शनिवार, 4 अप्रैल 2009

गर्मियों के मजे

आई लुभावनी गर्मियाँ
लाई खुशियाँ दर्मियाँ
करेंगे मिलजुलकर एश
ठंडा ठंडा होगा पेश
कहीं पहाड़ तो कही नदियाँ
बुलाती सदा इसी दरमिया
गाना खाना और घूमना
नही फिकर के पढना लिखना
नानी मौसी मामी बुलाती
चाची अपने मैके ले जाती
फ़िर वापस आ सुनायेंगे किस्से
कैसी गर्मियां थी, तपती फ़िर से
पापा ने विदेश के प्रोग्राम बनाए
शादी ब्याह फ़िर माथे आए
जाना था अबके परदेश
पड़े हैं अब अपने ही देस

4 टिप्‍पणियां:

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत सुंदर लिखा ...

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत ही सुंदर लगे आप के गर्मियो के मजे.
धन्यवाद

hem pandey ने कहा…

वास्तव में गर्मी की छुट्टियां बच्चों के लिए ऐश के दिन हैं.

seema gupta ने कहा…

" wah grmiyon mey ye madhur sa ehsaas.."

Regards