सोमवार, 30 मार्च 2009

सीख

आओ बच्चों तुम्हे सिखाये
ये धरती कहलाती इंसान की
पानी जमीन जंगल छोड़ा न उसने
इतने बड़े शैतान की
पनाह में हम है उसके
कहीं नहीं भगवान् भी
ठिठक कर रह जाना
दिख जाए जो परछाई भी
रहमो करम से जी रहे जिसके
है बड़ा हैवान ही

जंगल का हर जीव ठिठकता
आज हमें महसूस कर
शैतान , हैवान कहता
इंसान के दिख जाने भर
हम न सुधरे, ना सुधरेंगे
कोई कुछ भी कह ले गर
कोई कुछ भी कह ले गर ...................

2 टिप्‍पणियां:

विनीता यशस्वी ने कहा…

Shandaar kavita aur shandaar picture...

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत ही सुंदर कविता.
धन्यवाद