रविवार, 22 फ़रवरी 2009

होली के रंगों में

दिल की पतंगे उडाओ खूब
रंगों को बिखराओ खूब
तन्हाई में जी रहे हो गर
होली खेलने आ जाओ घर

3 टिप्‍पणियां:

ameet satya ने कहा…

jaroor aaungaa ji holi jo khelnaa hai
magar uske pahle shivrati manaa len kya?

INDIAN SHARE MARKET HINDI ने कहा…

yah to bahut chotta chittha raha

Udan Tashtari ने कहा…

जी, बस घर आ ही गये हैं.