शुक्रवार, 10 जुलाई 2009

वृक्ष

एक दिल वृक्ष का
और दूजा हमारा
वो टूट कर भी दो बन जाता
रहता फ़िर भी प्यार बाँटता
आओ रक्षा सूत्र बांधें इसे
इस की निराली अदा पर


आबाद करेगा प्यार हमारा
लदा कर प्रेम

5 टिप्‍पणियां:

आशुतोष दुबे "सादिक" ने कहा…

बहुत सुन्दर चित्र हैं.

हिन्दीकुंज

Nirmla Kapila ने कहा…

ितने शानदार बृक्ष कहाँ से खोज लाये या तो बनावटी हैं या फिर खुदा के घर मे होंगे अच्छा है नहीं तो आदमी इन्हें कहाँ छोडता सुन्दर पोस्ट

hem pandey ने कहा…

ये तो नकली वृक्ष हैं.

आशुतोष दुबे "सादिक" ने कहा…

bahut sundar

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत सुंदर चित्र ओर उस से भी सुंदर आप के शब्द
धन्यवाद