शनिवार, 27 दिसंबर 2008

आतंक और आज के नए दस चेहरे

देश पर आतंकी हमले हुए ।
संसद पर , कारगिल में और भी छुटपुट, कश्मीर में लगातार ।
हर बार हमारी संसद की नेता अचानक हीरो बन जाया करते है ।
अब इस बार गृह मंत्री हटा दिए गए , फ़िर प्रणब जी आ धमके , प्रधान मंत्री जी ने अपनी कही, राज ठाकरे , फ़िर अंतुले , और ही कई मुह खुले ........
पकिस्तान की रणनिति देखो जरदारी और सेना सिर्फ़ दो .....
माना हम विद्वान हैं, मगर पकिस्तान के समक्ष दस अलग अलग राजनैतिक चेहरे, अलग अलग बयानी, क्या आज रावण का वजूद नही दिखाते ?

अपनी बयानबाजी से हम कब तक बाज नही आयेंगे । पत्रकार भी माईक उठाये पहुँच जाते हैं और राष्ट्रिय हित सोचे बगैर अपनी हीरो गिरी से बाज नही आते । सोचें क्या ये ठीक है ?

1 टिप्पणी:

राज भाटिय़ा ने कहा…

जब तक इन नेताओ के परिवार पर मोत की छाया नही पडती तब तक यह व्यान बाजी करते रहेगे, जब इन के परिवार मे से १० ,१२ लोग मरेगे तो देखो केसे कानुन बनता है....
धन्यवाद