मंगलवार, 28 अक्तूबर 2008

दीप प्रार्थना

शुभम् करोति कल्याणं,
आरोग्यम धन सम्पदा,
शत्रु बुद्धि विनाशाय,
दीप ज्योति नमोस्तुते
,

रविवार, 26 अक्तूबर 2008

दीप पर्व की हार्दिक शुभकामनाये


रक्ताल्प बच्चों के लिए

अब एक शिविर जिसमे बच्चों का हिमोग्लोबिन और आर एच फेक्टर काउंट किया जाकर तथ्य की पुष्टि फ़िर उनको आयरन की टेबलेट की खुराक खिलाने की नियमित व्यवस्था पर चर्चा का दौर प्रारम्भ कर दिया गया है ।


आप आपके सुझाव दे ताकि व्यवस्था जमाने का कोई सुलभ मार्ग मिल सके ।

फिलवक्त नगर के सभी सामाजिक संगठनो की बैठक जिला प्रशासन के साथ मिलकर आयोजित करने की रूप रेखा बना चुका हूँ जो दिवाली के बाद करवाना है ।

सभी को दीपावली के अवसर पर हार्दिक अभिनन्दन


आज का ख़ास दिन अमृत मंथन के दौरान निकले देव धन्वन्तरी; जिन्हें हम सब आयुर्वेद को जानने वाले चिकित्सा शास्त्र केजनक के रूप में जानते आए है को समर्पित है ।


बच्चों का स्वास्थ्य शीघ्र सुधरे इस हेतु भगवन धन्वन्तरी आशीर्वाद दे .........

शुक्रवार, 24 अक्तूबर 2008

रक्ताल्प बच्चे

कल डॉक्टर लीला जोशी साहिबा से चर्चा हुई । वे रतलाम जिले में कई विभिन्न संस्थाओं से जुड़ कर अपनी गतिविधियाँ संचालित करती हैं । रोटरी, लायंस, रतलाम ओब्स्त्रेटिक्स एंड गाय्नेकोलोजिकल सोसायटी आदि कई संस्थाओं की वे सक्रीय सदस्या हैं ।


श्री सेवा संस्थान के मध्यम से सेवा करते हुए उन्होंने चोकाने वाली जानकारी दी और साथ ही मुझसे एक इवेंट मेनेजर की तरह सहयोग चाहा। सामाजिक क्षेत्र में मेरा यह रूप मुझे नया सा लगा लेकिन मेरी गतिविधियों से जुड़ी सहोगात्मक अवधारणा मुझे सहयोगी के रूप में काम करने को प्रेरित कर गयी ।


उन्होंने जो मुझे बताया उसके अनुसार "जिले के आदिवासी अंचल में शिविर के जरिये उन्हें पता चला की स्कूली छात्रों का एक बड़ा समूह रक्ताल्पता का शिकार है, वे इस बारे में जागरूकता के साथ हिमोग्लोबिन और लाल रक्त कणों की कमी को घटाने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता महसूस कर रही है। और राजेश तुमसे उम्मीद है की तुम एक शिविर आयोजन करवाने में मदद करो ताकि एक कम उम्र वाला वर्ग जो बहुतायत में जिले में बसर कर रहा है को स्वास्थ्य लाभ मिल सके ।


मैं जानकारी पाकर चोंका क्योंकि मुझे जहाँ तक पता है प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों के माध्यम से शासन दवाईयां पहुंचाता रहा है । फ़िर न्यून रक्त वाले लोगों का इतने बड़ी संख्या में होना चोकाने वाली बात ही तो हुई ना। लेकन एक नोबल कॉज लक्षित हुआ है तो आने वाले बाल दिवस पर
एक सम्पूर्ण कार्य योजना के जरिये कुछ हो जाना चाहिए खास तौर पर बच्चों के स्वास्थ्य के बारे में ..........


मैं क्या क्या कर सकता हूँ इस आयोजन में कृपया आपके सुझाव बताये ...........

मंगलवार, 21 अक्तूबर 2008

बुध पुष्य से दीपावली तक की बधाईयाँ

दीपावली का त्यौहार नजदीक है ।
व्यापारिक बही चोपडे खरीदने का दिन पुष्यनक्षत्र के समय श्रेष्ठ कहा जाता है ।
इस बार यह बुधवार को आया है सो व्यापारिक हित में शुरुआत गिनी जाएगी ।
आप सभी पर्व की शुरुआत करें ।
सभी को त्योहारों की बधाईयाँ ।
खास तौर पर महालक्ष्मी पूजन के दिन की यानी दीपावली की ।

शनिवार, 18 अक्तूबर 2008

प्रतिभावान छात्र सम्मान समारोह

कल स्कुल ऑफ़ एक्सीलेंस में प्रतिभावान छात्रों का सम्मान किया गया। स्टेट में ६ ठी, ९ वी और दसवी रेंक इस स्कुल के विद्यार्थियों ने हासिल किए । ८५ % छात्र प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए । राज्य में उच्चतम अंकों से मेरिट में स्थान पाए छात्र छात्राओं का सम्मान पूर्व में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह जी के हाथो हो चुका है परन्तु शाला की उपलब्धियां शहर में ही ज्ञात नही थी। प्राचार्य के .पी. शर्मा के समय पर शाला को मिली उपलब्धियां तारीफ़ के काबिल हैं । शाला का पूरा स्टाफ शत प्रतिशत प्रथम श्रेणी में छात्रों के भविष्य के प्रति संकल्पित दिखा जो अपने आप में विशिष्टता है । स्कुल ऑफ़ एक्सीलेंस शासकीय होने के बाद भी उच्चतम शिक्षण के प्रति प्रतिबद्धता प्रदर्शित कर रहा है जो निश्चित ही सराहनीय कदम है । मेरा सौभाग्य रहा इस कार्यक्रम में अतिथि के रूप में जाने का जहाँ प्रो. अजहर हाशमी साहेब मुख्य अतिथि और अशोकजी तांतेड अध्यक्षता कर रहे थे ।

ऐसे में जबकि शिक्षा व्यावसायिकता की और जा चुकी है और शिक्षा से अधिक सुविधाओं के लिए पालक भुगतान कर रहे हैं शासकीय स्कुल के छात्रों की प्रतिभा ने ऐलान किया है की प्रतिभाएं सुविधाओं की मोहताज नही होती ।

स्कुल की प्राचार्या अनिला कँवर ने अभी अभी पदसंभाला है और विरासत में श्रेष्टता उन्हें हासिल है और उत्तरोत्तर प्रगति की पोजिटिव मानसिकता भी, उन्हें बधाई अच्छे स्टाफ और श्रेष्ठ विद्यार्थियों की ।

गुरुवार, 16 अक्तूबर 2008

त्योहारी समय में बाजार की गतिविधियाँ

सारा जगत महामंदी की चपेट में है। भारतीय त्यौहार के साथ अबकी बार पाँच राज्यों के चुनाव और लगनसरा का बाजार सजने लगा है । जहाँ में रहता हूँ , यह शहर रतलाम : सोना , सेव और साडियों के लिए अपना परिचय अन्तर राष्ट्रिय ख्याति के रूप में रखता है। बाजार ने शेयर, स्टॉक की गतिविधि से सोने की और रूख किया है । भारतीय त्यौहार हमेशा से कृषक प्रधान समाज की धरोहर रहे हैं । खेती की कमाई , मानसिकता और लगनसरा के दौर में स्वर्ण मूल्य हमेशा से ही तेजी के रहते आए और अब विश्व महामंदी से प्रेरित बाजार का रूख हमारे स्वर्ण के लोकल मार्केट पर जो प्रभाव दिखा रहा है वह एक नए मोड़ पर है । स्वर्णाभूषण के व्यवसायी इस बार बेहतर कमाई की उम्मीद से लबरेज हैं , इसका भरपूर फायदा उठाने की कोशिशें चुनावी दौर में किए जाने की रणनिति तैयार की जा रही है । मजा तो यह है कि कोई नया प्रकल्प हमारे नगर की गतिविधि में शरीक नही हुआ है फ़िर भी परम्पराओं को भुनाने की राजनीति का चुपके चुपके लाभ लिए जाने कि मानसिकता बनने लगी है।

भूमंडलीकरण की नई व्याख्या

इंग्लेंड की प्रिंसेस डायना अपने इजिप्शियन मित्र के साथ फ्रेंच टनल में दुर्घटना ग्रस्त हुई। वो एक डच ड्राईवर द्वारा चलाई जा रही जर्मन कार में बैठी थी जिसका पीछा इटालियन प्रेस फोटोग्राफर द्वारा जापानी बाइक से किया जा रहा था। पुर्तगाली डोक्टर ने उसका इलाज ब्राजीलियन दवा से किया था। यह संदेश जो आप पढ़ रहे है मुझे एक मित्र ने अपने चाइनीज मोबाइल से भेजा है। उसका मोबाइल एक पाकिस्तानी तस्कर के जरिये नेपाल की सीमा से होकर भारतीय हाथ में पहुंचा है एसा वह बताता आया है ।
उक्त संदेश आपको कई देशों के आयातित पुर्जों से बने कंप्यूटर के जरिये जिस पर अमेरिकी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट द्बारा हिन्दी सोफ्टवेयर की सुविधा मिली है द्वारा एक मराठी मात्रुभाषी ने नेट पर उन सभी हिंदीभाषियों के लिए लिखा है जो धरती के विभिन्न कोनो में गुजर बसर करते हैं।
भूमंडलीकरण की व्याखा करते हुए मुझे जो टिप्पणिया मिलेगी वो कई भाषाई प्रान्तों एवं सरहदों के पार तक से होगी यह मैं जानता हूँ।

बुधवार, 15 अक्तूबर 2008

मंगलवार, 14 अक्तूबर 2008

मेरा काम नही

विद्युत् मंडल द्वारा दीपावली के पहले मेंटेनेंस के नाम पर शाख कटाई की जा रही है । आज सुबह कुछ कर्मचारी आए और पेड़ की शाखाओं को लंबे बांस के जरिये काटा गया । काटने के बाद पेड़ की डालिया सड़क पर ही पटक दी गई उसे रस्ते से हटाना उनका काम नही, यह काम नगर निगम के सफाईकर्मी , मुहल्ले के रहवासियों का ही है उनकी निगाह में । अब हद तो इस बात की है जी की उन्होंने कुछ डालियाँ तोड़ तो दी हैं मगर वे पेडो पर टंगी पड़ी हैं । अब हवा चले तो कभी भी किसी के ऊपर गिर पड़े रस्ते चलते , एक्सीडेंट हो जाय उनकी बला से , मगर यह काम हमारा नही की सोच हावी है । फ़िर अखबार में खबरे छपनी भी तो चाहिए ....... वरना इनका सामाजिक महत्त्व कम नही हो जायेगा क्या ?
अब मैंने भी मेरा काम कर दिया।

आपको सूचित जो किया की वे कैसे करते हैं अपने काम ।
और नही तो क्या, वे जो डालियाँ तोडे उनके पीछे जाकर उठाता फिरूं क्या?
हम सभी तो अपने काम से काम रखते हैं फ़िर उन्होंने रखा तो क्या?
राजेश रोशन जी आपके लिए एक फोटो भी जोड़ दी है , मजाक समझ कर माफ़ करें
अपने घर के सामने के पेड़ पर तो मैं ध्यान रख सका हूँ मगर आपके घर और मुहल्ले का ध्यान आप रखना

प्रदर्शन पर मार-पिटाई ?

मंत्रीजी के घर प्रदर्शन के लिए गए लोगों की जमकर धुनाई कर दी गई । ख़बर अखबारों में पढ़ी । मंत्रीजी भी कभी प्रदर्शन किया करते थे । प्रदर्शन को अपने अधिकारों से जोड़ते रहे हैं।
भाई वाह, खूब की आपके समर्थकों ने भी , अब हर कोई ऊँगली उठाएगा नही, और उठाई तो उठाने से पहले दस बार सोचेगा। जय हो सत्ता की, समर्थकों की ।
और महाशय आप न .......... गए भी तो मंत्रीजी के घर को.......... ,
क्या जिलाधीश कार्यालय पर अपना प्रदर्शन नही कर सकते थे ?
किसी के घर पर प्रदर्शन क्यों?
अब पिट गए तो बवाल क्यो?
चलिए जो भी हुआ । अब अखबार देखें । इन्हे राजनीती के लिए नए शगूफे मिल गए और जनहित की बातें भूल मार पिट को तवज्जो दे रहे हैं। क्या आपको नही लगता की हमारे नेता की छबी ठीक रहे?

सोमवार, 13 अक्तूबर 2008

चुटकी

एक विदेशी किसी शहर में आया । लोगों ने बड़ी सह्रदयता से उसका स्वागत किया ।
एक घर में मेहमान नवाजी के दौरान उसने सवाल किया : क्या कोई "बड़ा आदमी" कभी यहाँ पैदा हुआ?
एक बच्चे ने जवाब दिया : अब तक तो बच्चे ही पैदा हुए हैं..........

शनिवार, 11 अक्तूबर 2008

आर्थिक महा संकट के दौर में

आज वित्त मंत्री ने कहा की विश्व व्यापी मंदी के दौर में पूरक प्रश्न संसद में रखने जा रहे हैं । अगले १० दिनों में हम प्रयास करेंगे तरलता बनाए रखने में । इधर रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने पर्याप्त पूँजी की बात कह धीरज बंधाया है।
रातों रात अमीर से सड़क पर आ गए लोग जो कुल आबादी का मात्र २ प्रतिशत होने चाहिए क्या उनके लिए ये सकून की बात है?
अगले दिनों में क्या क्या होगा?
संसद में क्या हो सकता है?
विचार करने योग्य है।
लाजमी भी है क्योंकि हमारे अर्थशास्त्री मंत्री इसे राजनीति के हवाले जो करने जा रहे है।

फिजिक्स एंड ल्युमेन पावर

सारा देश विद्युत संकट से त्रस्त है । वैकल्पिक विद्युत शक्ति का विचार लगातार होते हुए अब हमने जमीं पर हो रहे ल्युमेन लोस को घटाने के लिए टॉवर खड़े करना शुरू कर दिए है। मगर पुराने जमाने में महलों में फानूस के जरिये लो ल्युमेन को हाई ल्युमेन में बदलने वाली पद्धति को अनदेखा कर रखा है । आज जबकि ऑप्टिक फाईबर एवं क्रिस्टल टॉवर के जरिये से कम ल्युमेन पावर में अधिकतम रौशनी को पा सकते है जिससे रात्रिकालीन जगमगाहट की पर्याप्त मात्रा के बावजूद विद्युत व्यय को घटाया जा सकता है ।
भौतिक शास्त्र के वैज्ञानिक इस विचार पर कुछ कर गुजरेंगे ऐसी आशा है ।

शुक्रवार, 10 अक्तूबर 2008

आर्थिक महामंदी और भारतीय मुद्रा

आज बैठक है विश्व व्यापी आर्थिक मंदी के सम्बन्ध में । हम चिंतित हैं भारतीय मुद्रा मूल्य के गिरने से ।
कारणों की तह में तरल पूँजी की अधिकता हमारी पूँजी को मौद्रिक मूल्य की दशा में गिरने को मजबूर कर रही है । विकासशील देशों की गिनती में आज जब लखपति होना कोई बड़ी बात नही रही , ऐसे में जबकि हमारे वित्त मंत्री लगातार लिक्विडिटी के राज मार्ग पर बढ़ते हुए सम्मानित हो रहे थे अब चुनौती है अन्तर-राष्ट्रिय देखते है किस तरह मुद्रा मूल्यों को वे किस प्रकार संभालेंगे?

गुरुवार, 9 अक्तूबर 2008

प्रेम पाने के लिए ये भी एक तरीका तो है....

हा हा हा


हा हा हा

definately

सोमवार, 6 अक्तूबर 2008

नैनो

मारुती के बाद नैनो के जरिये रतन टाटा आम भारतीय को कार में देखने का सपना संजो बैठे।
देश के हालात बदलने चाहिए ऐसी सोच रखने का दु:साहस भी उन्होंने किया ।
कोई कृषक , तो कोई मजदूर , कोई कृषि भूमि बनाम औधोगिक भूमि , तो कोई निति पर अपना नजरिया दिखाने को आमादा हो गए ।
साम्यवाद , पूंजीवाद , कम्युनिस्म की चर्चाये नैनो की आड़ लेकर होने लगी ।
गुजरात के मोदी, मध्यप्रदेश के शिवराज नैनो के लिए सब कुछ लुटाने को तत्पर दिखे ।
भाई चाहे जो हो, नैनो बाजार में आए , चाहे न आए, एक बात तो तय है ।
एक उद्योगपति ने राजनितिक दलों के चरित्र का मंथन तो करा ही दिया ।

जय माता दी

गणेशोत्सव कि धूम के बाद गरबे का फैशन बूम पर है । आज समाचार छापा कि माताजी को हाथी पर बैठ दिया जाने के बदले कोर्ट में मामला दाखिल कराया गया है।
हमारा गणपति जब स्कूटर, एयर-प्लेन, बाज, मोर, या मोबाइल लिए दिखाया जा सकता है , गणपति बैठा कर तम्बोला खेला जा सकता है। तो माताजी का हाथी पर जा बैठना कानून कि परिधि में ले जाने लायक क्यों ?
अब माताजी भी रेलगाडी, कार,और भी कई साधनों से कही आ जा सकती है कोई जरूरी है शेर लिए घूमें ,जब बैठाया गया या वापस ले जाया जाएगा तब ट्रक आदि साधन का इस्तेमाल भी तो हुआ होगा। हकीकत में शेर पर बैठा कर स्थापित नहीं किया था ।
हाथी पर बैठा देने से मामला इतना संजीदा बना इसके पीछे माताजी पर हो रही राजनीती दिखने तभी तो दकियानूस लोग माताजी को आज के युग में भी शेर ही पर देखना चाहते है।

रविवार, 5 अक्तूबर 2008

quotes

The great pleasure in life is doing what people say you cannot do

इंटर नॅशनल नॉन वायोलेंस डे

महात्मा गाँधी का जन्म दिन २ अक्टूबर अब से अन्तरराष्ट्रिय नॉन वायोलेंस डे के रूप में महात्मा गांधीजी के सम्मान में मनाया जायेगा । सभी को बधाई ।

शनिवार, 4 अक्तूबर 2008

Quote

In God we trust;

all others must pay cash

गुरुवार, 2 अक्तूबर 2008

मेरे मित्र नीरज शुक्ला कि कविता

जिनका हौसला बुलंद, काम चाक चौबंद
और कद हिमालय से ऊंचा होता है,
हर शब्द में अर्थ बात में तथ्य
और खुदी में सामर्थ्य होता है
लेखनी में दम, आवाज में वजन
और नहीं माथे पर शिकन होता है।।
जिन्हें खुद के नहीं
बाकी दुनिया के परिवार और दुख-दर्द से मतलब होता है,
जिनके पास हर वक्त, वक्त कम रहता है
और काम का जुनूं हमेशा सिर पर रहता है,
जिन्हें जगह, समय और डर नहीं सताता है
कैसी भी हो स्थिति कर्त्तव्य निभाना आता है।।
हर रोज निभाते अपने वादे
खुद जागकर दुनिया को हैं सुलाते,
खतरों से हैं खेलते, नहीं कभी कतराते
जिनके मजबूत हौसले हैं, न कभी डगमगाते,
जो लिखते हैं सच, और सच हैं दिखाते
सच लिखने से नहीं है कभी घबराते।।
वो जो नहीं हैं कुछ खास, कलम के सिवा नहीं है कुछ पास
लेखनी है जिनकी साज, खामोशी को दें आवाज
नित करें नई सुबह का आगाज
ऐसा जुदा उनका अंदाज।।
हमेशा ही रहता जिनका दिन न होती कभी शाम
किसी भी कीमत पर नहीं डिगता इमान
नानक ईसा रहीम या राम
इनके लिए सभी एक समान
केवल इंसानियत जिनका मजबह नहीं किसी धर्म की पहचान।।
बुराईंयां जिन्हें नहीं हैं डरा पातीं
सफलता के और करीब हैं पहुंचातीं
स्वभाव में सरलताअभिव्यक्ति में स्पष्टता
और सच बोलना जिसकी निशानी है
सबकी मदद, तथ्य की सनद और काले अक्षर जिसकी कहानी है।।
जिनकों हर पल की रहती खबर, रहने न देते आपको बेखबर
जिनका न कोई सोम या रविवार
जिन पर हर बच्चे-बड़े-बूढे़ को है ऐतबार
एक ऐसी ही शख्सियत का जिससे सरोकार
हाँ मैं हूँ एक पत्रकार
नीरज शुक्ला

लोकगीत बनाम फिल्मी गीत

लोक परम्पराए बरसों से विभिन्न स्वरूपों में विद्यमान हैं । परम्परा जीवीत रहे इसके लिए तीज त्यौहार मनाते हुए कई बातें लगातार सीख के रूप में अगली पीढी तक पहुचाने की कवायदें की जाती हैं । फ़िल्म का रूपहला परदा इस कदर हावी हुआ की जहाँ हर गांव में किशोर वय युवा किसी फ़िल्म एक्टर की नक़ल करते दीखते हैं हमारी और हमारी पिछली पीढी में भी इसका आकर्षण रहा और अब नौबत ये है की सुदूर ग्रामीण अंचलों में लोकगीत भी अब फिल्मी होने लगे है।
भजन हो या कोई अन्य संगीत किसी फिल्मी धुन की मौजूदगी बरबस ध्यान खींच लेती है लेकिन बालिका वधु सीरियल में ढेढ़ राजस्थानी संगीत की महक की कर्ण प्रिय ध्वनि सुनकर लगा की फिल्मी गीत बनाम लोकगीत के बारे में कुछ अभिव्यक्त किया जाना चाहिए था .........
आपकी बारी .......

चित्रकला प्रतियोगिता

आज विश्व वन्य-जीव सप्ताह के अंतर्गत ईद , गाँधी जयंती, शास्त्री जयंती, को मनाते हुए चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। पहली से आठवीं को जूनियर ग्रुप तथा नवीं से कोलेज के अन्तिम वर्ष तक के छात्रों को सीनियर ग्रुप में शामिल करते हुए पर्यावरण एवं वन्य-जीव विषय पर चित्र बनाने थे।
चित्र आज शामिल नही कर पा रहा हूँ इसका मलाल है पर कोशिश करूंगा की आप देख सकें की शहर की हलचल कितना इजाफा करती है क्रिऐटीव नेचर को बढ़ाने में...........