बुधवार, 31 दिसंबर 2008

स्वागत 2009



स्वागत है २००९
चूम रहे है पलों की खुशियों को


आओ सींचे नए सपने
आने वाले दिनों की उच्चाकांक्षा के लिए

बिदा 2008

सारे हसीं सपनो को
नित नई बातों को
जीत के आनंद को
फ़िर एक बार संजोने का
ख्वाब दिलाने
बिदा हो रहा साल २००८
जो कुछ आपने हासिल किया बीते दिनों
उनकी यादे जुटाने का दिन ३१ दिसम्बर
आप सभी को विदा दे रहा है
आईये हम भी विदा कर दे इसे
और संजोये खुशियों की नई सौगातों के आरम्भ के अनमोल समय को
करें पलक पावडे बिछाकर स्वागत २००९ का

शनिवार, 27 दिसंबर 2008

आतंक और आज के नए दस चेहरे

देश पर आतंकी हमले हुए ।
संसद पर , कारगिल में और भी छुटपुट, कश्मीर में लगातार ।
हर बार हमारी संसद की नेता अचानक हीरो बन जाया करते है ।
अब इस बार गृह मंत्री हटा दिए गए , फ़िर प्रणब जी आ धमके , प्रधान मंत्री जी ने अपनी कही, राज ठाकरे , फ़िर अंतुले , और ही कई मुह खुले ........
पकिस्तान की रणनिति देखो जरदारी और सेना सिर्फ़ दो .....
माना हम विद्वान हैं, मगर पकिस्तान के समक्ष दस अलग अलग राजनैतिक चेहरे, अलग अलग बयानी, क्या आज रावण का वजूद नही दिखाते ?

अपनी बयानबाजी से हम कब तक बाज नही आयेंगे । पत्रकार भी माईक उठाये पहुँच जाते हैं और राष्ट्रिय हित सोचे बगैर अपनी हीरो गिरी से बाज नही आते । सोचें क्या ये ठीक है ?

गुरुवार, 25 दिसंबर 2008

मेरी क्रिसमस

क्या चिडियाघर में बंद पशुओं को रास आयेगा आपका ये तरीका ?

रविवार, 21 दिसंबर 2008

रोटरी के मेल से A German's View on Islam


Aman, whose family was German aristocracy prior to World War II, owned a number of large industries and estates. When asked how many German people were true Nazis, the answer he gave can guide our attitude toward fanaticism. 'Very few people were true Nazis,' he said, 'but many enjoyed the return of German pride, and many more were too busy to care. I was one of those who just thought the Nazis were a bunch of fools. So, the majority just sat back and let it all happen. Then, before we knew it, they owned us, and we had lost control, and the end of the world had come. M y family lost everything. I ended up in a concentration camp and the Allies destroyed my factories.'We are told again and again by 'experts' and 'talking heads' that Islam is the religion of peace, and that the vast majority of Muslims just want to live in peace. Although this unqualified assertion may be true, it is entirely irrelevant. It is meaningless fluff, meant to make us feel better, and meant to somehow diminish the spectra of fanatics rampaging across the globe in the name of Islam.The fact is that the fanatics rule Islam at this moment in history. It is the fanatics who march. It is the fanatics who wage any one of 50 shooting wars worldwide.It is the fanatics who systematically slaughter Christian or tribal groups throughout Africa and are gradually taking over the entire continent in an इस्लाम
ic wave.It is the fanatics who bomb, behead, murder, or honor- kill.It is the fanatics who take over mosque after mosque.It is the fanatics who zealously spread the stoning and hanging of rape victims and homosexuals. It is the fanatics who teach their young to kill and to become suicide bombers.The hard quantifiable fact is that the peaceful majority, the 'silent majority,' is cowed and extraneous.Communist Russia was comprised of Russians who just wanted to live in peace, yet the Russian Communists were responsible for the murder of about 20 million people. The peaceful majority were irrelevant.China 's huge population was peaceful as well, but Chinese Communists managed to kill a staggering 70 million people.The average Japanese individual prior to World War II was not a warmongering sadist. Yet, Japan murdered and slaughtered its way across South East Asia in an orgy of killing that included the systematic murder of 12 million Chinese civilians; most killed by sword, shovel, and bayonet.And, who can forget Rwanda , which collapsed into butchery. Could it not be said that the majority of Rwandans were 'peace loving'?History lessons are often incredibly simple and blunt, yet for all our posers of reason we often miss the most basic and uncomplicated of points: Peace-loving Muslims have been made irrelevant by their silence.Peace-loving Muslims will become our enemy if they don't speak up, because like my friend from Germany , they will awaken one day and find that the fanatics own them, and the end of their world will have begun.Peace-loving Germans, Japanese, Chinese, Russians, Rwandans, Serbs, Afghans,Indians, Iraqis, Palestinians, Somalis, Nigerians, Algerians, and many others have died because the peaceful majority did not speak up until it was too late.As for us who watch it all unfold, we must pay attention to the only group that counts; the fanatics who threaten our way of life.Lastly, anyone who doubts that the issue is serious and just deletes this email without sending it on, is contributing to the passiveness that allows the problems to expand. So, extend yourself a bit and send this on and on and on! Let us hope that thousands, worldwide, read this and think about it, and send it on - before it's too late.Emanuel Tanay, M ...D.

शुक्रवार, 19 दिसंबर 2008

गिद्ध दिखने का सुकून

पर्यावरण का रक्षण करना सभी का कर्तव्य है । कल सागर से भोपाल लौट कर आते हुए जब गैरतगंज ८ किलोमीटर के फासले पर रह गया । गिद्धों की लुप्त हो रही प्रजातियों के गिद्ध एक साथ दिख जाना सुकून भरे लगे । किंग वल्चर, इजिप्शियन वल्चर, व्हाइट कालर्ड वल्चर के साथ एक गिद्ध जिसे मै नाम से अभिव्यक्त कर पाने में कठिनाई महसूस कर रहा हूँ के झुंड जिनमे संख्या के नाप से क्रमशः ९, ७, १८, १२ के योग में कुल ४६ गिद्ध देख पाया । मैंने गाड़ी रुकवाकर देखा तो पता चला एक लंगूर का भोजन ये प्राकृतिक सफाई कर्मी कर रहे थे ।
गिद्धों पर आए संकट का मूल कारण अब डाईक्लोफेनेक सोडियम को माना जाता है और ये दवा पालतू गाय भैंसों को खाने की वजह से गिद्धों में किडनी खराबी का कारण रही है, एसा ज्ञात तथ्य है । मेरे साथ अशोक डांगी, अशोक गंगवाल , बाबूलाल सेठिया दौरे पर थे । मेरे वाईल्ड लाइफ सेंस से सभी वाकिफ है और गिद्ध दिखने से मेरी जाहिर खुशी उन्हें हतप्रभ कर गई । किसी परिंदे को देख कर होने वाली ऐसी खुशी से वे पहली बार रुबरु हुए थे । गिद्धों पर आए संकट और लुप्त प्रायः परिंदों के बारे में उन्हें खुलकर बताया तब जा कर वे मेरी खुशी को समझ सके । रतलाम में डी ऍफ़ ओ रहे श्री विवेक जैन से मैंने चर्चा कर बताया की मैं इस वक्त चार अलग अलग प्रजाति के गिद्धों के एक समूह के बीच खडा हूँ और हड़बड़ी में घर से केमेरा ले जाना भूल गया हूँ लेकिन ये मेरे जीवन का अद्भुत पल है की एक साथ विभिन्न प्रजातियों को देख पा रहा हूँ । पहले किसी एक प्रजाति के बड़े समूह से साक्षात्कार रहा है लेकिन कई सारी प्रजातियाँ देख रहा हूँ जो एक विरला अनुभव है । मेरे समाचार भर से उनकी आवाज़ में गजब की चमक थी । भोपाल पहुँच कर जाहिद मीर जो मेरे द्वारा स्थापित बर्ड्स वाचिंग ग्रुप के किसी वक्त सह सचिव रहे और अब भोपाल में पदस्थ हैं को रतलाम के ही सुभाष नायडू जो अब भोपाल में एक्स्प्लोड़ रेस्टोरेंट का संचालन करते हैं को यह बात बताई तो वे भी खुशी से भर गए । अब आपको यह समाचर जाहिर कर रहा हूँ ....... पर्यावरण के हितैषी ब्लॉग सदस्य इस समाचार से खुश होंगे ही ....... पूरा यकीन है

मंगलवार, 16 दिसंबर 2008

सोमवार, 15 दिसंबर 2008

financial-crises


उपाय किए तो

आर्थिक मंदी ने विश्व भर में जकड की है । भारत की और सभी की निगाहें लगी हैं , कुछ विश्लेषक मानते हैं की उपायों को देरी से लागू किया गया। बैंक दरों में कमी ने बैंकों को पूँजी की उपलब्धता के बावजूद कर्ज देने में कटौती किए जाने के उपाय ढूंढ डाले हैं । बगैर सुरक्षा के दिए ऋणों की वसूली संभवतः कठिन या कहें नही की जा सकने योग्य ठहरा दी गई है जिससे किए जा रहे उपाय लागू नही किए जा रहे हैं , इस तरह की खबरें अखबारों में पढने को आई तो फ़िर लगा की वाकई हम संवेदनशील हैं देश के प्रति?
आज वित्त मंत्रीजी का बयान है की भारत आर्थिक मंदी की चपेट से बचा हुआ है । रोजगार के बारे में ४०००० नियुक्तियों पर समाचार दिखा तो कुछ सुकून मिला ।

पैसा ये पैसा


शुक्रवार, 12 दिसंबर 2008

बधाई श्री शिवराज सिंह जी को २९ वे मुख्य-मंत्री बनने की


Dec 12, 05:38 pm
भोपाल। शिवराज सिंह चौहान को शुक्रवार को मध्यप्रदेश के राज्यपाल डा. बलराम जाखड़ ने प्रदेश के 29वें मुख्यमंत्री के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।
चौहान ने यहां जंबूरी मैदान पर हजारों लोगों के सामने ईश्वर के नाम पर हिंदी में शपथ ली। इस अवसर पर अकेले मुख्यमंत्री ने शपथ ली। वह अपने मंत्रिमंडल का गठन बाद में करेंगे। इस अवसर पर भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह, प्रदेश के चुनाव प्रभारी एम. वैंकेया नायडू, प्रभारी महामंत्री अनंत कुमार, वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी, संगठन महामंत्री रामलाल, भाजपा शासित राज्यों एवं गठबंधन सरकारों के मुख्यमंत्री रमन सिंह, नीतीश कुमार व प्रकाश सिंह बादल आदि समेत कई नेता मौजूद थे। समारोह स्थल पर भाजपा सरकार एवं चौहान की सलामती की दुआ करने के लिए शपथ ग्रहण से पहले सर्वधर्म प्रार्थना सभा हुई तथा बालीवुड संगीतकार रवींद्र जैन एवं उनके आर्केस्ट्रा ने भजन और देशभक्ति गीत पेश किए तथा इस मौके पर अभिनेत्री हेमामालिनी एवं पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू भी उपस्थित थे।
दैनिक जागरण से साभार

गुरुवार, 11 दिसंबर 2008

आतंकवाद : भारतीय मुस्लिम त्रस्त

House for Mr अली

Fri, Dec 12 03:27 AM
In a recent meeting, some 300 real estate brokers in Surat declared that they will not sell or rent houses to Muslim clients। The ostensible reason for this "boycott" is that the terrorists who attacked Mumbai had local supporters. In other words, even if the terrorists are foreign, they rely on the support of India's Muslims, all of whom, in this thesis, are suspect. Muslims have long found it hard to buy houses in urban India. Tales of discrimination now form a clear pattern of prejudice. Many middle-class Muslims find that otherwise pliant homeowners and building societies suddenly develop cold feet on learning of the buyer's religion. This is especially true in Gujarat post-2002, with segregation becoming disturbingly visible. But this is unprecedented in its brazenness.

गुजरात में ली गई यह कदम ताल आतंकवाद के मंसूबों पर पानी फेरने की है । याहू मुख प्रष्ट के पर्सपेक्टिव पर इसे पढा जा सकेगा। आज रतलाम में एक दिन बिजली बंद रख कर शहीदों के नाम दीप जलाए जाने का एलान है .......... आप भी कर दिखाए एसा कुछ जो ब्लॉग पर छा जाए ।

"दैनिक भास्कर" द्वारा मेरी पोस्टिंग "बुजदिलों का आतंक" को छापा गया आप सभी को बधाई

मंगलवार, 9 दिसंबर 2008

देश में राजनितिक बदलाव की मांग


देश में राजनितिक बदलाव की मांग पर याहू के मुख पृष्ठ पर आज खबर है ।
देश आतंक की राह पर है और जिम्मेदारों को बदल देने की मांग । क्या असल बात यही है की हम सिर्फ कुर्सी को ही टटोलते रहेंगे ?
देश की सुरक्षा पर अमल नहीं करेंगे ।
आप के घर मे आपका भाई गलती करे तो क्या आप गलती सुधरने के बजाय भाई बदल डालते हैं?
गलती सुधारे और लड़ें असल आतंकी तत्वों से राजनीती की जगह नहीं है राष्ट्र की संप्रभुता .........jay hind

मृत सागर से सागर के मरने तक

मृत सागर का यह द्रश्य जहां पानी में जीवन न होने के संकेत से भरा है ।
तो हम इंसान भी, सागर जहां जीवन समृद्ध है को मार देने का उपक्रम किये हैं ।

सोमवार, 8 दिसंबर 2008

श्रद्धा सुमन वीरों को


कैसे?............

आज प्रधानमंत्रीजी का बयान रियायतों से अर्थ तंत्र सुद्रढ़ किए जाने की आश्वस्ति से जुड़ा है । आज देश के जों हालात हैं उनपर गौर किया जाए तो गरीबी रेखा से नीचे कई बेरोजगार उच्च शिक्षा लिए मिलेंगे और वर्तमान हालातों पर जो वर्तमान प्रतिक्रिया है वह सिर्फ़ और सिर्फ़ तुष्टिकरण भर के तरीकों और अर्थ निति के सिद्धांतों से प्रेरित भर है। इन तरीकों में देश की जनता महज कर्जदार बनेगी , बैंक दरों की कमी और ऋण की सहजता कोई जबरदस्त तरीके नही मगर बकौल प्रधानमंत्रीजी यह लोक लुभावने तरीके से प्रस्तुत किया गया है । मंदी के दौर में राहत की साँस जनता को मिले न मिले । उपाय किए गए हैं , इसी में अपनी खुशियाँ तलाश लीजिये बस............

रविवार, 7 दिसंबर 2008

रोजगार

नई पीढी अब उच्च शिक्षा को समर्पित कर दी गई । ये पीढी अब देश में चिकित्सक, अभियंत्री, कम्प्यूटर क्षेत्र के जानकारों की एक बड़ी टीम तैयार करते कराते, प्रबंध की दिशा में आगे बढ़ गई है । एम बी ऐ को अत्यावश्यक मानते हुए पढ़ाई जारी रखे है।
मगर जनाब हमारे इन्फ्रास्ट्राक्चर में कोई बदलाव नही है आने वाले समय में भी हम नौकरियाँ या रोजगार संसाधन की उपलब्धता पर कोई विचार नही किए है । यह पढ़ी लिखी उच्च दक्षता वाले नौजवान जायेंगे कहाँ सोचा है?

बुधवार, 3 दिसंबर 2008

नमन देश से











आतंकवाद पर प्रतिक्रियाए

देश में एक बार फ़िर से शहीद हुए देश भक्तों को नमन किया जा रहा है । राजनीतिज्ञों के लिए उहा पोह से भरा समय है और जब जैसे मौका मिला अपना बयान दर्ज कराने की कोशिशें करने पर आमादा हैं । अपनी कुर्सी अपना राज का आलम इन के सर माथे दिखता है अपने दल और अपनी सीमाओं से बाहर नही निकल सके है ये। रक्षा , सुरक्षा , गुप्तचरी, विदेश एवं अन्तर-राष्ट्रिय समझ से परे इनके बयान आज भी पढने को मिले हैं । राष्ट्र ध्वज में इन्हे क्यों विदाई देते हैं हम जबकि इनकी सोच दलगत निष्ठा से आगे ही नही दिखाई देती ।
आज हमें लीडर की तलाश है । देश के प्रति बलिदान हुए सच्चे देशभक्तों के समक्ष नमन करना था तब क्षेत्रवाद की बयार चला दी गई । उन्निक्रिश्ननके बजाय किसी अन्य शहीद के घर जाना केरल के माननीय मुख्य मंत्री महोदय को क्यों न सुहाया ?
लालू जी की भी बोलती बंद है , नरेन्द्र मोदीजी को करारा जवाब मिला । वाकई अगर ये प्रदेश अपनी सोच व्यक्त करना चाहते तो क्या इन्हे श्रद्धांजलि देने के लिए राज्य या देश में राष्ट्रिय शोक की गुंजाइश नही थी ?
आज गाँव, नगर, प्रदेश, देश के हर कोने में शहीदों को जनता की सच्ची भावनाए प्रस्तुत की जा रही है । एक दिन का राष्ट्रिय शोक इन शहीदों के लिए अभिव्यक्त नहीं किया जा सकता है ? पूर्व प्रधान मंत्री के निधन पर सात दिन का राष्ट्रिय शोक घोषित रहा। क्या हमारी विनम्रता शहीदों के प्रति इतना न्याय भी नही बरतेगी कि इन्हे उचित सम्मान राष्ट्र के स्तर पर मिले ?
वे लोग जो अनजाने में मारे गए उन लोगों का सरकारी चरित्र देखा जायेगा ? राष्ट्र पर कुर्बान उनकी जिंदगी को सम्मान दिए जाने में कोई ऐतराज हो सकता है ? अन्तर-राष्ट्रिय स्तर पर हमारे चिंतन को कब टटोलेंगे हमारे स्वजन, जिन्हें हम कुर्सी पर बैठाते आए है ?

सोमवार, 1 दिसंबर 2008

आतंकवाद : द हिंदू और अन्य समाचार पत्रों से

Washington (IANS): Asserting that sovereign nations have a right to protect themselves, US President-elect Barack Obama Monday assured India that he was absolutely committed to remove the threat of terrorism wherever it may exist.
Asked if he backed India's right to go into Pakistan in case it found the terror threat originated from there, Obama, who during the election campaign advocated US taking similar action as it fights the Taliban on the porous Pakistan-Afghan border, said: "Sovereign nations have a right to protect themselves."
"Our thoughts and prayers go out to the people of India," he added.
The president-elect said his expectation was that Pakistan too would extend India all cooperation in investigating the attacks as assured by Pakistan President Asif Ali Zardari।

इस्राइल ने लड़ाई के तरीके पर ऊँगली उठाई है , सारे युवाओं को जिस देश में अनिवार्य फौजी की सेवाएं देना होती है उन देशों में इस्राइल का नाम शुमार है । वह कहता है उनका अनुभव कभी इस तरह की लड़ाई का नही रहा है लेकिन एक्शन लेने का भारतीय तरीका ढीला ढाला है ।

सहमती है, क्योंकि हमारी एक्शन बगैर सरकार के अनुमति के नही की जाना बेहतरीन विकल्प तो नही है। प्रजातांत्रिक देश में फौजी कदम अचानक बगैर सरकार की इजाजत लिए जाना सम्भव नही ।

इस्राइल जैसी फौजी व्यवस्था हमारे यहाँ लागु नही है। लेकिन सुरक्षा प्रणाली के तहत असफलताओं को ढूँढना पडेगा । हमारी गुप्तचर व्यवस्था को संदेह भरी निगाहों से न देखे । सूचनाओं के समय संवेदनशीलता अनिवार्य पहलु होना चाहिए न की सूचित करने वाले स्रोत की प्रासंगिकता ।

पाकिस्तान एक और तो कह रहा है कि वह भारत के साथ है उस पर संदेह न करें तो दूसरी और सेनाध्यक्ष को कबीलाई क्षेत्र के लोग आतंकवादियों के बजाय भारतीय सीमा पर तैनाती का पक्ष प्रकट कर रहे हैं जो डबल स्टेंडर्ड दर्शाते हैं । पकिस्तान, दाऊद को सौपने को तैयार नही है । अन्तर-राष्ट्रिय प्रश्नों का समाधान करने को उनकी तैयारी नही । बचाव के पक्ष पर समय जाया किया जा रहा है , डिप्लोमसी कि इस प्रकार कि करतूतों पर आक्रमण किया जाए, तुंरत ही ।

मानते है कि फलों से लदे वृक्ष पर ही पत्थर मारे जाते हैं । अन्तर-राष्ट्रिय आर्थिक मंदी के समय पर भारत कि अर्थव्यवस्था का ठीक से खडा ढांचा भी आतंकवादी कारर्वाई का कारण होना चाहिए । बड़ी "सोच" का यह आक्रमण हलके से नही लिया जावे । थोथी राजनीति कर समय जाया ना करे ठोस एक्शन ले। चाहे तो पकिस्तान के समर्थन से ( जो बकौल आसिफ अली जरदारी के बयान से कि वे पूरी तरह से भारत को मदद के लिए तैयार हैं ) वरना ९/११ कि तरह बगैर चिंता के फौजी कदम उठाकर आतंवादी ठिकानो को नेस्तनाबूद कर देने कि मंशा रखें ।