शनिवार, 14 फ़रवरी 2009

वेलेंटाईन डे पर आपको

कहते है काम देव का तीर चलता है, तब फैलता है प्रेम

कहते हैं दिन न मनावें
कहते हैं संस्कृति हमारी नहीं
क्या प्रेम की खातिर बलिदान शीरी फरहाद , मजनू लैला , को भूल पाये लोग
जिन्होंने संस्कृति की खातिर रोका क्या वे याद किए गए ?
दिन मने चाहे साल , प्रेम से रहें सभी करे इस पर ऐतबार

3 टिप्‍पणियां:

seema gupta ने कहा…

"perfactly well said.."

Regards

पंकज व्यास, रतलाम ने कहा…

aapki post karamachari gita danik prasaran me prakashit kar rahhn hoon.

prati baba medico par pahooncha di jayengi.

hem pandey ने कहा…

'दिन मने चाहे साल , प्रेम से रहें सभी करे इस पर ऐतबार'-प्रेम से रहें, प्रेम करें, लेकिन प्रेम का भोंड़ा प्रदर्शन न करें.