गुरुवार, 15 जनवरी 2009

विकट परिस्थिति

आज सुबह एक दंपत्ति से मुलाकात हुई । वे लोग स्वर्ण जयंती रोजगार योजना में आवेदन कर बैंक से ऋण चाहते हैं । मैंने उनसे पूछा की वे कितनी रकम चाहते हैं? और मिल जाने पर क्या करेंगे ?
उन्होंने बताया : पति को किडनी की तकलीफ है और अब इलाज तक के लिए कुछ नहीं बचा है। उद्योग विभाग ने उनकी फाइल को इंदौर बैंक की और रवाना किया है , बैंक प्रबंधक ऋण देने को तैयार हैं । मगर , फाइल के पहले के ४५ ऋण आवेदनों को पहले ऋण देने के बाद ही नंबर आयेगा । वक्त कितना लगेगा वे बता नहीं सकते। अगर पहले के ऋण आवेदनों को यदि छोड़ देते हैं तो यह रिश्वत लिया जाने जैसा है सो पहले के आवेदन पहले देना होंगे।
दंपत्ति से पुछा की वे इस ऋण का करेंगे क्या ?
जवाब था कंगन स्टोर प्रारम्भ करूंगा और घर से टिफिन सेंटर भी चालु करूंगा । ऋण कितना चाहा गया है ? के जवाब में उत्तर था ४०००० रुपये ।
इनका कोई घर नही है , कोई गारंटी दे नही सकते , पहले फोटोग्राफी का व्यवसाय करते थे अब तकलीफ की वजह से वो भी सम्भव नही रहा । यार दोस्त रिश्तेदार वगैरह भी काफ़ी मदद कर चुके हैं बस अब कमाई के लिए आत्म निर्भर होने के लिए रोजगार आवेदन किया है ।
गैस का कनेक्शन भी नही है बर्तन भी खरीदना पड़ेंगे टिफिन सेंटर के लिए ......आदि
एक और पूंजीवाद ने देश को नईऊंचाई दी है तो बेरोजगार हुए भाई अब दर दर की ठोकर खा रहे हैं । बिना गारंटी के ऋण अब कब मिलेंगे पता नही , बच्चों का भविष्य कैसे बनायेंगे ?
विचार नही है असल बात है , यदि कोई तरीका हो तो बताये ........

2 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

क्या अब प्रधानमंत्री रोजगार योजना का विकल्प खतम हो गया है? उसमें तो गारंटी की जरुरत भी नहीं और यह प्रोजेक्ट तो उसके लिए एकदम मुफीद है.

G M Rajesh ने कहा…

sameer bhai puri baat likhi hai swarn jayanti rojgaar yojna BPL candidates ke liye hi to hai. pradhaan mantri rojgaar se 1 Lakh kaa loen milega magar yahaan jo aavedan hai vo matr 40000 rs ka hi to hai fir bhi bank taal jo rahi hai dene me . shayad recovery ek vajah ho