बुधवार, 4 मार्च 2009

उसने देखा मुझे ऐसे,

कल पानी की लिखी बात
होली पर गया गीत
देखा उसने मुझे आश्चर्य से
गया हो मुझसे जैसे जीत
फ़िर गर्दन घुमाई ऐसे
गोया हो मन का मीत
होली है सो लिख ली अपने पर
वरना है नही ये अपनी रीत

4 टिप्‍पणियां:

शोभा ने कहा…

कल पानी की लिखी बात
होली पर गया गीत
देखा उसने मुझे आश्चर्य से
गया हो मुझसे जैसे जीत
फ़िर गर्दन घुमाई ऐसे
गोया हो मन का मीत
बहुत खूब।

Udan Tashtari ने कहा…

चलो, होली के बहाने ही सही..लिखी तो अपने पर. हा हा!! बढ़िया है. :)

राज भाटिय़ा ने कहा…

भाईया वो शायद आप को पहचान रहा था....:)

kumar Dheeraj ने कहा…

राजेश जी बेहद खूबसूरत रचना । पूरी रचना अपने आप से कुछ कहती है । बहुत सुन्दर धन्यवाद