शनिवार, 3 जनवरी 2009

साईं बाबा और आरक्षक करणसिंह

आरक्षक करणसिंह वर्तमान में डीआई जी कार्यालय में पदस्थ है ।
मुझसे जब भी मिलते हैं , बड़ी खुश मिजाजी से बातें करते है । अभी कुछ दिनों पहले उनके साथ हुए वाकये उन्होंने सुनाये ।

बकौल करणसिंह
सुबह उठकर मन्दिर जाना मेरा नित्य कर्म है । गुरुवार को जल्दी जाता हूँ । अभी दशहरे के लगभग में मन्दिर गया तो बाबा के गले में पडा हार मुझे अच्छा लगा प्रार्थना करते वक्त सोच रहा था की ये हार मिल जाए तो घर पर बाबा को चढ़ा दूंगा ।
मन्दिर से निकल कर घर गया , वहाँ से १० बजे ऑफिस जाने के लिए निकला , लोकेन्द्र टाकीजवाली रोड से गुजर रहा था तो किसी ने आवाज़ लगाई , देखा मन्दिर के पुजारीजी खड़े हैं । पुजारीजी ने पूछा कहाँ जा रहे हो ?
मैंने बताया ऑफिस का टाईम है सो वहीं जा रहा हूँ । वो बोले अभी मत जाओ , वापस घर को जाओ । मैं सोच में पड़ गया ....... । इतने में उन्होंने मुझे एक पाकेट थमा दिया बोले ये घर पर बाबा को चढ़ा देना ।
मैं घर गया और पैकेट खोला देखता हूँ की उसमे वाही हार था जिसे सुबह प्रार्थना करते हुए चाह रहा था की मुझे मिल जाए ..........

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