बुधवार, 29 जुलाई 2009

कागज़ की कला







आज मैंने एक सुन्दरता से परिपूर्ण कला का ई-मेल पाया तो सोचा सबको दिखा दूँ ।

रविवार, 26 जुलाई 2009

शनिवार, 25 जुलाई 2009

पञ्च तत्व

धरती जल वायु
आकाश

अग्नि

बुधवार, 22 जुलाई 2009

रविवार, 19 जुलाई 2009

टोटल सोलर एक्लिप्स

कहते है सूर्य ग्रहण का प्रभाव प्रत्येक प्राणी पर पड़ता है।
आप इस बेला में इस बात के मद्देनजर अपने घरों में पाले गए पशु पक्षियों पर नजर रख कर साक्षी बने ।
जिन स्थानों पर पूर्ण सूर्य ग्रहण लागू हो रहा है वहां टिटिहरी, गिलहरी जैसे प्राणियों पर भी नजर रखे और गौर करें कि क्या वाकई पुराना मत सही है ?
यदि कोई उल्लेखनीय बात हो तो बताना न भूले ।

शुक्रवार, 10 जुलाई 2009

वृक्ष

एक दिल वृक्ष का
और दूजा हमारा
वो टूट कर भी दो बन जाता
रहता फ़िर भी प्यार बाँटता
आओ रक्षा सूत्र बांधें इसे
इस की निराली अदा पर


आबाद करेगा प्यार हमारा
लदा कर प्रेम

बुधवार, 8 जुलाई 2009

हेल्लो भिया ..... बाँध दी है .... हाँ आकर देख लो




बिल्ली के गले में घूँघरू वाली घंटी और नही तो क्या ?
कहावत झूठी भी तो करनी जो थी

सेवा धाम आश्रम का दौरा

कल भोपाल में सूर्य ग्रहण से सम्बंधित बैठक का आयोजन बरकतुल्ला यूनिवर्सिटी में मध्य प्रदेश की शिक्षा मंत्री महोदया अर्चना जी चिटनीस जी की अध्यक्षता में हुआ जिसमे राज ज्योतिष पंडित बाबुलालजी जोशी जी के साथ रतलाम से जाना हुआ ।
बैठक के पूर्व मध्य प्रदेश गौसेवा आयोग अध्यक्ष श्री मेघराज जी जैन साहेब जी के घर सौजन्य भेंट थी । उज्जैन के सेवा धाम आश्रम के संचालक सुधीर भाई गोयल जिन्हें सभी भाईजी के नाम से पुकारते हैं की मुलाक़ात यहीं हुई । सूर्य ग्रहण का असर विभिन्न प्राणियों पर किस तरह पड़ता है इसकी चर्चा चली और परिचय का दौर और साथ ही समाज सेवा के बारे में भी काफ़ी कुछ ।
सुधीर भाई ने सेवा धाम आश्रम आने का न्योता दिया तो उन्हें वापसी में लौट कर जाते वक्त मिलने को तथा प्रकल्प देखने जाने की बात का संकल्प बता दिया ।
सेवा धाम के बोर्ड के समीप से अपनी अल्टो निकालते हुए ग्राम अम्बोदिया होकर सेवा धाम पहुंचे । सेवा संकल्पों के प्रति लगन और उत्साह का मनोबल जो शब्दों में ठीक प्रकार व्यक्त नही हो पा रहा था , यहाँ देख कर सुकून मिला । रतलाम की सड़कों पर घिसट कर चलते व्यक्ति को यहाँ पाया जो अब यहाँ का अन्तःवासी बन चुक्का है तो समाधान रहा की सेवा वाकई सेवा है। यहाँ ३५० करीब विभिन्न तरह के लोग निवास कर रहे और सम्पूर्ण उपचार के साथ अपना जीवन जी रहे है ।
समाज से निकाले , अनुपयोगी , बिमारियों से ग्रसित, पागल और विकलांग लोगों के प्रति सेवा और उसका पूर्ण मनोयोग से आश्रम में घर की तरह व्यवस्थापूर्ण पालन संतोषप्रद था

भाई सुधिरजी के इस सेवानिष्ठ प्रकल्प को साधुवाद ......

हमारे मन के किसी कोने के संकल्प को साकार रूप में देख पाना । अपने प्रयास जो पूर्ण नही हो पायें हों । अपनी मर्यादित क्षेत्र एवं भूमिका को किसी भी माध्यम से होता देख पाना ईश्वर का आर्शीवाद ही तो है...

भाई सुधीर जी कर पा रहें हैं कई कठीनाईयों के बावजूद, ये उनका ढाढस और भावनाओं की ऊंचाईयां ही तो हुई ना

शनिवार, 4 जुलाई 2009

कर रहे हम......, आप अपनी कहो....

चुन चुन कर लाये पत्तों से बसा रहे घर अपना
हरियाली की गोद में आशियाने का सपना

कर रहे हम अपनी दुनिया आबाद
खतरों से लबरेज हमारा आज
कल को होगा क्या ? फिकर किसे ?
भगवन से दुआ इंसान न डसे
रंग निराला धरती का निखरा
सुनहरा पल चारो तरफ़ है बिखरा
बया कह गई बात अपनी
आप भी कह चलो अपनी

समीर जी की बेनामी बाबा को समर्पित


गुरुवार, 2 जुलाई 2009

क्या बात है .........

हसीं वादियों में
एक चेहरा
थामकर सोचा
बन सकूँ जो इस जैसा
आख़िर बन गए
हम एक मॉडल
पर हाय री किस्मत
टीका न सके
परिन्दा हाथो पर
इस जैसा