शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2009

धूम मचा ले

बरफ नहीं शैतान यहाँ
मस्ती की धूम है
चल आई होली
पकड़म पाटी खेल ले

गुरुवार, 26 फ़रवरी 2009

बुधवार, 25 फ़रवरी 2009

होली ही क्यों इतने लंबे समय ?

आज याद आया कि पिछले दिनों से एक फोटो और कुछ लाईने लिख कर होली मनाने का खेल चला रखा है मैंने। लगा कुछ लिख भी दूँ इस बारे में वरना आप सोचने लगोगे कि भाई होली क्या ?जनाब; ब्लॉग पर दिवाली के संदेश लगाए, नया साल मनाया , अभी वेलेंटाइन डे भी फ़िर एक एक कर सारे त्यौहार तो सोचा रंग भी लगे और संदेश भी इसलिए नेट के किसी कोने से फोटो लेकर चिपका दिया और लिख डाली वे सारी लाईने जो सूझ पड़ी । आपका प्यार मिला , जज़्बात समझे , प्रकृति कि महत्ता प्रतिबिंबित कर डाली । फ़िर सोचा कि होली तो १३ मार्च को है तो अभी से होली का रंग क्यों बिखेर डाला।चलो अपनी आलोचना ख़ुद ही कर ली ।ये त्यौहार है भी तो टोपियाँ उछालने का ही तो सोचा वो कैसे होगा ?फ़िर लक्कड़ बचाने का धर्म भी तो निबाहना चाहिए ।बिना पानी और रंग लगाए दूर दूर रहकर होली थोड़े ही खेली जाती है। सो घर का बुलावा भी दे डाला ।फ़िर याद आया कि बिना काम पानी ख़राब करने का समय नही है क्या ये होली का दिन ?लोग अपनी रंजीशें भी तो इसी दौर में निपटाते हैं ।सोचा क्यो बेवजह होली का त्यौहार मना रहा हूँ ।आप समझे कुछ ?अरे भाई , होली का डांडा जो गड़ गया हैं न , तो फ़िर ?अपने इलाके की कह दू तो यहाँ होली धुलेंडी फ़िर रंगपंचमी मनाने का दस्तूर कायम है एक दिन से काम चलता नही फ़िर आस पास में तो और भी जबरदस्त माहौल रहता है । मंदसौर जिले में तो ग्यारस तक रंग खेलने का प्रचालन है ।अब अपनी वाली दिखाने कि बात आई है :भाई पानी का मोल समझो जंगल को संपत्ति चाहे कोई कुछ करे बोलो मति आप होते कौन हैं जो ले सको आपत्ति आज सिर्फ़ अपना ही अपना है भाई । खेलना ब्लॉग ही पर होली । दुबके ना रहना सोच संकोच में । आजाद रखना सोच और खुल के आना सामने । बिना लकड़ी और पानी के रंग बिखराना जरूर । मनाना होली चाहे पास रहो या दूर । गाना जमकर गाना । उधम भी मचाना । और फ़िर लिख भेजना ताकि जो होली मना न सके उसे लगे कि वो भी कैसा पागल है........

मंगलवार, 24 फ़रवरी 2009

संदेश छोटे का


जय शिव शंकर


होली का लिखते लिखाते आप को शिवरात्री की बधाईयाँ देना भूल गया क्या ?
हर हर महादेव का जय घोष करें और प्रभु से प्रार्थना की सभी को अच्छे अच्छे आशीर्वाद मिले, सबकी चाहत पूरी हो, मनोकामनाये सिद्ध हों ....................

रविवार, 22 फ़रवरी 2009

होली के रंगों में

दिल की पतंगे उडाओ खूब
रंगों को बिखराओ खूब
तन्हाई में जी रहे हो गर
होली खेलने आ जाओ घर

होली के दिनों में रंग और मस्ती


शनिवार, 21 फ़रवरी 2009

और पीने को अब ये भी


भूख नही बख्शती किसी को


होली की याद दिला दूँ फ़िर से


mudra nidhi


सिक्के से याद आया
गणना का जो सबक गाँव मे प्रचलित रहा ।
एक दिन किसी सामान को लेने एक दूर दराज के हिस्से मे जाना पड़ा कोई और रास्ता नही था और बीहड़ मे कुछ खाना सिर्फ़ इसी गाँव मे मिलता था । एक आदिवासी महिला इस जगह पर व्यापार करती है मालुम हुआ ।
जाकर सौदा खरीदा जब पैसे देना चाहे तो उसने आठ पचोर मांगे ।
अब सोचने की बारी थी की आठ पचोर के लिए पचोर कहाँ से हासिल होंगे ?
काफ़ी देर मशक्कत कर मालुम हुआ पचोर कोई मुद्रा नही है यह ईकाई है पाँच रुपये की ।
खैर आठ पचोर यानी चालीस रुपये चुका कर वापस तो हुए लेकिन आज तक ये पचोर अपनी बेबसी पर हँसी ला देते है ।
राजस्थान के झालावाड जिले का यह किस्सा याद आता है जब किसी जगह पैसे चुकाने की आर आती है ।
एक दिन विशाखापत्तनम मे सपरिवार आम खरीदने का मन बना । मध्य प्रदेश का निवासी भला नई जगह सौदा कैसे करेगा इसकी बानगी है यह किस्सा । कुल चार दिनों के लिए भाईसाहब के घर घुमने फिरने और नेवी के जहाज और पन्दुब्बियाँ देखने का अवसर था और वहाँ की भाषा से कभी पाला पड़ा नही था । आम खरीदने का पारखी माना जाने की वजह से मुझसे आम परखने को कहा गया लेकिन वे कुछ समझ पाते मैं आम खरीद चुका था और पैसे भी चुका दिए थे । भाभी जी की सोच थी की मैं आम छाँट लूंगा और वे सौदा कर लेगी । उन्होंने भावः करना चालु किया फ़िर मुझसे पूछा की कितने में मैंने ये आम खरीद लिए है वे जान कर हैरान थी उनके सौदे में उन्हें आम वाली महिला ३० रुपये से कम देने को तैयार नही थी और मई २५ रुपये में खरीदे खडा था ।

आज तक यह गुत्थी वे सुलझा नही पायी हैं की वो सस्ता सौदा मैंने किया कैसे
मैं जैसे ही आम वाली के पास पहुँचा एक व्यक्ति जो आम खरीदे खडा था से पूछा की उसने ये आम कितने में खरीदे है उसने बताया की वे २५ रुपये में खरीदे है मगर शर्त है २ किलो आम खरीदना पड़ेंगे। फोर्मुला मेरे हाथ था सो मैंने खरीद लिया था और भाभीजी सौदा करने में पीछे रह गई थी ।

शुक्रवार, 20 फ़रवरी 2009

होली है

राजहंस पक्षियों का एक झूंड अचानक बाथरूम में देखातो एक बर्ड वाचर ने दुसरे से पूछा :
भाई ये क्या बात हुई ?
जवाब मिला : होली खेल कर आ रहे है सभी ।
सवाल हुआ : भाई ये तो समझ में आया, मगर बाथरूम में एक साथ इतने क्यो ?
जवाब मिला : ये बाथरूम को हम्माम समझ रहे है ।



फागुन की बहार जब छाती है


फागुन की बहार जब छाती है
उन्ही दिनों होली आती है
रंग जाता है सारा जहाँ
और फैलता है उन्माद
मस्ती का दौर छाता है
कोई अपना याद आता है
कली कली खिल जाती है
जब बचपन की शैतानी याद आती है
गर मिल जाता है कोई सपना
बेगाना हो जाता अपना
होली याद दिलाती है
जब बहार फागुन की छाती है

होली का पहला रंग.......



एक दिन बकरियां पेड़ पर चढ़ गई।


गुजरने वालों ने जब देखा तो पूछा : अरे पेड़ पर क्या कर रही हो ?


बकरियां बोली : अरे जल्दी से तुम भी चढ़ जाओ । क्या तुमने सुना नही , तेंदुआ आस पास ही है ?

बुधवार, 18 फ़रवरी 2009

दिल

रखा था महफूज़
अपने दिल को, अपने ही सीने में
जज्ब कर

ले गया कोई उसे
चुराकर/ छीनकर/ खींचकर
ख़ुद ही से

ये गज़ब हो गया !
बेगाना वो
अपना हो गया मगर

कातिल था दिल का
उतारकर खंजर चक से
खींच गया बेदर्द
अहसास दे गया
जिंदगी का
मगर



जान भी न पाये
ये था कौन ?
अचानक जो बन गया अपना

मातम तक मनाने न दिया
हाय! कत्ले दिल का

सोमवार, 16 फ़रवरी 2009

म्यूजियम

कल लिखने बैठा था तभी यह मुद्दा जेहन में आया था ।
भारत की स्वतन्त्रता के बाद निजी क्षेत्र में कोई म्यूजियम शायद ही बनाया गया होगा जैसा कल मुद्रा निधि के नाम से प्रारंभ किए गए सिक्कों के म्यूजियम से सम्बंधित शुभारम्भ से जुड़ासंस्मरण लिखा था।
मुझे याद आया अपनी बीते दिनों का सफर और पूना का वो म्यूजियम जिसे सिर्फ़ सुपारी काटने के काम आने वाले सरौते को समर्पित कर स्थापित किया गया है। विरासत के उपहार के रूप में संजोये गए ये चकाचोंध से पूरित म्यूजियम भारतीय इतिहास के साथ साथ चीजें इकट्ठी करने के शोकीनों में जज्बा बनाए रखते हैं ।
फ़िर याद आए वो दिन जब माचिस, पोस्टेज कलेक्शन बीते दिनों किया करते थे । दीवानगी की वो हद जिसके चलते स्वर्गीय मौसाजी श्री एन एन जोशी जी (भोपाल ) ने साबुन इकट्ठे करना शुरू किए थे और उनके ड्राइंग हालमें लगभग २२००० साबुनों का शानदार संकलन देखने को मिला करता था । आए दिन उनके इस शौक को अखबारों और 1980 के दौर में प्रारंभ हुए नए नए टी वी चैनलों ने दिखाना प्रारम्भ किया था । यह संग्रह आज मौजूद है मगर जो संकलन करने की प्रवृत्ति उनमे थी वो अब मेरे भाईयों में कदापि नही है । मुझे याद है उनका जज्बा जब उन्होंने मेरे हैदराबाद जाने के बारे में सुनते ही फ़ोन लगाकर कहा : वहाँ के किसी एम्पोरियम से साबुन खरीद कर लाना पड़ेंगे और उन्हें भेंट देते वक्त मेरी इस गिफ्ट को वे बताते नही थके थे की राजेश ने उनको आंध्र से विशेष साबुन खरीद कर दिए, उनके संकलन में रूस इटली यु एस और अन्य देशो के साबुन सहज ही शामिल हो गए थे। वे जहाँ कहीं भी जाते साबुन खरीद लाया करते थे मगर उनका जो भी परिचित विदेश जाता वहाँ से साबुन जरूर खरीद कर लाता था । हम सब मजाक करते की मौसाजी साबुन नहाने के लिए भी दिया करो , उन्होंने हमारे बेवजह के डर से लोक्कर्स बनावालिए थे ।
भारत भर में यूँ तो कई म्यूजियम बने हैं मगर ये राजा महाराजाओं को मिले अनूठे उपहारों से भरे हुए है उनकी राजसी विलासिता को ये प्रर्दशित करते मालूम होते है । रतलाम में डाक टिकटों का संग्रह रखने वाले मेरे मित्र का फोटो उनकी संग्रहशीलता के लिए आज अखबार में है श्री निगम नगर के उन संग्राहकों में हैं जिन्होंने १ लाख से अधिक स्वदेशी टिकिट इकट्ठे कर अपना काम जारी रखा है ।
आजकी यह पोस्ट उन सभी जनों को समर्पित है जिन्होंने किसी प्रकार संकलन करने की वृत्ति पाल राखी है और आने वाले वक्त के लिए उनका संकलन निधि के रूप में दर्ज होगा ।
राज्य शासन इस प्रकार की प्रव्रत्तिधारियों के संकलन को सार्वजानिक करने का बीडा उठा ले तो हो सकता है कई नई नवेली प्रवृत्ति और संकलन सामने आए.........

मुद्रा निधि कॉइन गेलेरी, आजवा, वडोदरा में

कल गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने निजी प्रयासों से स्थापित सिक्कों की एक गेलेरी का उदघाटन वडोदरा शहर में किया है ।
अजय ने फ़ोन पर बताया कि कल यानी १५ फरवरी को पापा कि गेलेरी का इनोग्रेशन है तो बचपन के इस दोस्त कि पुकार / बुलावे को सम्मान देने सवेरे उठकर तुषार को उठाया फ़िर नहा धो कर उसे साथ लेकर जनता एक्सप्रेस से वडोदरा पहुंचा ।
वडोदरा के पिकनिक स्पॉट आजवा के समीप यह गेलेरी/म्यूजियम स्थापित कि गई है, मुद्रा निधि कोइन गेलेरी के नाम से।
पिछले १८ बरसों में अजय के पापा यानी श्री सनत कुमार कपूर जो मेरे लिए ताऊजी के समान हैं का जबरदस्त प्रयास सिक्कों को इकट्ठा करने का रहा और उनका यह जूनून इस कदर छाया कि देखते ही देखते २६०० वर्ष पुराने सिक्के भी उनके संकलन में शामिल हो गए ।
अजय जब पिछली बार रतलाम आया तो उसने यहाँ से सिक्के खरीदने कि बात कही उसे यहाँ के कलेक्शन कर्ताओं से मिलवाया और उसने कुछ सिक्के खरीदे तो मैंने पूछा था कि ये शौक बड़ा ही जूनून से भरा होता है आगे क्या करोगे इसका ? उसने बताया था कि एक गेलेरी लगाने कि योजना चल रही है और यह कपूर रिसोर्ट पर स्थापित होगी ।
१९८५ से लंबित कपूर रिसॉर्ट की ओपनिग का अचानक निमंत्रण तो नही था मगर काफ़ी दिनों से मुख्यमंत्री गुजरात श्री नरेन्द्र मोदी के कर कमलो इसकी शुरुआत किए जाने से लंबित चल रहे इसके उदघाटन समारोह के निमंत्रण अचानक पाकर मुझे खुशी हुई । जब यहाँ पहुंचा तो पता चला कि सारा समारोह शासकीय अमली जामा पहने था ।
अंकल जी का प्रयास आज मुद्रा निधि के रूप में संकलित हो गया और अब म्यूजियम के रूप में यह शहर को एक सौगात भी है और इसका भव्य उदघाटन सबके चहेते व्यक्तित्व कि छवि रखने वाले मुख्यमंत्री द्वारा हो सका इसकी बधाई और हाँ जब कभी आप का वडोदरा कि और जाना हो इस गेलेरी में रखे पुरातात्विक महत्त्व के सिक्कों से रूबरू होना भूलें नही ।
कपूर परिवार को इसकी बधाई और जन शिक्षा के रूप में स्थापित इस म्यूजियम के लिए ख़ास तौर पर अंकल श्री सनत कुमार कपूर जी का आभार जिन्होंने हमारी धरोहर को सहेजा और सिखाया कि धरोहर कैसे सहेजी जाये । हाँ एक बात जिसका जिक्र करना लाजिमी है श्री कपूर के इस सिक्के के संग्रह को जनता के बीच लाने के लिए उनके बड़े भाई श्री सुरेन्द्र कुमार जी ने निर्माण का उत्तरदायित्व वहन कर यह संपदा सबके बीच पहुचाने का श्रम किया है।
यह अवसर मुझे वडोदरा कि सांसद श्रीमती जयाबेन ठक्कर से मध्यप्रदेश और गुजरात के मध्य चल रहे गिर वन क्षेत्र के "सिंह " संवाद के सम्बन्ध में चर्चा का अवसर दे गया ।

शनिवार, 14 फ़रवरी 2009

वेलेंटाईन डे पर आपको

कहते है काम देव का तीर चलता है, तब फैलता है प्रेम

कहते हैं दिन न मनावें
कहते हैं संस्कृति हमारी नहीं
क्या प्रेम की खातिर बलिदान शीरी फरहाद , मजनू लैला , को भूल पाये लोग
जिन्होंने संस्कृति की खातिर रोका क्या वे याद किए गए ?
दिन मने चाहे साल , प्रेम से रहें सभी करे इस पर ऐतबार

बुधवार, 11 फ़रवरी 2009

पैसा ये कैसा ?


कर्मचारी गीता

नोट : कृपया बड़ा कर पढ़ें

मंगलवार, 10 फ़रवरी 2009

बचपन बीवी और जवानी की झलक




एक झलक काफ़ी है
दास्तान बयाँ करने को

सोमवार, 9 फ़रवरी 2009

भारत का स्वदेशी महाकम्प्यूटर "अजेया"

जो जानकारी मुझे हासिल है इसके सम्बन्ध में वो यह है की भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र द्वारा सुपर कम्पूटर का निर्माण इसलिए हुआ क्योंकि भारत एक परमाणु शक्ति संपन्न देश है और इस वजह से विश्व के कंप्यूटर निर्माता हमें तकनिकी सहयोग नही देना चाहते थे ।
भारतीय वैज्ञानिकों को यह चुनौती के रूप में लेना पडा था और सुपर कंप्यूटर का निर्माण हुआ । सुपर कंप्यूटर के मामले में विश्व के बेहतरीन कम्प्यूटरों में अब इसकी गिनती है । कंप्यूटर के निर्माण के बाद तकनिकी क्षेत्र में भारत अब नए मुकाम पर है । अजेया कम्पूटर निर्माण से सम्बंधित जो जानकारी मुझे श्री किसलय भट्ट जी के मध्यम से मालुम हुई उस अनुसार भारतीय वैज्ञानिकों के दल ने जिसमे वे ख़ुद भी शामिल हैं को स्वर्ण पदक प्राप्त हुआ है और इसकी उन्नत तकनिकी की वजह से इसका उपयोग बिग बैंग जैसे महा प्रयोग का डाटा लेने में किया जा रहा है । दुनिया भर के ३५ देश जिस प्रयोग से सम्बद्ध है उसमे सम्पूर्ण स्वदेशी महा कंप्यूटर अजेया का शामिल होना निश्चित तौर पर सम्मानजनक है ।

शनिवार, 7 फ़रवरी 2009

भारत का सुपर कंप्यूटर अजेया बिग बैंग से सम्बद्ध हुआ

आज शाम भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र के सुपर कंप्यूटर की टीम के वैज्ञानिक श्री किसलय भट्ट रतलाम में आयोजित की जा रही भारत निर्माण एवं जन सूचना अभियान के अंतर्गत अपना विशिष्ट विडियो प्रदर्शन लेकर प्रस्तुत हुए । अपने इस प्रदर्शन में उन्होंने स्रष्टि निर्माण के पहलु को लेकर स्थापित लार्ज हेड्रोन कोलाईडर के लिए भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा की जा रही भागीदारी के सम्बन्ध में बताया। भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा अजेया सुपर कंप्यूटर का निर्माण किया गया है इस कंप्यूटर के निर्माण में जिस दल को गोल्ड मैडल हासिल हुआ है श्री किसलय भट्ट उसी दल के सदस्य हैं । उन्होंने बताया : - फ्रांस और स्वीटज़रलैंड में स्थापित बिग बैंग प्रयोगशाला को उनका दल मदद कर रहा है। अखबारों में छपी भ्रांतियों का खंडन करते हुए उनका कहना था की इस प्रयोग में हिग्स पार्टिकल की खोज जारी है जिसका सम्बन्ध ब्रम्हांड की उत्पत्ति के रहस्यों से जुड़ा है ।

कार्यक्रम में नगर के प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित हुए। अध्यक्षीय उद्बोधन पंडित बाबुलालजी जोशी ने दिया । कार्यक्रम के अतिथि नगर विधायक पारस सखलेचा थे। भारत निर्माण अभियान के श्री मधुकर पवार ने अतिथि परिचय दिया। और संचालन दायित्व को मुझे वहन करना था।

विगत दिनों ब्रह्माण्ड उत्पत्ति के संबंद में पहले भी अपनी पोस्ट में लिखा था। इस कार्यक्रम ने कई प्रश्नों का समाधान किया। न्यूक्लियस की संरचना से सम्बद्धता का यह महाप्रयोग अपनी विशिष्टता तो रखता ही है मगर साथ ही साथ भारत द्वारा निर्माण किए गए कंप्यूटर अजेया की इस महा प्रयोग से सम्बद्धता ने अपनी धाक से प्रभावित किया जो आप पाठको और ब्लॉग लेखकों को भारत के गौरव के प्रति उद्वेलित करेगा ।

शुक्रवार, 6 फ़रवरी 2009

ओपिनियन

आज अखबार पढ़ रहा था । फंडामेंटलिस्ट को फंडू कह कर, कपड़े उतार कर पीछे के हिस्से में मार लगा कर, पाश्चात्य संस्कृति अपनाने की वकालत की गई है।
भाई, आज वर्ल्ड ट्रेड ओर्गेनिजेशन के पिछलग्गू बन कर विश्व व्यापी मंदी से हम प्रभावित है और हमारी सोच का पाश्चात्यपन हमारी उधार वादिता के नए आयामों पर अग्रसर है। कर्ज की दुनिया बड़ी दिलेर हो गई, अब बेरोजगारी का आलम, अब उस पर मध्यवादिता को लाछन के उनकी सोच पाश्चात्य के अनुकूल न होने से वे सजा के काबिल हो जाए ? ये ठीक बात नही।
महिलाओं के प्रति अभद्रता को नितिपरक संस्कृति से बदलने के बजाय उलाहने देकर पाश्चत्य मानसिकता के अधिग्रहण पर विचार तो होना चाहिए। यह बात गले उतरने वाली नही की सिद्धांतवाद की आड़ लेकर महिलाओं से मारपीट हो । मगर इसका जवाब पाश्चात्य संस्कृति अपनाना कदापि नही होगा वरन इसका जवाब परम्पराजन्य संस्कृति में हासिल है ।
पहरावे, भाषा और कमाने के विकल्प की सार्वजनिक स्वतन्त्रता हमारी अपनी सभ्यता के साथ नागरिकों के मौलिक अधिकारों में दर्ज होकर हमारे अपने संविधान में मान्य बिदु हैं तो यहाँ पाश्चात्य मार्गदर्शन की आवश्यकता क्या हमारे अपने विकलांग मानस की परिचायक नही कहलानी चाहिए ?
अखबार भी इस तरह की धारणा को प्रोत्साहित करते हैं तो यह खेदजनक है .......

पंचतत्व



धरती पर पञ्चतत्वों को महसूस किया जा सकता है , इस निगाह से भी

यहाँ भूमि है , लावा आग लिए, जल है , वायु वाष्प रूप में

और द्रश्य आसमान से

कार्ड्स की दुनिया से


हम हैं तुम्हारे

इस प्रणय दिवस पर आप सभी ब्लॉग लेखकों से संवाद

चाँद से उतरे पहले यात्री


Neil Armstrong, Michael Collins and Edwin 'Buzz' Aldrin Jnr,
the crew of the historic Apollo 11 moon landing mission are subjected to a period of quarantine upon their return to earth। 24 July 1969
Through the window of their Mobile Quarantine Facility, they hold a conversation with President Richard Nixon (1913 - 1994)
Photo: MPI/Getty Images