रविवार, 30 नवंबर 2008

सलाम सपूतों

आतंक की चीख गूंजी















मगर शहादत ने

फख्र से

उंचा किया सर

बहाल कर अमन ।

सलाम तुम्हे वीरों .........


गम है हमें के

देश के लिए

कुर्बान हम न हुए ।

चौडी कर दी

छाती तुमने,


किन शब्दों? से

एहसान करें

देश के लाडलों.........

3 टिप्‍पणियां:

Vidhu ने कहा…

मगर शहादत ने
फख्र से
उंचा किया सर
salaam in shabdon ko bhi

राज भाटिय़ा ने कहा…

हमारा सलाम भी इन मां के सपुतो को इन का एह्सान हम उम्र भर नही चुका सकते.
धन्यवाद

Hamara Ratlam ने कहा…

अब कठोर निर्णय जनता को लेना है।