रविवार, 30 नवंबर 2008

एहसास


सुबह कुछ यूँ लगा
जैसे खनके हो स्वर
आपके...... पापा
गुजर गया एक महीना
यूँ ही मगर
एहसास है आप के
लौट आने का
गुजर रहा वक्त
दरमियाँ मगर
आप के होने का
एहसास तो है

1 टिप्पणी:

COMMON MAN ने कहा…

पिता के प्रति आपकी भावनाओं को नमन. माता-पिता का स्थान कोई नहीं ले सकता.