मंगलवार, 12 मई 2009

दृष्य ने बढ़ाई हसरत


हमारे जमाने बदलती राह के हैं
पथिक कहाँ गुजरते थे ,ये कल की बात है
आज तो आवाजाही कुछ ऐसी है बंधू के
सड़क पर चल पाना अब साहसिक बात है
दृष्य ने बढ़ा दी हसरत दिल में मेरे
कोई रास्ता बन दे इस तरह , वजह नही बेबात है

3 टिप्‍पणियां:

विनीता यशस्वी ने कहा…

दृष्य ने बढ़ा दी हसरत दिल में मेरे
कोई रास्ता बन दे इस तरह , वजह नही बेबात है

good lines and nice picture...

Udan Tashtari ने कहा…

अच्छी रचना.

Harkirat Haqeer ने कहा…

हमारे जमाने बदलती राह के हैं
पथिक कहाँ गुजरते थे ,ये कल की बात है
आज तो आवाजाही कुछ ऐसी है बंधू के
सड़क पर चल पाना अब साहसिक बात है
दृष्य ने बढ़ा दी हसरत दिल में मेरे
कोई रास्ता बन दे इस तरह , वजह नही बेबात है

बहुत खूब......!!