गुरुवार, 2 अप्रैल 2009

ये जो है जिंदगी

दुनिया के हर कोने पर घूमा
मगर देखा न एसा नज़ारा
नई सोच है
नई उमंग भी
प्यासा खरीदे पानी
ये जो है जिन्दगी

4 टिप्‍पणियां:

अबरार अहमद ने कहा…

बहुत सुंदर तस्वीर। जिंदगी के सच को बयान करती हुई। बेहद उम्दा।।

Santhosh ने कहा…

पड़कर बहुत खुशी हुई / मे ये जानलेना चाहता हू कि, कौनसी टूल उसे करके आपने हिन्दी टाइप करते हे ? रीसेंट्ली मे यूज़र फ्रेंड्ली टाइपिंग टूल केलिए सर्च कर रहा ता, तो मूज़े मिला " क्विलपॅड ". ये तो 9 भाषा मे उपलाबद हे और इस मे तो रिच टेक्स्ट एडिटर भी हे / आप इसिक इस्तीमाल करते हे क्या...?

सुना हे की " क्विलपॅड " गूगले से भी अच्छी टूल हे..? गूगल इंडिक मे तो 5 भाषा उपलब्ड़ा हे और उसमे तो रिच टेक्स्ट एडिटर भी नही / ये दोनो मे कौंसिवाली यूज़र फ्रेंड्ली हे...?

संगीता पुरी ने कहा…

क्‍या कहा जाए ?

G M Rajesh ने कहा…

van vihaar bhopal ke jaanvar ko ahaar dene ke liye god denaa chaalu kar diyaa gayaa hai jo isi shrankhlaa ka ang hai