मंगलवार, 24 मार्च 2009

तकरार


जहाँ प्रेम है वहाँ तकरार भी तो है
मकसद दोस्ती का फ़िर कायम भी तो है

आज लड़े, कल फ़िर मिल जायेगे
यह जहाँ हम ही तो खूबसूरत बनायेंगे

बस्ती आज बनाना है
मौसम भी सुहाना है

मकसदों का खेल
आज की तकरार है

1 टिप्पणी:

विनीता यशस्वी ने कहा…

आज लड़े, कल फ़िर मिल जायेगे
यह जहाँ हम ही तो खूबसूरत बनायेंगे


Good lines and nice picture...