शनिवार, 21 फ़रवरी 2009

सिक्के से याद आया
गणना का जो सबक गाँव मे प्रचलित रहा ।
एक दिन किसी सामान को लेने एक दूर दराज के हिस्से मे जाना पड़ा कोई और रास्ता नही था और बीहड़ मे कुछ खाना सिर्फ़ इसी गाँव मे मिलता था । एक आदिवासी महिला इस जगह पर व्यापार करती है मालुम हुआ ।
जाकर सौदा खरीदा जब पैसे देना चाहे तो उसने आठ पचोर मांगे ।
अब सोचने की बारी थी की आठ पचोर के लिए पचोर कहाँ से हासिल होंगे ?
काफ़ी देर मशक्कत कर मालुम हुआ पचोर कोई मुद्रा नही है यह ईकाई है पाँच रुपये की ।
खैर आठ पचोर यानी चालीस रुपये चुका कर वापस तो हुए लेकिन आज तक ये पचोर अपनी बेबसी पर हँसी ला देते है ।
राजस्थान के झालावाड जिले का यह किस्सा याद आता है जब किसी जगह पैसे चुकाने की आर आती है ।
एक दिन विशाखापत्तनम मे सपरिवार आम खरीदने का मन बना । मध्य प्रदेश का निवासी भला नई जगह सौदा कैसे करेगा इसकी बानगी है यह किस्सा । कुल चार दिनों के लिए भाईसाहब के घर घुमने फिरने और नेवी के जहाज और पन्दुब्बियाँ देखने का अवसर था और वहाँ की भाषा से कभी पाला पड़ा नही था । आम खरीदने का पारखी माना जाने की वजह से मुझसे आम परखने को कहा गया लेकिन वे कुछ समझ पाते मैं आम खरीद चुका था और पैसे भी चुका दिए थे । भाभी जी की सोच थी की मैं आम छाँट लूंगा और वे सौदा कर लेगी । उन्होंने भावः करना चालु किया फ़िर मुझसे पूछा की कितने में मैंने ये आम खरीद लिए है वे जान कर हैरान थी उनके सौदे में उन्हें आम वाली महिला ३० रुपये से कम देने को तैयार नही थी और मई २५ रुपये में खरीदे खडा था ।

आज तक यह गुत्थी वे सुलझा नही पायी हैं की वो सस्ता सौदा मैंने किया कैसे
मैं जैसे ही आम वाली के पास पहुँचा एक व्यक्ति जो आम खरीदे खडा था से पूछा की उसने ये आम कितने में खरीदे है उसने बताया की वे २५ रुपये में खरीदे है मगर शर्त है २ किलो आम खरीदना पड़ेंगे। फोर्मुला मेरे हाथ था सो मैंने खरीद लिया था और भाभीजी सौदा करने में पीछे रह गई थी ।

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