रविवार, 1 मार्च 2009

होली मनाओगे कैसे ?

बारिश कम भई
जाने कौन की नजर लगी
अब होली कैसन खेले
पानी जो है नई

पूछा एक मित्र से भैया
अकाल पडत रहा
होली अब कैसे ?
कहत रहा : जाने कैसे

अखबार में पढा , लिखत रहे
तिलक होली मनाएंगे

घर में पानी रहा नही
अब क्या पड़ोसी नहलायेंगे?

कल टीरेंन में कहत रहे एक भाई
उज्जैन ने जल दूत की टीम है बनाई

लेकिन जाना जब हमहूँ
नालं में बहे रहा पानी से जियादा लहू

कहे रहे थे
पानी की लड़ाई थी

5 टिप्‍पणियां:

विनीता यशस्वी ने कहा…

कल टीरेंन में कहत रहे एक भाई
उज्जैन ने जल दूत की टीम है बनाई

Achha vyangya kiya hai apne kavita ke madhyam se...

शोभा ने कहा…

बहुत खूब।

kumar Dheeraj ने कहा…

बारिश कम भई
जाने कौन की नजर लगी
अब होली कैसन खेले
पानी जो है नई
होली के प्रसंग पर बेहद रोचक लेख आपने लिखी है । पढ़ कर बहुत अच्छा लगा बहुत आभार

Udan Tashtari ने कहा…

एकदम सटीक!!

राज भाटिय़ा ने कहा…

मुझे तो पता नही?
बहुत ही सुंदर भाव लिये आप की यह कविता.
धन्यवाद