मंगलवार, 21 अप्रैल 2009

खताएं , अहसास और ज़माना



लाया अहसास सुनहरा पंछी
मन की मुरादे पाने की
संगीत झनझनाया ऐसे
पंक्तिया हों, गाने की
लबों पे बात आई , थम गई
अहसास नहीं लौटाने की
महसूस किया ऐसा कुछ
भरे भरे पैमाने सी
सपनीली आंखों में बसा क्या ?
बात किसे बताने की ?
कोई अपना होगा कहाँ
बेबसी इसी जमाने की
बतला भी तो सकते नही
निशब्द अदा है खताने की

6 टिप्‍पणियां:

मोहिन्दर कुमार ने कहा…

सुन्दर भाव अभिव्यक्ति.. कभी कभी कहा अनकहा और कभी अनकहा कहे सा लगता है..कभी चुप भी बेहतर लगती है.. यही दिल का असमंजस है..लिखते रहिये

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत बढ़िया...

यह अंतिम पंक्ति में प्रयुक्त ’खताने’ का क्या अर्थ है??

seema gupta ने कहा…

सपनीली आंखों में बसा क्या ?
बात किसे बताने की ?
कोई अपना होगा कहाँ
बेबसी इसी जमाने की
बतला भी तो सकते नही
निशब्द अदा है खताने की
"sapnili ankhon ke sapne,
duniya ko dikhla nahi skte,
dil ki bate dil hi jane,
baat nahi ye batlane ki....."

regards

सुभाष चन्द्र ने कहा…

रचना अच्छी है.. लगे रहिये बंधू

आशीष कुमार 'अंशु' ने कहा…

Sundar kavita...

G M Rajesh ने कहा…

sameer bhai
vaise to khataa jataane ko khataane ka upyog kiya hai

khataane ka matlab bahi-khate me likh dene ko bhi kahte hain