शुक्रवार, 28 नवंबर 2008

राजनीती पर शर्म है

मीडिया के लोग दुनिया भर में है और जिन शब्दों को वे कहें उनका इको गूंजना चाहिए एसा वे सोचते होंगे । राजनीतिज्ञों की दुम बने ये लोग राष्ट्र धर्म और हमारे सुरक्षा संसाधनों के प्रति लगातार मनोबल को नीचा दिखाने का जतन करते पाये जाते रहे है नकारात्मक सोच वाले इन लोगों से अब नफरत सी होने लगी है । आतंकवादियों के होंसले बुलंद होते तो वे छद्म युद्ध का सहारा ना लेते । चाहे जो हो अलकायदा, सिमी, या अन्य आतंकवादी दल जितना प्रचार मीडिया में इन संगठनो को तरजीह दी जाती है और इनका महिमा मंडन और हमारी नीतियों पर टीका टिपण्णी के जो अवसर परोसे जाते हैं क्या वे वाकई हमारे देश के प्रति सम्मान को व्यक्त कर पाते है? सोचें इन बुजदिल आतंकवादियों को मानसिक साहस कौन देता है।

3 टिप्‍पणियां:

seema gupta ने कहा…

सोचें इन बुजदिल आतंकवादियों को मानसिक साहस कौन देता है।
" so painful, unbearable horrible face of terror..... well raised question.....?

हिमांशु ने कहा…

मीडिया की भूमिका सकारात्मक हो, ऐसा तो लगातार कहा जा रहा है- लगभग हर एक घटना के बाद. पर रेटिंग की यह जंग थमेगी तब न .

Anil Pusadkar ने कहा…

आपसे सहमत हूँ राजेश जी.