शुक्रवार, 28 अगस्त 2009

बुधवार, 26 अगस्त 2009

बचपन







सोमवार, 24 अगस्त 2009

शनिवार, 15 अगस्त 2009

स्वतन्त्रता दिवस की शुभ कामनाएं

स्वतंत्रता दिवस की शुभ कामनाएँ


नेहरूजी लॉर्ड माउन्टबटन से शपथ लेते हुए
१५ अगस्त 1947

गुरुवार, 13 अगस्त 2009

स्वाईन फ्लू का जनम कैसे और कहाँ


प्रेम सभी से करना चाहिए ये सीख हमें मिली है



मगर किस सीमा तक ? ये उन्हें पता नही





अब लीजिये अमेरिकन लोगो को उन्होंने हद पार कर दी
और अब हम भुगत रहे हैं स्वाईन फ्लू

साहचर्य और प्रेम




शनिवार, 8 अगस्त 2009

शुक्रवार, 7 अगस्त 2009

सोमवार, 3 अगस्त 2009

सूर्य ग्रहण के बारे में वृहत-संहिता के राहुचार से


आभिरांशबरांसपल्हावान्मल्लान्मत्स्यकुरुन्शकानपि
पान्चालान्यिकलाम्श्चपीडयत्यन्नम्वापिनिहन्तिकर्कटे ॥ ३८ ॥

अर्थ : कर्क राशि में सूर्य ग्रहण होने पर आभीर यानी गवली , शबर यानी भील , पल्हव यानी पारसी , मल्ल यानी योद्धा , मत्स्य , कुरु , शक तथा पांचाल देश के निवासी , अंगहीन लोग पीड़ा भोगते हैं । इसी तरह धान्य का नाश भी होता है ।

आषाढ़पर्वन्युदपानवप्रनादीप्रवाहान्फलमूलवार्तान
गांधारकाश्मीरपुलिंदचीनान्हतान्वदेन्मंडलवर्षमस्मिन ॥ ७७॥

अर्थ : अषाढ़ माह में ग्रहण होने पर जलाधार तथा उनके तट नदियों के प्रवाह फल मूल आदि पर जीविका करने वाले,
गांधार,कश्मीर,पुलिंद , चीन इन देशों के लोग नाश को प्राप्त होते हैं । वर्षा भी थोडी थोडी होती है ।

काश्मीरांसपुलिन्द्चीनयवनान्ह्न्यात्कुरुक्षेत्रकान्गान्धारान्पिमध्यदेशसहितान्दृश्तोग्रहःश्रावणे
कांबोजेकश्फामश्चशारदमपित्यत्त्कायथोक्तानीमांअन्यत्रप्रचुरान्नत्दृष्टमनुजैर्धात्रीम्कारोत्यावृताम ॥ ७८ ॥
अर्थ : श्रावण मास में ग्रहण होने पर कश्मीर,पुलिंद , चीन कश्मीर,पुलिंद , चीन, यवन ,कुरुक्षेत्र , गांधार, मध्य देश के लोग काम्बोज देश के लोग , एकशफ यानी गधे आदि , शरद ऋतू का धान्य इन सभी का नाश होता है । इन सभी बताये गए स्थानों के अतिरिक्त बाकि स्थानों पर बहुतायत में धान्य होता है और लोग आनंद पूर्वक रहते हैं ।

पूर्वेणप्रग्रहनामकृत्वाप्रागेवचापसर्पेत
संछ्दनमितितत्ख्शेम्सस्यहार्दिप्रदम्जगतः ॥ ८७ ॥
अर्थ : पूर्व दिशा से लेकर पूर्व दिशा में ही ग्रहण लगकर मोक्ष हो जाता है तो
सम्छर्दनसंज्ञक मोक्ष कहलाता है
यह कल्याणकारी होकर धान्य , संतोष प्रदान करता है
अर्कग्राहात्तुशशिनोग्रहणंयदिदृश्यतेततोविभ्राः
नैकरुतुफ़लभाजोभवन्तिमुदितः प्रजाश्चैव ॥ ९८ ॥
अर्थ : सूर्य ग्रहण के बाद प्रन्द्रह दिन के अन्तर से यदि चंद्र ग्रहण होता है तो सभी लोग आनंदित होते है ।