मंगलवार, 17 मार्च 2009

आख़िर एक जीव कितना बेहाल किया जायेगा ?

चारों और से घेर दिया अब आक्रमण हो तो दोषी जानवर ही होगा
क्योंकि बेजुबान अपना पक्ष तो रख नही पायेगा ना ।
आईये
पिछले कुछ बरसों से चली आ रही मेरी लड़ाई जिसमे तेंदुआ बचाना जरूरी हो गया है में
शरीक हों

4 टिप्‍पणियां:

राज भाटिय़ा ने कहा…

मुझे तो उसे देखने वाले जानवर ज्यादा दिख रहे है.
धन्यवाद

seema gupta ने कहा…

"आपकी इस लडाई मे हम भी शामिल हैं......आखिर किसी को तो इस बेजुबान की जुबा बनना ही होगा न.."

Regards

विनीता यशस्वी ने कहा…

Is Larai mai hum bhi apke sath hai...

G M Rajesh ने कहा…

yes

the man are quantitative

now animals are qualitative