर्भाग्य की अहिंसा के देश में आतंकवादी अपना वैर भाव त्याग नही सके हैं , जरूरी है की आत्म मंथन करे ।


एक गीत इसी परिपेक्ष्य में

हम को मन की शक्ति देना ,
मन विजय करें,
दूसरों की जय से पहले
ख़ुद की जय करें


बाकी पंक्तिया आप याद करे और पोस्ट पर लगा दे ।

सोमवार, 15 सितंबर 2008

वेद : दान कि प्रेरणा दो

अदित्सन्तं चिदाघ्रुणे पूषन दानाय चोदय ।
पणेश्चिद वि म्रदा मनः ।
हे तपा तपा कर शुद्ध करने वाले देव , आज जो दान नहीं देना चाहता , उसका मन भी देने कि और प्रेरित करो । जो कंजूस हैं , उसका मन भी मुलायम बनाओ । उसे दान कि प्रेरणा दो ।

शिक्षा से स्वीकारोक्ति

प्रजापिता ब्रह्मासे शिक्षा प्राप्त करने के बाद गुरु दक्षिणा के रूप में उनके पास मौजूद गुण में से एक स्वीकारने को कहा गया

एक ने इन्द्रिय दमन

दुसरे ने दान

तीसरे ने दया

स्वीकार की।

स्वीकार करने वालों में पहला देव दूसरा मानव और तीसरा दानव था ।

वेद में मनोकामनाएं

मनसः काममाकातीं वाचः सत्यमशीय ।

पशूनाम् रूपमन्नस्य रसो यशः श्रीः श्रयतांमयी स्वाहा । ।

मेरे मन की इच्छा पूर्ण हो । वाणी के सत्य व्यवहार की क्षमता मुझे प्राप्त हो । पशुओं से रूप से मेरे घर की शोभा बढे , अन्न से श्रेष्ठ स्वाद मिले । लक्ष्मी और सुयश सब मेरे अधीन हों।

ग्रीश्मस्ते भूमे वर्षाणि शर्द्धेमन्तः शिशिरो वसन्तः ।


ऋतवस्ते विहिता हायनीरहोरात्रे पृथिविनो दुह्ताम । ।


हे पृथिवि ग्रीष्म, वर्षा, शरद् , हेमन्त , शिशिर और बसंत ये छहों ऋतुएँ , दिन-रात और वर्ष सब हमें फ़ल देने वाले हों ।

रविवार, 14 सितंबर 2008

विचार

Strong and bitter words indicate a weak cause

सार्थक दान गरीब की झोली से

कारगिल युद्ध के बाद देश में सैनिकों के उत्साह वर्धन के लिए सहायता राशी जुटाई जा रही थी।

महाराष्ट्र समाज के तत्वावधान में इस राशी के एकत्रीकरण के लिए हम सब एकत्रित हुए थे। हर गुजर कर आने जाने वाले व्यक्ति को रोक कर हम उससे यह राशि प्राप्त कर रहे थे की एक भिखारी सामने आकर खडा हो गया और याचना करने लगा की उसे भीख दी जाए। मैंने उसे देश की सेवा में दान इकट्ठा किए जाने की बात बताकर कहा कि उसके जीवन में ये क्षण बिरले आए है जबकि वह दान कर देश के उस कर्ज को कम कर पायेगा जो देश के प्रति उसे करने हैं। वो रोने लगा और अपनी पोटली खोलकर जमा की गयी पूँजी में से जो कुछ उससे बन पडा दान पेटी में डाल गया ।

मेरे साथियों ने उसे दान करते और रोते देख कर मुझसे पूछा तो उसने सुबकते हुए जवाब दिया "भैया ने मुझे जीवन में दान देने का ऐसा अवसर समझाया है कि कृतज्ञता का अर्पण कर रहा हूँ देश के प्रति इस दान से ......... ,

ये तो भैया ही पता नही कौन है.....

जो मुझ जैसे भिखारी को भी दान को प्रेरित कर गए ............ ,

वरना मैं तो जैसा हूँ वैसा ही मर भी जाता ......... ,

मेरा इह लोक तर गया ये दान देकर............

और वो रोते रोते चला गया था।

शनिवार, 13 सितंबर 2008

अटेंशन

वाह जी आप भी न
दिन भर कमाते रहते हैं
हमारी तरह

कमेन्ट/स्लोगन ऑन अबोर्शन

उन्होंने ईश्वर से डरना छोड़ दिया है , जो भ्रूण हत्या के दोषी हैं। जिन्हें कन्या नहीं चाहिए उन्हें बहू भी मत दीजिये।

गुरुवार, 11 सितंबर 2008

फ़िर मिलेंगे.........

प्रेमी युगल समन्दर के किनारे बैठा था

प्रेमिका ने कहा : लार्ज हेड्रोन कोलाईडर के बारे में पढा ? दुनिया संकट में है....... पता भी है तुम्हे ?
प्रेमी बोला : प्रेम का कुछ नही बिगड़ता चलो इतिहास रचें .......
प्रेमिका : वो कैसे ?
प्रेमी : दरिया में आज ही डूब लेते है। कल के अखबार में हमारी ख़बर तो होगी कि प्रेम से भरे युगल ने प्रलय के पहले ही आत्म समर्पण कर दिया ..........

प्रलय का डर




एल एच सी का भयावह रूप सभी का आकर्षित कर रहा है । हम मजबूर हैं की चर्चा करें। अनपढ़ और नासमझ लोगों की भ्रांतियां दूर करें या विपक्ष रखें ।
पर विज्ञानं है तो कमाल का , एक्स-रे कि खोज के बाद अल्फा , बीटा , गामा रे से हम अपरिचित नही है , न्यूट्रान, प्रोटोन से भी परिचित है।
असावधानी का संकट हमेशा से रहा है , आशंका जाहिर करना भी आवश्यक है किंतु प्रस्तुति भय युक्त कर वैज्ञानिको का काम ग़लत बताना कितना उचित है समय बताएगा ।
प्रलय कि आशंकाए सच होंगी या ब्रम्हांड कि खोज का नया सूत्र हाथ लगेगा लेकिन एक बात तो सच है कि जिस डाली पर बैठो उसे ही काट दो का कालिदासी सच तो जीवित ही है , इन वैज्ञानिको को प्रयोग करने को धरती ही क्यों मिली, अन्य गृह क्यों नही मिला था जहाँ यह प्रयोग किया जा सकता था ?

मंगलवार, 9 सितंबर 2008

चर्च जलाने की घटना पर

विगत दिनों नगर के एक चर्च को जला दिए जाने की घटना हुई। आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है। एक और चर्च हिंदूवादी संगठनों पर आक्षेप लगा रहा है तो हिंदू संगठन मिशनरी पर धर्म परिवर्तन के आरोप जड़ने में संलग्न है। पुलिस प्रशासन द्वारा चर्च के चौकीदार को आग लगाने का दोषी बताया गया है तो चर्च पिछली घटनाओं में संलग्न व्यक्तियों की गिरफ्तारी की मांग पर अड़ा है ।
इस सब में ईसाई समुदाय प्रेम के संवाद से की ईश्वर सद्बुद्धि प्रदान करे उन लोगों को जिस किसी ने कुकृत्य किया सुनकर भला लगा।
राजनैतिक दल जिस समय अपनी रोटियां सेंकने को तलबगार है , प्रेम धुन असमंजस खडा किए दे रही है ।

कम होती कन्यायें

भारत में महिला शक्ति का स्थान श्रेष्ठ रहा है। देवी स्वरुप में पूजनीय रही हैं वे। रावण की पत्नी मंदोदरी को कभी राक्षसी वृत्ति का नहीं कहा गया। वे जो अमानुषिक कृत्यों की सहभागी रही मसलन पूतना या शूर्पणखा उन्हें ही राक्षसी कहा गया।
परन्तु आज महिलाओं का एक बड़ा तबका भ्रूण ह्त्या में शामिल है जिनमे महिला चिकित्सक भी परे नहीं होती।
कल आंकडे प्रस्तुत किये जा रहे थे टेलीविजन पर और पुरुषों की तुलना में कम पड़ती जा रही महिला आबादी के मायने समझाए जा रहे थे। भौतिकतावादी दौड़ में पड़ा इंसान छोटे परिवार के लिए बाध्य है तब पुत्र चाहत में भ्रूण हत्या होना कोई अनोखी बात नहीं। हम चाहे जो अनुमान धर लें जब तलक संतोषपूर्ण जीवन शैली विकसित नहीं होती कानून की अनदेखी और कन्या भ्रूण हत्याएं होती रहेंगी। पाश्चात्य जीवन शैली और हमारी संस्कृति के दोष ढूँढने की लडाई में आक्रमण कमजोर पर ही तो होगा न।
पुरुषों के जरिये सुरक्षा की आस ने पुरुष जीवन को विसंगति में डाल दिया , जबकि लक्ष्मीबाई, चेन्नम्मा , नूरजहाँ के बाद अब नई पीढी में बेनजीर, इंदिरा, सोनिया, प्रियंका जैसी महिलायें सबल पक्ष जतलाने के लिए कम नहीं है.............
भ्रूण ह्त्या पारिवारिक कमजोरी को अधिक प्रदर्शित करती है बजाय सामाजिक विकृति के ...........

सोमवार, 8 सितंबर 2008

शिक्षक दिवस

कल नगर को साहित्य के क्षेत्र में समृद्धि दिलाने के प्रतिक माने जाने वाले गुरुदेव श्रद्धेय श्री जयकुमार जी जलज साहब से मिले उन्हें शिक्षक दिवस पर लाइफ टाइम अचीवमेंट का सम्मान शिक्षक सांस्कृतिक मंच द्वारा प्रदान किया गया है तो उन्हें बधाई प्रेषित की । काली टोपी और हाथ में छड़ी लिए शिक्षक के हाई मोरल पर भी चर्चा हुई जो कभी समाज का विभिन्न अंग हुआ करती थी। आज की फैशन परस्त शिक्षा, जिसमे शिक्षा कम और पैसे का महत्त्व अधिक है , शिक्षक के चारित्रिक पतन को भी इंगित करती है । शिक्षक दिवस के अवसर पर उच्च आयाम स्थापित करने वाले शिक्षक जिन्हें पाने के पूर्ण हकदार हैं क्या प्रासंगिक नही की समाज उन्हें सम्मानित करे। शिक्षकों द्वारा शिक्षकों का सम्मान किया जाना प्रेरणास्पद है मगर छात्रों द्वारा या समाज द्वारा सम्मान नही सुना जा रहा। हाँ शासन की मंशा जरूर रहती है दिवस मना कर सम्मान करने की जिसमे शहर का जुडाव सुनिश्चित नही किया जाता ।

रविवार, 7 सितंबर 2008

चुटकी

प्रेमी ने प्रेमिका से कहा : मुझे ऐसी बीवी चाहिए जो आज्ञाकारी हो, अच्छा खाना पकाए, मेरे कपडे धोए, जबान न चलाए.......
प्रेमिका बीच में बोल पड़ी : कल मेरे घर आ जाना ये सारे गुण मेरी नौकरानी में है ।

शनिवार, 6 सितंबर 2008

आओ हंस लें

शराब के नशे में आगे जा रही गाडी का पीछा करते हुए घर कि तलाश में गाड़ी आगे बढ़ाई। अचानक वो गाड़ी रुकी तो उससे टक्कर हो गयी।

उसने कहा : भाई गाड़ी रोकने के पहले इंडिकेटर तो दिया होता.........

"भाई वाह, बड़ी अजीब कही आपने, अब अपने गराज में गाडी खड़ी कर देने पर भी इंडिकेटर देना पड़ेगा क्या?

धर्म : लिस्ट

वैदिक
२ ईसाई
बौद्ध

इस्लाम
जैन

यहूदी
कंफ्युशस
ताओ : जापान में शिन - ताओ
१० सिख

११ पारसी

आप के पास चिन्ह हो तो पोस्ट करें

बुधवार, 3 सितंबर 2008

व्रत

एक अनेकार्थी शब्द से वाकिफ कराने का मेरा प्रयास है यह।
प्रतिज्ञा , साधना , कर्म , आचरण, संकल्प , मर्यादा , धारणा, संस्कृति आदि कुछ विषयों को छूने का उत्सव रुपी धर्म स्वरुप इस नाम के जरिये जाना जाता है।
ईश्वरीय कथानकों के मध्यम से व्रत किए जानेको कहा है।
सोचें मैनेजमेंट की थ्योरी से, क्या व्रत हमें प्लानिंग से लगाकर प्रोफिट तक के समस्त पक्षों को रूबरू नही कराते हैं?
जीवन के विभिन्न बिन्दुओं का समाधान नही करते?
बदले अपनी मानसिकता, आप भारतीय समृद्धि को पाने में व्याकुल हो जायेंगे .........
बजाय विदेशी अनुराग के

अप्-संस्कृति


सारे देश में गणेशोत्सव की धूम है। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक का स्वतन्त्रता संग्राम का यह तरीका हम सभी जानते हैं। सामाजिक सांस्कृतिक आयोजनों के जरिये जो संदेश इस उत्सव के माध्यम से दिए जा सकते थे उनका हश्र क्या हुआ है यह भी हमें पता ही है। जन जाग्रति के परिणामों में यह उत्सव तब्दील होकर कहीं समस्या खड़ी न कर दे इस लिए इसे मनाने के गंभीर तरीके की बजाय तम्बोला खेलकर फूहड़ ढंग से प्रस्तुति दी जाती है जिसे बदले जाने की आवश्यकता है।
बिहार के बाढ़ पीडितो को मदद का आव्हान इन कार्यक्रमों के मध्यम से हो सकता है मगर सोच का अभाव अप्-संस्कृति की भेंट चढ़ा हुआ है ।
सार्वजनिक गणेशोत्सव की अप्-संस्कृति मिटाकर वन्दना का आव्हान हमेशा की तरह एक बार फ़िर ...........
मेरे अपने प्रयत्न निरंतर हैं .......
शामिल होने का सभी से आव्हान है ...........

सोमवार, 1 सितंबर 2008

भ्रूण-हत्या, सेरोगेट-मदर, कानून और राष्ट्र

विज्ञान की महारत का परिणाम रहा की शरीर के भीतर देख पाने का यंत्र बना।
जिस नोबल सोश्यल कॉज को लेकर यंत्र बना उसी का दुरुपयोग स्वार्थ और धन कमाने की आड़ बना।
सेरोगेट का सिस्टम आगे जाकर किस और रूख करेगा यह चिंता का विषय है। यदि अनुबंध के मुताबिक किसी का भ्रूण धारण कर नोबल सोश्यल कॉज के तहत पैदा हुआ बच्चा विकलांग हुआ और वे माँ पिता जिनसे अनुबंध हुआ है इसे स्वीकार न करे तब?
ग्लोबलाईजेशन के कानूनों में दो विभिन्न देशों की भूमिका किस प्रकार सम्बद्ध की जायेगी एसे में जबकि परोपकारी माँ का पैसे की खातिर बिकी होना दृष्टिगोचर हो रहा हो, गरीबी को न्याय मूल रूप से दिलाये जाने में राष्ट्र क्योकर समय देंगे? क्या निहायत व्यक्तिगत मामला जताकर इससे मुह नही मोडा जाएगा?
भ्रूण हत्या का रूप भी विकलांगता की आड़ लेकर नोबल कॉज होने की दरकार में है।
सांप निकल जाने पर लाठी ना मारें, समय रहते सजग विचार हो।
आधुनिकता के जामे में कल के माँ बाप बच्चे पैदा कराने के नए बहाने और खुद के पास समय न होने को चिकत्सा विज्ञान की हवस न बना दे..............

सीख

एक कथा जिसे व्यवसाय के प्रारंभिक दौर में सुना था ।
प्रासंगिक है लिखना भी
वडोदरा में पाणीगेट के आस पास लोहे के व्यापारियों की दुकाने हैं।
एक रोज़ इन दुकानों के आस पास एक फटेहाल व्यक्ति को घूम घूम कर इनके भीतर देख रहा जानकर एक व्यापारी ने दुत्कार दिया।
एक सा व्यापार करने वाले पड़ोसी दूकानदार ने प्रेमपूर्वक बुलाकर उससे पूछा : क्या चाहिए तुम्हे?
उस फटेहाल भिखारी से लगने वाले व्यक्ति ने चार ट्रक माल की खरीदी कर डाली।
किसी को छोटा समझने की भूल न करने की हिदायत हमने पाई, आप भी पायें भाई।
सत्यनारायण देव की जय

रविवार, 31 अगस्त 2008

serrogate

कई वर्षों पहले हम जानते थे की रानिया अपनी सुन्दरता बनाए रखने के लिए अपने बच्चों को दूध पिलाने के लिए धाय नियुक्त किया करती थी । अब बच्चा पैदा करने के लिए भी दूर कहीं एक कोख तलाशी जा रही हैं। सुन्दरता की इस संस्कृति को मेडिकल साइंस की आड़ में परोसा जा रहा है जो आगे जाकर पुनः विकृति को जनम देगा । निःसंतान दंपत्तियों के लिए अवसर तथा गरीब कोख को सुअवसर की आड़ में चालु हुए इस कार्य का आगे जाकर कुछ नया ही हश्र होगा यह तय है ।
इंतज़ार करें ................ वो दिन भी दूर नहीं ।

शनिवार, 30 अगस्त 2008

मगजपच्ची

तीन दोस्त अपने साथ कुछ लड्डू लेकर यात्रा को निकले । घूमते घामते एक पेड़ के नीचे थकान मिटाने को बैठे तो नींद लग गई । पहला दोस्त उठा तो देखा बाकि के दोनों दोस्त बेखबर सो रहे है। उन्हें उठाना उचित नही लगा तो भूख मिटाने के लिए लड्डू के तीन हिस्से किए । एक लड्डू अतिरिक्त बच गया तो वो पास खड़ी गायको खिला दिया । जब दूसरा मित्र उठा तो उसने भी यही किया की तीन हिस्से कर अपना हिस्सा खाया अतिरिक्त एक लड्डू कुत्ते को डाल दिया। तीसरे की बारी आई तो वह भी तीन हिस्से कर अपनी भूख मिटा कर अतिरिक्त एक लड्डू गैया को खिला कर सोया । सवेरे तीनो ने आपस में चर्चा की और बचे हुए लड्डू तीन हिस्सों में बांटेअतिरिक्त एक को कुत्ते को खिला दिया ।

सवाल यह है की कुल कितने लड्डू लेकर वो लोग चले थे ।

संख्या पूर्णांक में है।

शुक्रवार, 29 अगस्त 2008

बीजिंग की जमीन पर चमके नए सितारे

चीन ने बीजिंग की जमीन पर 8 अगस्त 2008 की रात को ओलिम्पिक के उद्‍घाटन समारोह में आतिशबाजी से आकाश में अलौकिक चमक बिखेरकर सबको मंत्रमुग्ध किया था। लेकिन इसके बाद इससे कहीं ज्यादा चमक बिखेरी उन खिलाड़ियों ने, जिन्होंने अपने प्रदर्शन से न सिर्फ अपने देश बल्कि पूरी दुनिया को अपना दीवाना बना दिया। किसी भी ओलिम्पिक का सबसे अधिक आकर्षण 100 मीटर फर्राटा दौड़ होती है, जबकि इन खेलों का समापन मैराथन दौड़ के साथ होता है। ओलिम्पिक की इन दोनों ही प्रमुख स्पर्धाओं में दुनिया ने नए चैम्पियनों को देखा।
100 मीटर में उसेन बोल्ट ने बाजी मारी तो मैराथन में केन्याई एथलीट चैम्पियन बना। धरती का सबसे तेज धावक : यूसैन के लिए बीजिंग हमेशा के लिए इसलिए भी यादगार बन गया, क्योंकि उन्होंने यहाँ 'फर्राटा डबल' पूरा कर नया इतिहास रचा। 100 मीटर दौड़ 9.69 सेकंड के विश्व रिकॉर्ड समय में पूरी करने के बाद उन्होंने 200 मीटर दौड़ भी 19.30 सेकंड के विश्व रिकॉर्ड समय में पूरी की। इस तरह वे पहले एथलीट बन गए, जिन्होंने एक ही ओलिम्पिक में 2 स्पर्धाओं में विश्व कीर्तिमान तोड़े। यही नहीं, वे 1984 में अमेरिका के कार्ल लेविस के बाद 'फर्राटा डबल' बनाने वाले पहले धावक बन गए। बोल्ट ने 200 मीटर दौड़ में अमेरिका के माइकल जॉनसन का 1996 के अटलांटा ओलिम्पिक में बनाया 19.32 सेकंड का पिछला रिकॉर्ड तोड़ा।
मैराथन में वांसिरू का रिकॉर्ड प्रदर्शन : 21 बरस के सैमुअल वांसिरू ओलिम्पिक मैराथन जीतने वाले पहले केन्याई धावक बने। उन्होंने 42.15 किलोमीटर का फासला रिकॉर्ड 2 घंटे 6 मिनट और 32 सेकंड में तय किया। केन्या इससे पहले दो बार पुरुष मैराथन का रजत पदक जीत चुका था, लेकिन यह पहला मौका है, जब उसने मैराथन में सोने की चमक देखी। वांसिरू ने तीन बरस पहले ही मैराथन दौड़ में हिस्सा लेना प्रारंभ किया था और हाफ मैराथन में रिकॉर्ड स्थापित किया था।
बीजिंग में केन्याई एथलीटों ने हैरतअंगेज प्रदर्शन करके 14 पदक जीते, जिसमें पाँच स्वर्ण शामिल थे। उससे आगे सिर्फ अमेरिका 23 पदकों के साथ प्रथम और रूस 18 पदकों के साथ दूसरे नम्बर पर रहा। युवा सनसनी पामेला जेलिमो भी महिला वर्ग में केन्या का परचम लहराने में सफल रहीं। उन्होंने महिला वर्ग में केन्या के लिए पहला स्वर्ण पदक 800 मीटर में जीतकर खाता खोला था।
अनूठी शैली : जमैका की शैली एन. फ्रेजर की जिन्दगी की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। शैली का बचपन बेहद तंगहाली में बीता। जब वे अपनी माँ के साथ सड़क किनारे सामान बेचती रहती और ऐसे में पुलिस के आने पर उन्हें सामान लेकर भागना पड़ता था। इसी भागदौड़ ने उन्हें एथलीट बना दिया। बीजिंग ओलिम्पिक में शैली महिलाओं की 100 मीटर फर्राटा दौड़ में 10.78 सेकंड के समय के साथ दुनिया की सबसे तेज धाविका बन गईं। वैसे फर्राटा दौड़ में जमैका का ही जलवा रहा, जहाँ उसने 'क्लीन स्वीप' करते हुए तीनों पदकों पर अपना कब्जा जमाया। शैली के बाद दूसरे नंबर पर रहने वाली शेरोन सिम्पसन ने 10.98 सेकंड के साथ रजत और केरोन स्टुअर्ट ने 10.98 सेकंड के साथ काँस्य पदक जीता।
इथोपिया की दिबाबा का दबदबा : जिस तरह पुरुषों में यूसैन बोल्ट दो स्पर्धाओं को जीतकर 'ओलिम्पिक डबल' बनाने वाले 1984 के बाद (कार्ल लेविस) पहले एथलीट बने तो यह गौरव महिला वर्ग में इथोपिया की दिबाबा ने प्राप्त किया। वे दुनिया की पहली ऐसी महिला एथलीट बनीं जिन्होंने 5 हजार मीटर के बाद 10 हजार मीटर में स्वर्णिम सफलता प्राप्त की। 10 हजार मीटर में वे नया ओलिम्पिक रिकॉर्ड स्थापित करने में सफल रहीं।
बेकेले का 10 हजार मीटर का खिताब बरकरार : केनेनिसा बेकेले ने अपने ही ओलिम्पिक कीर्तिमान को सुधारते हुए पुरुषों की 10 हजार मीटर दौड़ के स्वर्ण पदक पर कब्जा बरकरार रखा। इथियोपिया के बेकेले ने 27 मिनट 01.17 सेकंड के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता और एथेंस में बनाए अपने 27 मिनट 05.10 सेकंड के कीर्तिमान को सुधारा ।
केनेसिसा ने इससे पहले बीजिंग में 5 हजार मीटर में भी स्वर्ण पदक जीता और अपना 'ओलिम्पिक डबल' पूरा किया। आश्चर्य की बात तो यह है कि उन्होंने 5 हजार और 10 हजार दोनों में ओलिम्पिक रिकॉर्ड कायम किए। एथेंस में भी केनेनिसा ने 5 हजार मीटर में रजत पदक पाया था। इस तरह अब तक वे 3 ओलिम्पिक स्वर्ण और 1 रजत पदक जीत चुके
एलेना इसिनबाएवा की स्वर्णिम छलाँग : गत ओलिम्पिक चैंपियन रूस की एलेना इसिनबाएवा ने इस बार भी अपनी स्वर्णिम छलाँग का सिलसिला जारी रखा। उन्होंने ऊँची कूद में अपने ही विश्व कीर्तिमान में सुधार करते हुए स्वर्ण पदक जीता। इस साल यह तीसरा प्रसंग है जबकि इसिनबाएवा ने नया विश्व रिकॉर्ड कायम किया है। बीजिंग से पहले रोम और मोनाको में विश्व रिकॉर्ड ध्वस्त कर चुकी थीं। बीजिंग में इसिनबाएवा ने 5.05 मी. की ऊँचाई पार की। उन्होंने अपने पुराने रिकॉर्ड को 0.01 सेंटीमीटर से ध्वस्त किया
माइकल फेल्प्स ने पानी से निकाला सोना और रचा इतिहास : जब भी बीजिंग ओलिम्पिक का जिक्र ‍‍छिड़ेगा तो सबसे पहला नाम अमेरिका के सोने से लदे तैराक माइकल फेल्प्स का नाम जुबाँ पर आएगा। फेल्प्स ने जब भी स्व‍िमिंग पूल में छलाँग लगाई, वे सोना लेकर ही लौटे। उन्होंने 400 मीटर व्यक्तिगत मेडले, 4 गुणा 100 मीटर फ्रीस्टाइल रिले, 200 मीटर फ्रीस्टाइल, 200 मीटर बटरफ्लाई, 2 गुणा 400 मीटर फ्रीस्टाइल रिले, 200 मीटर व्यक्तिगत मेडले और 100 मीटर बटरफ्लाई और 4 गुणा 100 मीटर मेडले रिले में भाग लिया और सभी में सोना बटोरकर ओलिम्पिक इतिहास के पन्नों पर अपना नाम स्वर्णाक्षरों में दर्ज करवा दिया। अमेरिकी तैराक स्पिट्ज ने 1972 के म्यूनिख ओलिम्पिक खेलों में सात स्वर्ण पदक जीते थे, लेकिन आठ स्वर्ण जीतकर ओलिम्पिक में नया इतिहास बनाने की गरज से चीन की जमीन पर कदम रखने वाले फेल्प्स ने पानी में ऐसा तूफान मचाया कि स्पिट्ज का रिकॉर्ड इतिहास बनकर रह गया। उन्होंने आठ में से सात स्पर्धाओं में नया विश्व रिकॉर्ड कायम करने के साथ स्वर्ण पदक जीते।एथेंस ओलिम्पिक के मिले सोने के छह तमगों को मिलाकर ओलिम्पिक में फेल्प्स के स्वर्ण पदकों की संख्या कुल 14 हो चुकी है और अभी भी उनकी प्यास नहीं बुझी है। उन्होंने ऐलान कर दिया है कि वे 2012 के लंदन ओलिम्पिक में भी उतरकर अपने स्वर्ण पदकों की संख्या को बढ़ाना पसंद करेंगे।
जलपरी स्टेफनी राइस : जिस प्रकार ओलि‍म्पिक तैराकी में फेल्प्स का जादू सिर चढ़कर बोला, उसी तरह महिला वर्ग में ऑस्ट्रेलिया कीस्टेफनी राइस ने 'जलपरी' बनने का सम्मान प्राप्त किया। राइस ने अपना गला तीन सोने के पदकों से सजाया। उन्होंने 400 मीटर व्यक्तिगत मेडले और 200 मीटर व्यक्तिगत मेडले में विश्व कीर्तिमान स्थापित किए जबकि तीसरा स्वर्ण पदक उन्होंने मेडले रिले में जीतने में सफलता प्राप्त की।
साइकिलिंग में क्रिस छाए : बीजिंग ओलिम्पिक के वैलोड्रम (साइकिलिंग ट्रैक) पर ब्रिटेन के क्रिस होय को कोई भी चुनौती नहीं दे पाया। वे यहाँ पर तीन स्वर्ण पदक जीतने में कामयाब रहे। 100 साल बाद (1908) साइकिलिंग में तीन स्वर्ण पदक अर्जित करने वाले वे पहले ब्रिटिश खिलाड़ी हैं। क्रिस ने एथेंस ओलिम्पिक में भी स्वर्ण पदक जीता था, लिहाजा अब उनके स्वर्ण पदकों की संख्या चार हो गई है।
वेबदुनिया से साभार

बुधवार, 27 अगस्त 2008

बोल्ट ने जीता चीन का दिल

रविवार, 24 अगस्त 2008
बीजिंग ओलिम्पिक के महानायक एवं तूफानी धावक उस्मान बोल्ट ने सिर्फ ट्रैक पर जंग के साथ ही चीन के लोगों का दिल भी जीत लिया, जब भूकंप प्रभावित शिचुआन प्रांत के बच्चों के लिए उन्होंने 50,000 डॉलर दान के रूप में दिए। ओलिम्पिक में 100 मीटर, 200 मीटर और चार गुणा सौ मीटर की रिले दौड़ का स्वर्ण जीतने वाले जमैका के इस फर्राटेदार धावक ने कहा कि हमने यहाँ अच्छा प्रदर्शन करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि लोगों ने खेल का मजा लिया होगा।बोल्ट ने दक्षिण पूर्व चीन में भूकंप पीड़ित लोगों के जल्दी ही इस संकट से उबरने की कामना की। उन्होंने कहा कि इस त्रासदी से उबरकर आगे बढ़ना होगा। ओलिम्पिक से लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।शिचुआन और नजदीकी इलाकों में 12 मई को आये भूकंप में करीब 70000 लोग मारे गए और 18000 लापता हो गए। करीब एक करोड़ लोग बेघर हो गए।बोल्ट ने कहा कि उन्होंने टीवी पर भूकंप की रिपोर्ट देखी है। उन्होंने कहा कि मुझे उन लोगों के लिए दुख है, लिहाजा मैने टीम प्रबंधन को कुछ करने के लिए कहा।बोल्ट ने चीन के रेडक्रास फाउंडेशन के महासचिव लियू शुआंगो को 50000 डॉलर का चेक भी दिया। व्हीलचेयर पर आए शिचुआन के दो बच्चों ने बोल्ट को तोहफे के तौर पर अपनी बनाई तस्वीरे दी।बोल्ट ने कहा कि इन बच्चों का बेहतर भविष्य होना चाहिए। अभी ये बच्चे हैं और इनकी जिन्दगी में सिर्फ खुशियाँ होनी चाहिए। मैं इनकी मदद करना चाहता हूँ।

सोमवार, 25 अगस्त 2008

देने का गुर दिया......

धन्यवाद जमैकन धावक उसैन बोल्ट
स्वर्ण तो तुमने जीता ही ओलिम्पिक में , देश का नाम भी रोशन किया , पर मैं तुम्हारा आभारी हूँ की तुमने भूकंप पीडितों की दशा को समझा और दान दिया ।
तुमने संस्कृति पैदा की दान के साथ, दिया , देने का गुर भी

गुरुवार, 21 अगस्त 2008

वृद्धाश्रम

वृद्धाश्रम से स्वतन्त्रता दिवस मना कर लौटते वक्त हरजीत भाई ने सवाल किया : संख्या इतनी कम क्यों है?
विस्तृत चर्चा हुई , उपेक्षित - प्रताडित वृद्धों , बदलते परिवेश, पाश्चात्य संस्कृति की विकृति आदि पर विचार चिंतन हुआ।
सुकून की बात यह थी कि वर्तमान में निहायत जरूरतमंद एवं निराश्रित वृद्ध ही अन्तःवासी हैं। एकल परिवार कि संस्कृति और हमारे सांस्कृतिक मूल्यों में गिरावट से इन स्थानों पर निवासी बढ़ेंगे।
ईश्वर करे अपनी विरासत के बोध से लबरेज परिवार खुशहाल रहें और वृद्धों को घर में सुकून मिले..................

सोमवार, 18 अगस्त 2008

खेल से स्थापित होते मूल्य

भारतीय मुक्केबाज़ अपने मुकाबले जीतकर क्वार्टर फायनल में जा पहुंचे हैं। हम सभी हिन्दुस्तानी आशा लिए बैठे हैं कि फ़िर कोई पदक भारत के खाते में दर्ज हो।
बेंटम वेट के राउण्ड १६ के मुकाबले में विश्व चैम्पियन सर्जेई वोदोप्यानोव को हराकर अखिल कुमार ने विजय हासिल की और अपनी सफलता में समग्र परिवेश को धन्यवाद दिया जिसमे परिवार, मित्र, सहपाठी, खेल प्रशिक्षक सभी शामिल हैं तो इस बात को सुनकर लगा कि भारतीय मूल्य स्थापित होने लगे हैं। अखिल के अनुसार खून पसीना बहाकर खेलने में जो सार्थक माहौल प्रेम परिवेश का प्राप्त होता है, उसी का परिणाम है कि ओलिम्पिक में वे इस मुकाम को हासिल कर सके।
धन्यवाद अखिल........... भारतीय मूल्यों के पुनर्स्थापन को शब्दों में अभिव्यक्त करने के लिए।
विजेंदर और जितेंदर दोनों भी अखिल को अपना साथी और मार्गदर्शक मानते है बकौल उन्ही की जुबानी मैंने उन्हें सुना इंटरव्यू के दौरान। ७५ किलोग्राम वर्ग में विजेंदर ने जीत में सुविचारित रणनिति के साथ रिंग में उतरने के वक्त उनका काम और दिमाग बनाने में प्रशिक्षकों के योगदान को महत्वपूर्ण बताया तो लगा की खेल में बाहर बैठे लोग अपनी भूमिका का निर्वहन भली प्रकार जब करते हैं और माकूल नीतियों में खिलाडी उन्हें समझ पाता है तब ही किसी पदक की गुंजाईश की जा सकती है।
खैर फिलवक्त शुभकामनायें ........... और
प्रार्थना ईश्वर से ......
पदक के साथ मूल्यों का पुनर्स्थापन भी हो............

मंगलवार, 12 अगस्त 2008

पिता के प्रेरण का पारस

एक स्वर्ण पदक पाकर स्वर्णमयी हुए भारतीय खेल जगत के रातों रात सितारे बने अभिनव बिंद्रा की सफलता में अभिनव के पिता का प्रेरण , समर्पण, योगदान और पुत्र के सपने में हमराह बन जाने के गुन और आदर्श ने हमारी सभ्यता का बोध करा दिया है।

जिस भी किसी पुत्र को उसकी इच्छित दिशा में आगे बढ़ने का सुअवसर उसका पिता प्रदान करता है वह पुत्र निश्चित ही सफलता का चरम छूता है। इसके लिए पुत्र में भी अपने पिता का आज्ञाकारी होने का गुन होना जरूरी तत्व है।

हमारी सभ्यता और संस्कृति से लुप्त हो रहे सामाजिक विश्वास की कड़ी में "बिंद्रा परिवार" ने "पारस"ढूंढ निकाला है। यह विरासत का पारस गुम न होने पाये।

शुभकामनाएं !

सोमवार, 11 अगस्त 2008

बैंक मेनेजर

रोज़ सवेरे उठकर अपनी सूटकेस उठाना फिर गाडी उठाकर बैंक पहुंचकर अपने दफ्तर की गतिविधियों का संचालन करना रोज़ ही का काम था।
प्रोबेशनरी बैंक ऑफिसर की परीक्षा पास करके प्रमोशन लेते हुए मेनेजर के पद पार आते आते दुनियादारी से दूर हो कब अपने ही अपने तक "वो" सिमित हो गया , जानता नहीं था।
सीनियर्स के अनुभव और ट्रेनिंग - बैठकों ने उसे डिपोजिट बढ़ाने के एक मात्र लक्ष्य से एकात्म कर दिया । लोन के आवेदन कर्ताओं से उसे खीझ होती थी , रिकवरी उसे सशंकित लगती जिसके मारे लोन देना बुरी बात लगती। कोई लोन ना मांग ले उससे अतः किसी से मुस्कुराकर बात करना अपने गले आफत बुलाने जैसा महसूस होता जिससे उसके जीवन में दोस्तों की कमी हो गई।
वो जो हिन्दुस्तान को उंचाईयां देने में आर्थिक तंत्र के माध्यम से रीढ़ बन सकता था दकियानूसी मानसिकता से ग्रस्त होकर रह गया था।
उसकी सिमित दुनिया में उसका घर, परिवार, दफ्तर,गाडी,कर्मचारी,डिपोजिटर्स और वरिष्ठ अधिकारियों के संपर्क शेष बच रहे थे जब वह रिटायर हुआ । रिटायर होने के बाद उसकी पत्नी ने रिश्तेदारों से कायम रखे संबंधों की राह पार उसकी जिन्दगी डाली थी और वो सोचता था कि अगर उसकी पत्नी बीच ही में साथ छोड़ जाती तो.............

रविवार, 10 अगस्त 2008

दूध में मक्खी

नौकरी करते हुए बच्चों की पढाई , उनकी नौकरी - बिजिनेस , शादी कराते हुए अपने सपनों का मकान बनाकर रिटायर हुए तो सोचा था किनियमितता और धर्म-ध्यान में मन रमा लेंगे ।
सुभाह उठकर सैर को जाना, नहा-धोकर पूजन फिर नाश्ता कर मंदिर जाना सब्जी लाना जैसे काम करने के बाद भी पहाड़ जैसे दिन काटना मुश्किल हो गया ।
अखबार कहीं जाकर पढ़ना, फिर व्यवस्था और नेताओं में बेवजह नुक्स निकालना , बीती बातों को याद कर बुद्धिमत्ता परोसना उनके दिन काटने का जारिया भले हो परन्तु "वे" निरर्थक थे रिटायर कि तरह।
लोगों की निगाहों में..........

भारत को पहला स्वर्ण

पहले पहल १० मीटर रायफल शूटिंग का स्वर्ण अभिनव बिंद्रा के खाते में

भारतीय ओलिम्पिक इतिहास रचा

बधाई अभिनव ! हमें फख्र है तुम पर !

अनुभव जीवन का

गुजरात में बिताए दिन आज भी स्मृति-पटल पर अंकित हैं। मेरी, अजय कपूर और अभय चंद्रात्रे की जोड़ी चिर-परिचित हुआ करती थी वडोदरा में। एक दिन पावागढ़, जो विश्वामित्री नदी का उद्गम है और माँ काली के पवित्र मन्दिर के लिए धार्मिक आस्था का केन्द्र होकर प्रसिद्द है, येज्दी-हीरो होंडा लेकर करीब चलिस किलोमीटर दूर पहाडों की गोद में पहुंचे । उन दिनों यह स्थान अपने प्राकृतिक स्वरुप में हुआ करता था और पैदल चढाई के अतिरिक्त कोई साधन नहीं था। उन्हीं दिनों एलीवेटर लगाने का काम प्रारम्भ हुआ ही था । हम इस चढाई पर चढ़ते हुए जान बुझकर सीढियां छोड़ पत्थर पकड़ते हुए चढ़ने लगे थे , अपनी मस्ती में मस्त बिना रुके देखे पलटेचढ़ते हुए यूँ ही अचानक कम करने वाले मजदूरों द्वारा छोड़ी गई एक रस्सी उठा ली थी । पर्वतारोहण को हम में से कोई जानता नही है आज तक और यह रस्सी लिए हम एक ऐसी जगह पर जा पहुंचे जहाँ से नीचे जाने और उपर चढ़ने का कोई रास्ता ही नही था बस एक पेड़ जो पहाड़ से डालीनुमा निकल रहा था हमारा एक मात्र सहारा बना था। जहाँ हम रुकने को मजबूर थे वहां कोई २०० मीटर की खाई और १२ फुट ऊंचाई और हम तीनो की थरथराहट थी जिसे काबू में रखकर रस्सी को डाली में फेंक कर , जैसे तैसे लटकते बदन छिलाते डाली पर चढ़कर निकल पाने में कामियाब तो हुए पर होंसलों की इस उड़ान पर आज तक फख्र नहीं महसूस कर पाते और हमारी बेवकूफी हमें शर्मिंदा करती है। आज का ये लेख उन नौजवानों को दे रहा हूँ जिनके बुलंद होंसले गलतियां किया करते हैं और कई बार तकदीर उनके साथ नहीं होती।

गुरुवार, 7 अगस्त 2008

हमारा ओलिम्पिक




खेल महाकुम्भ नजदीक क्या , कल ही से शुरू होने वाला है। हम भारतीय कितने प्रतिनिधि खिलाड़ियों के साथ किन किन खेलों में शामिल हो रहे हैं और कितने पदकों की दौड़ में शामिल हैं यह बात ब-मुश्किल कुछेक लोग जानते होंगे।

हम निश्चित तौर पर उन्ही खिलाड़ियों से आस लगाए बैठे होंगे जिन्होंने गई मर्तबा अपना जोरदार प्रदर्शन किया है , पदक भले ला पाने में असमर्थ रहे तो क्या? किंतु हम कोई नई प्रतिभा अवश्य ही नही ढूंढ पाये , यह भी तय ही है। हमारी हॉकी की टीम इस बार नही खेलेगी इसकी चिंता बीच में की गई और राजनितिक बखेडा खड़ा कर शान्ति बहाल है।

स्थानीय स्तर पर खेलने वाले खिलाडी गुपचुप तरीके आजमा कर राज्य राष्ट्रीय स्तर पर जाने कैसे भी नौकरियां हासिल कर स्वार्थ सिद्ध कर चुके होंगे यह भी हमारे लिए गौण बातें हैं। देश के इतिहास को जाने तो ओलिम्पिक के ८८ वर्षीय समय में मात्र १५ पदक हमारे खाते में दर्ज हुए हैं , जो हमारा अब तक का रिकॉर्ड है।

खेलना ज्यादा जरुरी है या खेल नियम या दोनों ? खेल बजटप्रतियोगिता की नियमितता ?, प्रशिक्षकों की वयवस्था? इत्यादि प्रश्नों पर हमारी खामोशी भी बड़ी अचम्भे से भरी हुई है।

दोष निकालने वालों की संख्या अधिक है बजाय उपायों को दर्शाने के ।

मूलतः कुछ करने दिए जाने के निरंतर प्रयासों की उपेक्षा ही देश में देश-भक्ति और अन्तर-राष्ट्रीय विचारधारा में क्षीणता के कारक हैं। एक अड़चन हमारे विकृत विचार भी , जिसकी वजह से अपने सुख को पाना तो चाहते है परन्तु किसी को आगे बढ़ते देखना कतई बर्दाश्त नहीं कर सकते।