मंगलवार, 30 सितंबर 2008

Civic Sense

15 Rules That India Lives by.....1।The Other Side Law: If my side of the road has a traffic jam, then I can start driving onthe wrong side of the road, and all incoming cars will be rerouted via bhopal .2. The No Queue Rule:If there is a queue of many people, no one will notice me sneaking into the front as long as I am looking the other way.3. The Mind Over Matter Law:If a red light is not working, four cars from different directions can easily pass through one another॥4. The Auto Axiom:If I indicate which way I am going to turn my vehicle, it is an information security leak.5. The In Spit Of Thing:The more I lean out of my car or bus, and the harder I spit, the stronger the roads become.6. The Cinema Hall Fact:If I get a call on my mobile phone, the film automatically goes into pause mode.7. The Brotherhood Law:If I want to win an argument, I need only to repeatedly suggest to the other person that I have illicit relations with his sister.8. The Baraat/ Marriage Right:When I'm on the road to marriage, all the roads in the city belong to me. To ME.9. The Heart Of Things:If I open enough buttons on my shirt, the pretty girl at the bus stop can see through my mal-formed chest into the depths of my soul.10. The Name Game:It is very important for the driver behind me to memorize the nicknames of my children.11. Parking Up The Wrong Tree:When I double-park my car, the road automatically widens so that the traffic is not affected.12. The Chill Bill Move:When I park and block someone else's car I am giving him a chance to pause, relax, chill and take a few moments off from his rushed day.13. The Ogling Stare:If you don't ogle and drool at every hot Chick that passes by, you're gay.14. The Bus Law:If I stop my bus at the correct place near the bus stop, the city will explode and blow into 6 million pieces.15. The VIP Rule:There are only 3 important persons in this city -Me, I, Myself!


देश भक्ति के लिए प्रोत्साहन

एक बालक अपने माँ पिता की उम्मीदों को दिशा देने की इच्छा में माहौल पाता है ।
वो पिता जो ख़ुद फौज में था चाहेगा की उसका बेटा फौज में जाए पर ये जज्बा सम्पूर्ण भारतीय मानसिकता का परिचायक नही । हमारे देश ने फौजी सेवाओ की अनिवार्यता भी नही रखी है ऐसे में एक उपाय जो मुझे बातो बातों में मालूम हुआ आपसे शेयर करना चाहूंगा हो सकता है आपकी सहमती बने , हो सकता है न भी बने मगर सुझाव के रूप में प्रस्तुत है
एक पिता अपनी अभिलाषाओं के पुत्र की अपेक्षा करता है ऐसे में वो देश पर कुर्बान होने वाली पीढी को बनने से बचाता है , यदि पिता को उसके इसी पुत्र की देश सेवा के बदले में बतौर पेंशन कुछ आय होने लगे उस वक्त भी जब वो कर्तव्यों पर मौजूद हो , (शहीद न हुआ हो ) तो शायद वो स्वस्फूर्त होकर अपने बच्चे देश को अर्पित करने को तैयार हो सकता है , एक तरह की हिचकिचाहट भी घटे और नया वातावरण भी तैयार हो ..............
आप इस विचार के बारे में अभिव्यक्ति दे
सहमति या असहमति के रूप में आप के अधिकतम वोट कुछ दिशाएँ तय करने में मददगार हो सकते हैं
फ़िर आपकी इच्छा भी तो है न ?

सोमवार, 29 सितंबर 2008

तात्कालिक भाषण प्रतियोगिता

कल क्लब में तात्कालिक भाषण प्रतियोगिता का आयोजन हुआ भूली बिसरी प्रतियोगिता में उपस्थितों को देखने सुनने के बाद कार्यक्रम की निर्णायिका सबा खान ने प्रसन्नता जताते हुए कार्यक्रम के जरिये परम्परागत तात्कालिक भाषण प्रतियोगिता की तारीफ़ तो की लेकिन साथ ही यह भी कहा कि आज टी वी युग ने जो प्रभाव पुरे समाज पर डाला है उससे कहने वाले कम होने लगे हैं।
सहमति है आपसे लेकिन साथ ही कैरियर ओरीएंटेड एजुकेशन व कंप्यूटर के जमाने में अपनी बात कहने के लिए नई तकनीके भी आ गई है, लेकिन एक बात कि प्रतियोगिता के सभी पुरूस्कार लड़कियों ने जीते जबकि कुल १७ प्रतियोगी कक्षा १२ वीं तक के इसमे शामिल हुए ........
अब आपका क्या मत है?

शनिवार, 27 सितंबर 2008

सर्व रोग चिकित्सा शिविर

भारत भक्ति संस्थान की रतलाम ईकाई द्वारा सर्व रोग निदान शिविर का आयोजन आज संपन्न हुआ । कैंसर , ह्रदय रोग, चर्म रोग आदि इत्यादि बीमारियों का एलोपेथ सिस्टम से ईलाज इस शिविर में किया गया । शहर के बाहर से भी चिकित्सकीय सेवाओं हेतु चिकित्सक यहाँ बुलवाए गए । इस शिविर में सबसे ज्यादा मरीज चर्म रोग के रहे ।
विगत कई वर्षों के अनुभव के बाद तथा नगर में चर्म रोगियों की संख्या में ईजाफे को देखते हुए महसूस हुआ की एक बड़ा जिला जो प्रदेश में सातवें स्थान पर अपना कद बनाए हुए है। एक छोटे से, साधारण से चिकित्सक की नियुक्ति को तरस सा रहा है। तो साथ ही यह विचार भी उपजा की महत्वपूर्ण एवं बड़ी बीमारियों की दशा में कैसे सुधार पाएंगे इन सेवाओं को?

शुक्रवार, 26 सितंबर 2008

हँसे कुछ पल

भगवान हमारे साथ धरती पर क्यों नहीं रहता? स्वर्ग में क्यों रहता है?
ग़लत कही; वो न स्वर्ग में है न नरक में वो तो अलग ही लोक में रहता है , क्योंकि उसके ख़ुद के बनाए जीवो से डरता जो है।

ऐसी कई चाबियाँ बताओ जिनसे दरवाजा नही खुलता है।
म्यूजिक इनस्त्रुमेंटकी चाबिया .....

बुधवार, 24 सितंबर 2008

भारत अब रखेगा कदम चन्द्रमा पर

India's First Mission to the Moon Unveiled!
According to the Indian space agency, India's first mission to the moon is to be launched sometime around October 22-26, 2008 from the coast of the Bay of Bengal। It will be lofted up using the Indian Space Research Organization's (ISRO) workhorse rocket the Polar Satellite Launch Vehicle (PSLV) and the mission is likely to cost Rupees 386 crores. Chandrayaan-I is an unmanned scientific mission designed to map the resources of the moon and would undertake the most intense search for water on the moon surface.

क्या कहूँ रिश्ते जो हैं.........

प्रिया सुधीर शुक्ला की लघु कथा रिश्ते को पढा बड़ा ही भावविभोर कर देने वाला कथानक है ये जो नईदुनिया द्वारा निकाले जाने वाली बुधवारीय पत्रिका नायिका में आज ही छापा गया है।
एक संगठित परिवार की बहू के बाद बिछुड़ने की प्रक्रिया से गुजरते हुए अलग अलग हो जाने के बावजूद वर्तमान पीढी का साहचर्य जिसमे उन्होंने शुक्रवार के व्रत के दिन भतीजे द्वारा लाकर दिए ताजे गुडहल के लाल फूलों से भावविभोर होकर यह विश्वास इन शब्दों में "अलगाव की पुनरावृत्ति इस पीढी में नही होगी , क्योंकि बच्चे बड़ों की गलतियों से सबक ले रहे हैं। लिख कर व्यक्त किया।
भावना आपके मन की है , मगर कर्म का रेखांकन भी एक सबक बना उसका क्या?

रविवार, 21 सितंबर 2008

लार्ज हेड्रोन कोलाईडर

मशीन बंद करना पड़ी का समाचार पढा तो पता चला चुम्बक अत्यधिक गर्म हो जाने की वजह से प्रयोग को रोका गया है । फ़िर पता चला हीलियम गैस भी बड़ी मात्रा में लीक हो गई है।
प्रयोग करना थे , करने हैं , किए जाते रहेंगे ।
मानवीय आवश्यकता के आविष्कार सुखदाई जीवन के लिए हैं तो इनमे रूचि बनी रहती है ।
विश्व के कई महापुरुष ब्रह्म ज्ञान की चर्चा कर गए उसमे लोगों की रूचि नही रही क्या वैज्ञानिक जो ज्ञान प्राप्त करना चाहते हैं वो वाकई रुचिकर होंगे?
विज्ञान पराविज्ञान के अर्थों में लगा है , खोज में लगा है ।
जैन आचार्य भगवन दिगंबर मुनि श्री चन्द्रसागर जी महाराज से पूछने पर उन्होंने कहा निरर्थक प्रयास हैं , अपनी प्रतिष्ठा बनाए रखने का कर्म है . .............

शनिवार, 20 सितंबर 2008

वर्णाक्षर

कहते हैं अंग्रेजी के प्रथमाक्षर "A" में धैर्य है क्योंकि ० से लगाकर ९९९ तक की गिनती को अंग्रेजी के शब्दों में लिख दे तो यह कही नही होता और पहली बार १००० यानी " थाउसेन्ड " में पहली बार इस्तेमाल होगा ।

इसी तरह हिन्दी का प्रथम वर्णाक्षर "अ" इतना शक्तिशाली है कि किसी भी शब्द के मायने बदल कर विपरीत अर्थ देने में यह सक्षम है ।


कर देखें ..........


ठीक है न यह बात

पढ़ कर देखिये

amazing...

fi yuo cna raed tihs, yuo hvae a sgtrane mnid, too .Cna yuo raed tihs? Olny 55 plepoe tuo fo 100 anc.I cdnuolt blveiee taht I cluod aulaclty uesdnatnrd waht I was rdanieg. The phaonmneal pweor of the hmuan mnid, aoccdrnig to a rscheearch at Cmabrigde Uinervtisy, it dseno't mtaetr in waht oerdr the ltteres in a wrod are, the olny iproamtnt tihng is taht the frsit and lsat ltteer be in the rghit pclae. The rset can be a taotl mses and you can sitll raed it whotuit a pboerlm. Tihs is bcuseae the huamn mnid deos not raed ervey lteter by istlef, but the wrod as a wlohe. Azanmig huh? yaeh and I awlyas tghuhot slpeling was ipmorantt! if you can raed tihs forwrad it.

If you can read this, your brain is 50% faster

एक अध्ययन के अनुसार हमारा दिमाग पढ़ते वक्त स्पेल चेकिंग प्रायः नही करता

इसी वजह से आप यह पत्र पढ़ पा रहे हैं

गुरुवार, 18 सितंबर 2008

प्रेम और संत समागम

अचानक एक दिन रोटरी की असेम्बली से निकल कर एक सूफी धर्म गुरु के यहाँ जाने का अवसर हुआ । बिना किसी औपचारिक परिचय के भीड़ भरे वातावरण में प्रेममय सान्निद्ध्य से अभिभूत था । कव्वाली चल रही थी और हम मजा लेने लगे थे । अगले दिन किसी काम से डॉक्टर के यहाँ जाना था जो दिन में देर से होना था सो एक बार फ़िर से बाबा साहेब से मिल लिया जाने का मन बना और हम दोनों दोस्त घर पहुंचे । वहाँ भी पुरे मनोभाव से प्रेम पूरित वातावरण था ।
अचानक एक दिन सूफीसंतश्री घर को आए तो सत्कार का अवसर मिल गया । वे अजमेर ख्वाजा शरीफ जा रहे थे सो उन्हें छोड़ने रेलवे स्टेशन जाने का मन बनाया । स्टेशन पर भरी भरकम भीड़ ने उनके पहुँचते ही एक अनोखा माहौल पैदा कर दिया । मै गया तो महज उन्हें स्टेशन पर छोड़ने, लेकिन हुआ कुछ एसा की ख्वाजा की इबादत को साथ हो लिया, अजमेर से किशनगढ़ जाकर नारोली में दिगंबर जैन धर्मस्थल पर निर्मित हो रहे ऋषभदेव के भव्य स्वरुप के दर्शन का अवसर पाया। वापस अजमेर में कव्वाली का आयोजन था सो दरगाह जाना जरूरी था फ़िर बाबा साहब की इजाजत लेकर वापसी करनी थी क्योंकि क्लब का पदग्रहण समारोह था और जिन्हें अपना चार्ज देना था अशोक जी मेरे ही साथ थे । हम दोनों कव्वाली से लौटे और चित्तोड़ की बस पकड़ कर वहां से रेल यात्रा करना चाहते थे । सुबह अवसर था कि किले का भ्रमण कर लिया जाए । नहा धोकर किले के लिए टैक्सी की और पूरा किला और मन्दिर में देव दर्शन प्रारम्भ किए । अशोकजी जैन मान्यता के होने से जैन मंदिरों में दर्शन किया जाना भी साथ साथ चलता रहा ।
मीरा के मन्दिर में प्रेम का संगीत और प्रातः काल की बेला दोनों के संगम ने पुनः हृदय भर सा दिया जिस अहसास को सूफियाना तौर पर साथ ले चले थे वही अब सनातनी था ।
मीरा के मन्दिर में कृष्ण और संगीत की धुनों में तरंगित अहसास से सराबोर वातावरण में अचानक "विष का प्याला" याद आ गया । मनन करते हुए यह बात भागवत कथा के चलते ऋषिकेश से पधारे संत श्री मतंग बाबा के सम्मुख रख दी । उन्होंने गुनगुनाया पहले वही छंद जो मीरा की वाणी है " विष का प्याला राणा ने भेजा , पीवत मीरा हांसी रे " फ़िर सवाल की "हांसी रे क्यूँ ?" अचानक सवाल की उम्मीद नहीं थी पर जवाब बाबाजी से ही माँगा तो उन्होंने कहा प्रेममय मीरा अपने से पहले श्रीकृष्ण को सभी कुछ प्रदान करती थी सो सुंदर पात्र के इस विष को भी उन्होंने अपने दिव्य प्रेम को सहज ही अर्पित कर दिया था , और अपनी मति पर यह जानकर की यह तो विष है हंसना क्या सहज नहीं था ?
कैसा विलक्षण प्रेम और अनुभूति
अब बारी आपकी

धन के १५ अनर्थ

स्तेयं हिंसान्रितं दम्भः कामः क्रोधः स्मयो मदः ।
भेदो वैरमविश्वासः संस्पर्धा व्यसनानि च। ।
एते पंच्दशानर्था ह्यर्थमूला मता नृणाम ।
तस्मादनर्थमर्थाख्यं श्रेयोर्थीदूरस्त्यजेत। ।

धन के कारण होने wale 15 अनर्थ वाले १५ अनर्थ माने गए हैं : चोरी हिंसा झूठ दंभ काम क्रोध गर्व अहंकार भेदबुद्धि वैर अविश्वास स्पर्धा लम्पटता जुआ और शराब । जो व्यक्ति अपना कल्याण चाहता है, वह स्वार्थ और परमार्थ का विरोध करने वाले इस अनर्थ को जिसे अर्थ (धन)कहा है , दूर ही से त्याग दे।

मुक्ति के सन्दर्भ में वेद वाणी

पुंसो यम् संसृतेहेतुरसन्तोषोर्थकामयोः
यदृच्छयोपपन्नेन सन्तोषो मुक्तये स्मृतः ।
धन और भोगों से संतोष न होने के कारण ही आदमी को जन्म - मरण के चकार में पड़ना होता है। तदनुसार , जो मिल जाए , उसी में प्रसन्न रहने वाला मुक्ति पाता है ।

वेद वाणी

दंडन्यासः परं दानं कामत्यागस्तपः स्मृतम।
स्वाभाव विजयः शौर्यम सत्यम च सम दर्शनम्। ।

किसी को दंड न देना, सबको अभय देना दान है ।
कामनाओं को त्याग करने का नाम तप है। अपनी वासनाओं को जीतने का नाम है वीरता ।
सभी में समता भावः निहित करना सत्य है ।

नोट : ध्यान दें कि "ही " का इस्तेमाल कहीं नही है सो स्वरुप में इन्हे शामिल करें ।

बुधवार, 17 सितंबर 2008

कंजूस

कंजूस कई तरह के होते हैं
पहली श्रेणी में वे आते है जो सिर्फ़ कमाना चाहते हैं खर्चना बिल्कुल नही
दुसरे वे जो सिर्फ़ ख़ुद पर खर्चकर सकते हैं
तीसरे जो कभी कभार दूसरो पर खर्च करते हैं
चौथे वो जो खर्च करते कम हैं पर दिखावा ज्यादा करते हैं
पांचवे वो जो किसी पर खर्च कर दें तो उस पर किए खर्च की इतनी दुहाई देते हैं की सामने वाला इस स्थिति में आ जाता हैं कि भरपाई तक कर देता हैं फ़िर भी ये दुहाई देते नही थकते

आइये इनसे सीखे जीवन की कला क्योकि गुणीजनलक्ष्मी के महान पुजारी जो हैं

नायाब प्रेमियों की गत

याद आ गए

रांझा हीर

महिवाल सोनी

शीरी फरहाद

पर असर नही दिलों पर अब

भटकते हैं गलियों में वो अब रद्दी अखबारों के बहाने , बेचने चूडियाँ कंगन

न हीर है कहीं न शीरी न सोनी

रांझे बंद हैं चोरी के जुर्म में, फरहाद आतंकवाद में और महिवाल को पकडा था कल गली में सट्टा करते

अहिंसा

अहिंसा प्रतिष्ठायाम तत्सन्निधौ वैरःत्यागः ।

अहिंसा जहाँ स्थापित या प्रतिष्ठित हो जाती है वहाँ सभी प्रकार के वैर भाव समाप्त हो जाते हैं ।

कहते हैं अहिंसा जहाँ स्थापित ही जाती है वहाँ शेर और गाय एक घाट पर पानी पीते हैं ।
हमारा दुर्भाग्य की अहिंसा के देश में आतंकवादी अपना वैर भाव त्याग नही सके हैं , जरूरी है की आत्म मंथन करे ।


एक गीत इसी परिपेक्ष्य में

हम को मन की शक्ति देना ,
मन विजय करें,
दूसरों की जय से पहले
ख़ुद की जय करें


बाकी पंक्तिया आप याद करे और पोस्ट पर लगा दे ।

सोमवार, 15 सितंबर 2008

वेद : दान कि प्रेरणा दो

अदित्सन्तं चिदाघ्रुणे पूषन दानाय चोदय ।
पणेश्चिद वि म्रदा मनः ।
हे तपा तपा कर शुद्ध करने वाले देव , आज जो दान नहीं देना चाहता , उसका मन भी देने कि और प्रेरित करो । जो कंजूस हैं , उसका मन भी मुलायम बनाओ । उसे दान कि प्रेरणा दो ।

शिक्षा से स्वीकारोक्ति

प्रजापिता ब्रह्मासे शिक्षा प्राप्त करने के बाद गुरु दक्षिणा के रूप में उनके पास मौजूद गुण में से एक स्वीकारने को कहा गया

एक ने इन्द्रिय दमन

दुसरे ने दान

तीसरे ने दया

स्वीकार की।

स्वीकार करने वालों में पहला देव दूसरा मानव और तीसरा दानव था ।

वेद में मनोकामनाएं

मनसः काममाकातीं वाचः सत्यमशीय ।

पशूनाम् रूपमन्नस्य रसो यशः श्रीः श्रयतांमयी स्वाहा । ।

मेरे मन की इच्छा पूर्ण हो । वाणी के सत्य व्यवहार की क्षमता मुझे प्राप्त हो । पशुओं से रूप से मेरे घर की शोभा बढे , अन्न से श्रेष्ठ स्वाद मिले । लक्ष्मी और सुयश सब मेरे अधीन हों।

ग्रीश्मस्ते भूमे वर्षाणि शर्द्धेमन्तः शिशिरो वसन्तः ।


ऋतवस्ते विहिता हायनीरहोरात्रे पृथिविनो दुह्ताम । ।


हे पृथिवि ग्रीष्म, वर्षा, शरद् , हेमन्त , शिशिर और बसंत ये छहों ऋतुएँ , दिन-रात और वर्ष सब हमें फ़ल देने वाले हों ।

रविवार, 14 सितंबर 2008

विचार

Strong and bitter words indicate a weak cause

सार्थक दान गरीब की झोली से

कारगिल युद्ध के बाद देश में सैनिकों के उत्साह वर्धन के लिए सहायता राशी जुटाई जा रही थी।

महाराष्ट्र समाज के तत्वावधान में इस राशी के एकत्रीकरण के लिए हम सब एकत्रित हुए थे। हर गुजर कर आने जाने वाले व्यक्ति को रोक कर हम उससे यह राशि प्राप्त कर रहे थे की एक भिखारी सामने आकर खडा हो गया और याचना करने लगा की उसे भीख दी जाए। मैंने उसे देश की सेवा में दान इकट्ठा किए जाने की बात बताकर कहा कि उसके जीवन में ये क्षण बिरले आए है जबकि वह दान कर देश के उस कर्ज को कम कर पायेगा जो देश के प्रति उसे करने हैं। वो रोने लगा और अपनी पोटली खोलकर जमा की गयी पूँजी में से जो कुछ उससे बन पडा दान पेटी में डाल गया ।

मेरे साथियों ने उसे दान करते और रोते देख कर मुझसे पूछा तो उसने सुबकते हुए जवाब दिया "भैया ने मुझे जीवन में दान देने का ऐसा अवसर समझाया है कि कृतज्ञता का अर्पण कर रहा हूँ देश के प्रति इस दान से ......... ,

ये तो भैया ही पता नही कौन है.....

जो मुझ जैसे भिखारी को भी दान को प्रेरित कर गए ............ ,

वरना मैं तो जैसा हूँ वैसा ही मर भी जाता ......... ,

मेरा इह लोक तर गया ये दान देकर............

और वो रोते रोते चला गया था।

शनिवार, 13 सितंबर 2008

अटेंशन

वाह जी आप भी न
दिन भर कमाते रहते हैं
हमारी तरह

कमेन्ट/स्लोगन ऑन अबोर्शन

उन्होंने ईश्वर से डरना छोड़ दिया है , जो भ्रूण हत्या के दोषी हैं। जिन्हें कन्या नहीं चाहिए उन्हें बहू भी मत दीजिये।

गुरुवार, 11 सितंबर 2008

फ़िर मिलेंगे.........

प्रेमी युगल समन्दर के किनारे बैठा था

प्रेमिका ने कहा : लार्ज हेड्रोन कोलाईडर के बारे में पढा ? दुनिया संकट में है....... पता भी है तुम्हे ?
प्रेमी बोला : प्रेम का कुछ नही बिगड़ता चलो इतिहास रचें .......
प्रेमिका : वो कैसे ?
प्रेमी : दरिया में आज ही डूब लेते है। कल के अखबार में हमारी ख़बर तो होगी कि प्रेम से भरे युगल ने प्रलय के पहले ही आत्म समर्पण कर दिया ..........

प्रलय का डर




एल एच सी का भयावह रूप सभी का आकर्षित कर रहा है । हम मजबूर हैं की चर्चा करें। अनपढ़ और नासमझ लोगों की भ्रांतियां दूर करें या विपक्ष रखें ।
पर विज्ञानं है तो कमाल का , एक्स-रे कि खोज के बाद अल्फा , बीटा , गामा रे से हम अपरिचित नही है , न्यूट्रान, प्रोटोन से भी परिचित है।
असावधानी का संकट हमेशा से रहा है , आशंका जाहिर करना भी आवश्यक है किंतु प्रस्तुति भय युक्त कर वैज्ञानिको का काम ग़लत बताना कितना उचित है समय बताएगा ।
प्रलय कि आशंकाए सच होंगी या ब्रम्हांड कि खोज का नया सूत्र हाथ लगेगा लेकिन एक बात तो सच है कि जिस डाली पर बैठो उसे ही काट दो का कालिदासी सच तो जीवित ही है , इन वैज्ञानिको को प्रयोग करने को धरती ही क्यों मिली, अन्य गृह क्यों नही मिला था जहाँ यह प्रयोग किया जा सकता था ?

मंगलवार, 9 सितंबर 2008

चर्च जलाने की घटना पर

विगत दिनों नगर के एक चर्च को जला दिए जाने की घटना हुई। आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है। एक और चर्च हिंदूवादी संगठनों पर आक्षेप लगा रहा है तो हिंदू संगठन मिशनरी पर धर्म परिवर्तन के आरोप जड़ने में संलग्न है। पुलिस प्रशासन द्वारा चर्च के चौकीदार को आग लगाने का दोषी बताया गया है तो चर्च पिछली घटनाओं में संलग्न व्यक्तियों की गिरफ्तारी की मांग पर अड़ा है ।
इस सब में ईसाई समुदाय प्रेम के संवाद से की ईश्वर सद्बुद्धि प्रदान करे उन लोगों को जिस किसी ने कुकृत्य किया सुनकर भला लगा।
राजनैतिक दल जिस समय अपनी रोटियां सेंकने को तलबगार है , प्रेम धुन असमंजस खडा किए दे रही है ।

कम होती कन्यायें

भारत में महिला शक्ति का स्थान श्रेष्ठ रहा है। देवी स्वरुप में पूजनीय रही हैं वे। रावण की पत्नी मंदोदरी को कभी राक्षसी वृत्ति का नहीं कहा गया। वे जो अमानुषिक कृत्यों की सहभागी रही मसलन पूतना या शूर्पणखा उन्हें ही राक्षसी कहा गया।
परन्तु आज महिलाओं का एक बड़ा तबका भ्रूण ह्त्या में शामिल है जिनमे महिला चिकित्सक भी परे नहीं होती।
कल आंकडे प्रस्तुत किये जा रहे थे टेलीविजन पर और पुरुषों की तुलना में कम पड़ती जा रही महिला आबादी के मायने समझाए जा रहे थे। भौतिकतावादी दौड़ में पड़ा इंसान छोटे परिवार के लिए बाध्य है तब पुत्र चाहत में भ्रूण हत्या होना कोई अनोखी बात नहीं। हम चाहे जो अनुमान धर लें जब तलक संतोषपूर्ण जीवन शैली विकसित नहीं होती कानून की अनदेखी और कन्या भ्रूण हत्याएं होती रहेंगी। पाश्चात्य जीवन शैली और हमारी संस्कृति के दोष ढूँढने की लडाई में आक्रमण कमजोर पर ही तो होगा न।
पुरुषों के जरिये सुरक्षा की आस ने पुरुष जीवन को विसंगति में डाल दिया , जबकि लक्ष्मीबाई, चेन्नम्मा , नूरजहाँ के बाद अब नई पीढी में बेनजीर, इंदिरा, सोनिया, प्रियंका जैसी महिलायें सबल पक्ष जतलाने के लिए कम नहीं है.............
भ्रूण ह्त्या पारिवारिक कमजोरी को अधिक प्रदर्शित करती है बजाय सामाजिक विकृति के ...........

सोमवार, 8 सितंबर 2008

शिक्षक दिवस

कल नगर को साहित्य के क्षेत्र में समृद्धि दिलाने के प्रतिक माने जाने वाले गुरुदेव श्रद्धेय श्री जयकुमार जी जलज साहब से मिले उन्हें शिक्षक दिवस पर लाइफ टाइम अचीवमेंट का सम्मान शिक्षक सांस्कृतिक मंच द्वारा प्रदान किया गया है तो उन्हें बधाई प्रेषित की । काली टोपी और हाथ में छड़ी लिए शिक्षक के हाई मोरल पर भी चर्चा हुई जो कभी समाज का विभिन्न अंग हुआ करती थी। आज की फैशन परस्त शिक्षा, जिसमे शिक्षा कम और पैसे का महत्त्व अधिक है , शिक्षक के चारित्रिक पतन को भी इंगित करती है । शिक्षक दिवस के अवसर पर उच्च आयाम स्थापित करने वाले शिक्षक जिन्हें पाने के पूर्ण हकदार हैं क्या प्रासंगिक नही की समाज उन्हें सम्मानित करे। शिक्षकों द्वारा शिक्षकों का सम्मान किया जाना प्रेरणास्पद है मगर छात्रों द्वारा या समाज द्वारा सम्मान नही सुना जा रहा। हाँ शासन की मंशा जरूर रहती है दिवस मना कर सम्मान करने की जिसमे शहर का जुडाव सुनिश्चित नही किया जाता ।

रविवार, 7 सितंबर 2008

चुटकी

प्रेमी ने प्रेमिका से कहा : मुझे ऐसी बीवी चाहिए जो आज्ञाकारी हो, अच्छा खाना पकाए, मेरे कपडे धोए, जबान न चलाए.......
प्रेमिका बीच में बोल पड़ी : कल मेरे घर आ जाना ये सारे गुण मेरी नौकरानी में है ।

शनिवार, 6 सितंबर 2008

आओ हंस लें

शराब के नशे में आगे जा रही गाडी का पीछा करते हुए घर कि तलाश में गाड़ी आगे बढ़ाई। अचानक वो गाड़ी रुकी तो उससे टक्कर हो गयी।

उसने कहा : भाई गाड़ी रोकने के पहले इंडिकेटर तो दिया होता.........

"भाई वाह, बड़ी अजीब कही आपने, अब अपने गराज में गाडी खड़ी कर देने पर भी इंडिकेटर देना पड़ेगा क्या?

धर्म : लिस्ट

वैदिक
२ ईसाई
बौद्ध

इस्लाम
जैन

यहूदी
कंफ्युशस
ताओ : जापान में शिन - ताओ
१० सिख

११ पारसी

आप के पास चिन्ह हो तो पोस्ट करें

बुधवार, 3 सितंबर 2008

व्रत

एक अनेकार्थी शब्द से वाकिफ कराने का मेरा प्रयास है यह।
प्रतिज्ञा , साधना , कर्म , आचरण, संकल्प , मर्यादा , धारणा, संस्कृति आदि कुछ विषयों को छूने का उत्सव रुपी धर्म स्वरुप इस नाम के जरिये जाना जाता है।
ईश्वरीय कथानकों के मध्यम से व्रत किए जानेको कहा है।
सोचें मैनेजमेंट की थ्योरी से, क्या व्रत हमें प्लानिंग से लगाकर प्रोफिट तक के समस्त पक्षों को रूबरू नही कराते हैं?
जीवन के विभिन्न बिन्दुओं का समाधान नही करते?
बदले अपनी मानसिकता, आप भारतीय समृद्धि को पाने में व्याकुल हो जायेंगे .........
बजाय विदेशी अनुराग के

अप्-संस्कृति


सारे देश में गणेशोत्सव की धूम है। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक का स्वतन्त्रता संग्राम का यह तरीका हम सभी जानते हैं। सामाजिक सांस्कृतिक आयोजनों के जरिये जो संदेश इस उत्सव के माध्यम से दिए जा सकते थे उनका हश्र क्या हुआ है यह भी हमें पता ही है। जन जाग्रति के परिणामों में यह उत्सव तब्दील होकर कहीं समस्या खड़ी न कर दे इस लिए इसे मनाने के गंभीर तरीके की बजाय तम्बोला खेलकर फूहड़ ढंग से प्रस्तुति दी जाती है जिसे बदले जाने की आवश्यकता है।
बिहार के बाढ़ पीडितो को मदद का आव्हान इन कार्यक्रमों के मध्यम से हो सकता है मगर सोच का अभाव अप्-संस्कृति की भेंट चढ़ा हुआ है ।
सार्वजनिक गणेशोत्सव की अप्-संस्कृति मिटाकर वन्दना का आव्हान हमेशा की तरह एक बार फ़िर ...........
मेरे अपने प्रयत्न निरंतर हैं .......
शामिल होने का सभी से आव्हान है ...........

सोमवार, 1 सितंबर 2008

भ्रूण-हत्या, सेरोगेट-मदर, कानून और राष्ट्र

विज्ञान की महारत का परिणाम रहा की शरीर के भीतर देख पाने का यंत्र बना।
जिस नोबल सोश्यल कॉज को लेकर यंत्र बना उसी का दुरुपयोग स्वार्थ और धन कमाने की आड़ बना।
सेरोगेट का सिस्टम आगे जाकर किस और रूख करेगा यह चिंता का विषय है। यदि अनुबंध के मुताबिक किसी का भ्रूण धारण कर नोबल सोश्यल कॉज के तहत पैदा हुआ बच्चा विकलांग हुआ और वे माँ पिता जिनसे अनुबंध हुआ है इसे स्वीकार न करे तब?
ग्लोबलाईजेशन के कानूनों में दो विभिन्न देशों की भूमिका किस प्रकार सम्बद्ध की जायेगी एसे में जबकि परोपकारी माँ का पैसे की खातिर बिकी होना दृष्टिगोचर हो रहा हो, गरीबी को न्याय मूल रूप से दिलाये जाने में राष्ट्र क्योकर समय देंगे? क्या निहायत व्यक्तिगत मामला जताकर इससे मुह नही मोडा जाएगा?
भ्रूण हत्या का रूप भी विकलांगता की आड़ लेकर नोबल कॉज होने की दरकार में है।
सांप निकल जाने पर लाठी ना मारें, समय रहते सजग विचार हो।
आधुनिकता के जामे में कल के माँ बाप बच्चे पैदा कराने के नए बहाने और खुद के पास समय न होने को चिकत्सा विज्ञान की हवस न बना दे..............

सीख

एक कथा जिसे व्यवसाय के प्रारंभिक दौर में सुना था ।
प्रासंगिक है लिखना भी
वडोदरा में पाणीगेट के आस पास लोहे के व्यापारियों की दुकाने हैं।
एक रोज़ इन दुकानों के आस पास एक फटेहाल व्यक्ति को घूम घूम कर इनके भीतर देख रहा जानकर एक व्यापारी ने दुत्कार दिया।
एक सा व्यापार करने वाले पड़ोसी दूकानदार ने प्रेमपूर्वक बुलाकर उससे पूछा : क्या चाहिए तुम्हे?
उस फटेहाल भिखारी से लगने वाले व्यक्ति ने चार ट्रक माल की खरीदी कर डाली।
किसी को छोटा समझने की भूल न करने की हिदायत हमने पाई, आप भी पायें भाई।
सत्यनारायण देव की जय