बुधवार, 14 अक्तूबर 2009

थम गया दिया भी तो

दीपावली फ़िर आई
सबके मन में बहार लाई
पर कुछ बदनसीबों में हम शामिल रहे बाबा
जिनके दिए की रौनक आप के होने से थम गई

बरसी आपकी याद ले आई वे दिन
वो रंगों के डिब्बे
वो बच्चों के लिए फुलझडीयाँ
मिठाईयाँ और मेवे

सब कुछ वैसा ही है मगर
जो नही है
वो है आप
सिर्फ़ आप ..... "बाबा "

श्रद्घा सुमन ......... १९ को भाई दूज पर अब उज्जैन में आपके निमित्त सभी मिलेंगे , एक गमी के साथ


1 टिप्पणी:

राज भाटिय़ा ने कहा…

भाई तुम अकेले नही इस दुनिया मै ओर भी बहुत है आप जेसे... बस दिल मजबुत करो ओर समय के संग संग रहना सीखॊ... जिन्हे हम कहते है कि वो यहां नही, अरे सब यही है हमारे दिलो मे, ज्यादा दुखी हो कर उन्हे भी दुख मत पहुचाओ, वो आप को सुखी दे कर खुश होते है ओर दुखी देख कर दुखी.
अब समभलो.
धन्यवाद