सोमवार, 3 अगस्त 2009

सूर्य ग्रहण के बारे में वृहत-संहिता के राहुचार से


आभिरांशबरांसपल्हावान्मल्लान्मत्स्यकुरुन्शकानपि
पान्चालान्यिकलाम्श्चपीडयत्यन्नम्वापिनिहन्तिकर्कटे ॥ ३८ ॥

अर्थ : कर्क राशि में सूर्य ग्रहण होने पर आभीर यानी गवली , शबर यानी भील , पल्हव यानी पारसी , मल्ल यानी योद्धा , मत्स्य , कुरु , शक तथा पांचाल देश के निवासी , अंगहीन लोग पीड़ा भोगते हैं । इसी तरह धान्य का नाश भी होता है ।

आषाढ़पर्वन्युदपानवप्रनादीप्रवाहान्फलमूलवार्तान
गांधारकाश्मीरपुलिंदचीनान्हतान्वदेन्मंडलवर्षमस्मिन ॥ ७७॥

अर्थ : अषाढ़ माह में ग्रहण होने पर जलाधार तथा उनके तट नदियों के प्रवाह फल मूल आदि पर जीविका करने वाले,
गांधार,कश्मीर,पुलिंद , चीन इन देशों के लोग नाश को प्राप्त होते हैं । वर्षा भी थोडी थोडी होती है ।

काश्मीरांसपुलिन्द्चीनयवनान्ह्न्यात्कुरुक्षेत्रकान्गान्धारान्पिमध्यदेशसहितान्दृश्तोग्रहःश्रावणे
कांबोजेकश्फामश्चशारदमपित्यत्त्कायथोक्तानीमांअन्यत्रप्रचुरान्नत्दृष्टमनुजैर्धात्रीम्कारोत्यावृताम ॥ ७८ ॥
अर्थ : श्रावण मास में ग्रहण होने पर कश्मीर,पुलिंद , चीन कश्मीर,पुलिंद , चीन, यवन ,कुरुक्षेत्र , गांधार, मध्य देश के लोग काम्बोज देश के लोग , एकशफ यानी गधे आदि , शरद ऋतू का धान्य इन सभी का नाश होता है । इन सभी बताये गए स्थानों के अतिरिक्त बाकि स्थानों पर बहुतायत में धान्य होता है और लोग आनंद पूर्वक रहते हैं ।

पूर्वेणप्रग्रहनामकृत्वाप्रागेवचापसर्पेत
संछ्दनमितितत्ख्शेम्सस्यहार्दिप्रदम्जगतः ॥ ८७ ॥
अर्थ : पूर्व दिशा से लेकर पूर्व दिशा में ही ग्रहण लगकर मोक्ष हो जाता है तो
सम्छर्दनसंज्ञक मोक्ष कहलाता है
यह कल्याणकारी होकर धान्य , संतोष प्रदान करता है
अर्कग्राहात्तुशशिनोग्रहणंयदिदृश्यतेततोविभ्राः
नैकरुतुफ़लभाजोभवन्तिमुदितः प्रजाश्चैव ॥ ९८ ॥
अर्थ : सूर्य ग्रहण के बाद प्रन्द्रह दिन के अन्तर से यदि चंद्र ग्रहण होता है तो सभी लोग आनंदित होते है ।

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