गुरुवार, 9 अप्रैल 2009

पानी और बिजली


पानी और बिजली, यह किसी फ़िल्म का टाइटल होने जैसा है। मगर सच तो यह है की यह जिंदगी के धरातल का अहम् हिस्सा है। पानी और बिजली सनातन सच है। बारिश के दौर में पानी के साथ बिजली को हमने सदियों से महसूस किया है। हम भूल गए हैं कि पानी और बिजली एक दूसरे के पूरक है।
पानी की जरूरत को आज घर-घर में बिजली का उपयोग कर सुविधाजन्य बनाया गया है। खेती किसानी में बिजली और पानी का सच भी हम जानते है। आज जो पैदावार किसान ले रहा है उसमे बिजली का बड़ा योगदान है इससे भी सभी वाकिफ है। किसान ने बिजली का दोहन किया और भूमिगत जल की बड़ी संगृहीत राशि को खाली कर दिया अब सतह पर और वर्षाजल के भरोसे रहा नही जा सकता। नदी तालाब और यहाँ तक कि उद्गम स्थलों तक पर इंसान ने अपना प्रभुत्व कायम कर डाला है। वोटों और नोटों की खातिर हम प्राकृतिक पर्यावास को ध्वस्त कर चुके है।
अब बिजली का संकट खडा है तो उसकी वजह है पानी का नदियों में ना होना। जब बिजली होती है तो सारा पानी सोख डालने का जतन होता रहता है। सिंचाई विभाग का दायित्व होता है कि वो पानी उपलब्ध कराये। कितना और कैसे इससे हमारा कोई वास्ता नही होता ।
अब बीते दिनों कि बात ले एक किसान मेरे पास आए और बोले : भैया बैंक से कर्ज दिला दो ।
मैंने पूछा : भाई क्यो?
उसने बताया : एक ट्यूबवेल खोदना है।
आपके पास जमीन कितनी है तो बताया : १२ बीघा
क्या कुआ है ? मैंने पूछा
हाँ है मगर पानी नही है
कोई ट्यूबवेल खोदा था ?
हाँ ४०० फुट का होल गिराया था ।
तो फ़िर अब नया होल क्यों ?
आस पास में ७०० से १००० फुट खोदा जा चुका है तो मेरे होल में पानी पूरा नही पड़ता
७०० से अधिक खोदे पर तुम्हे पानी मिल जायेगा ?
उम्मीद है , निश्चित नही कह सकता ।
अभी तक जो कुआ है उसका क्या इस्तेमाल करते हो?
वह बोला : ट्यूबवेल का पानी निकाल कर पहले इसमे भरता हूँ फ़िर कुए में इकट्ठा हुआ पानी खेत में लगाता हूँ ।
मैंने सोचा मामला गंभीर है बिजली का बेवजह दो बार उपयोग हो रहा है तो मैंने कहा : एक पानी कि टंकी क्यो नही लगाते बिजली बचेगी ? जतन करना। कुए में पानी बनाए रखने का उसे बंद मत कर देना ।
कहा : अगर कोई योजना हो तो बताओ , टंकी लगा लूंगा।
सोचा पानी का दोहन करेगा किसान, बिजली का दुरुपयोग भी मगर सुविधा के लिए शासन कि योजना चाहिए ।
मैंने कहा : बिजली का बिल जो भरते हो उतनी बचत से तुम्हारी टंकी कि लागत निकल जायेगी और बिजली का दुबारा उपयोग बेवजह नही होगा थोडा सोचो इस बारे में ।
उसने कहा भैया , आपके पास लोन के चक्कर में आया था ये क्या बताने लगे ?मैंने कहा : अगर आपको मेरी बात भली से समझ में आ जाए तो जमीन की गहराई में उतरने से बच जाओगे
वो बोला : कहते तो आप बराबर है मगर मेरे अकेले के बूते तो यह होगा नही ? अकेला चना भी कभी भाड फोड़ सकता है क्या ?
मैंने कहा : आप वो चना बने जो उगेगा और अनेक चने पैदा करेगा फ़िर भाड़ फूटने में देर क्या ?
वो खुशी खुशी गया , क़र्ज़ का भूत उतार कर ।
कह गया पानी बचाना ही बढाना है। आपने बिजली बचाने की जुगाड़ दे दी है तो बिजली भी बढ़ ही जायेगी।

1 टिप्पणी:

kumar Dheeraj ने कहा…

राजेश जी बिल्कुल सही बात कही है आपने लेकिन जिन्दगी की आंम जरूरतो के सामने बुनियादी जरूरते खत्म होती जा रही है । जबकि लोगो को बिजली औऱ पानी की अहमियत का पता है । खासकर महानगर या शहरों में रहनेवाले लोग तो अच्छी तरह जानते है । शुक्रिया