शुक्रवार, 27 नवंबर 2009

विचार करें

कैमेरून में जीवन यापन की यह पद्धति है ।
भारतीय जन मानस को यह कदापि अच्छी नही लगेगी ।
हम क्या कर सकते हैं ? विचार करें .......

मंगलवार, 24 नवंबर 2009

जवानी

आज देखो मैं जवान हो गया
मुझे देख ज़माना हैरान हो गया


बीयर के ड्रम से छोटा मकान हो गया
अरे वाह मैं जवान हो गया
हुई बोतलें खाली
बिक गई घोडा गाड़ी
किस खूबसूरती से पैगाम हो गया
अजी क्या कहे,
मैं जवान जो हो गया



फ़िर लगाए खेतों पर अंगूर मैंने
वाह जी कमाल हो गया
अंगूर की बेटी के रहमो-करम से
मैं फ़िर मालामाल हो गया

ये सब करते कराते
कहूँ क्या ?
आज मेरा बेटा
खेलते कूदते जवान जो हो गया

वो मुझसे चार कदम आगे निकला

अंगूर की बेटी का गुलाम जो हो गया

याद करें अपना बचपन

दौड़ती नदिया थी
बहता पानी था
क्या खूब घोड़े
और मस्ताना तांगा था

मम्मी के साथ जाते थे
नदी किनारे जब
खोल के कपडे
नहाने से पहले
देखो यही करते थे न सब ?
अब बदल गई है पावन नदिया
घोड़े बदले गाडी में
टी वी देख दिन गुजारते
पैसे के ठाठ हैं अब
बेहतर कहते जिंदगी इसको
सब कुछ चलता पैसे से
ख़तम हो गया बचपन अब तो
स्कूलों के ठेलम पेले में

मंगलवार, 17 नवंबर 2009

thaughts

1 tree makes 1 Lakh matchsticks।

But 1 matchstick can burn 1 Lakh trees।

Similarly 1 negative thought or doubt can burn thousands ofdreams....!!

Think Positive !!!

चेहरे की हसी से हर गम छुपाओ,बहुत कुछ बोलो पर कुछ न बताओ ।

ख़ुद न रूठो कभी, पर सबको मनाओ ये राज़ है ज़िन्दगी का, बस जीते चले जाओ

वाह प्रभु क्या लीला तेरी:चूहे बिल्ली से डरते है,बिल्ली कुत्ते से डरती है ,कुत्ता आदमी से डरता है ,आदमी बीवी से डरता है ,बीवी चुहे से डरती है ।

दोस्ताना अंदाज़ में मुझ से किसी ने पूछा ,तुम सबको email भेझते हो ? तुम्हे क्या मिलता है ?मैंने हस कर कहा, देना लेना तो व्यापार है ,जो देकर कुछ न मांगे, वो ही तो प्यार है ।

एक दिन सागर ने नदी से पूछा:कब तक मिलाती रहोगी मुझे खारे पानी से ???नदी ने हसकर कहा :जब तक तुझ में मिठास न आ जाये तब तक !!!

जीवन में कामयाब होने के लिए 3 factory लगाओ !!!!1) दिमाग में Ice factory.2) जुबान पर Sugar factory.3) दिल में Love factory. फिर life होगी SATISFACTORY

सोमवार, 16 नवंबर 2009

सोमवार, 9 नवंबर 2009

क्या आपका दिमाग कुछ पुराना ढूंढ सका ?




जिन खोजा तिन पाईयां


गहरे पानी पैठ


पंक्तियाँ याद आई


फ़िर याद आया बचपन


लेकिन धर्म की बात छोडें तो


एक किस्सा याद आया


हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई सभी ने


सुनी यही कहानी थी


याद करो इन्हे देख


ये बड़ी मस्तानी थी


खरगोश और कछुए से हमने


सीखी नैतिकता सुहानी थी


ये बड़े पुराने हैं बंधू


आज यही बात बतानी थी


रविवार, 8 नवंबर 2009

मेरी सूर्य परिक्रमा, ग्रहण के दौर में

२२ जुलाई २००९ को हरियाली अमावस के दिन पूर्ण सूर्य ग्रहण का दौर रहा । इस दौर में की गई अपनी गतिविधियों के छाया चित्र लगा रहा हूँ .......

पहले चित्र में "पूर्ण सूर्य ग्रहण विक्रम संवत २०६६ स्मरणिका" लोकार्पण करते हुए दिगंबर जैन संत परमपूज्य बालाचार्य १०८ श्री योगीन्द्र सागर जी महाराज सा एवं अतिथि नजर आ रहे है ।

इस भव्य समारोह के मुख्य अतिथि म प्र वन विकास निगम अध्यक्ष गुरुप्रसाद शर्मा थे अध्यक्षता जिला पुलिस अधीक्षक वेदप्रकाश शर्मा जी ने की । अन्तरिक्ष विज्ञानी प्रो ग्वाल एवं पूर्व कुलपति रानी दुर्गावती विश्व विद्यालय प्रोफेसर सुरेश्वर शर्मा कार्यक्रम के मुख्यवक्ता थे । दिगंबर जैन संत बालाचार्य जी की निश्रा में उक्त कार्यक्रम संपन्न हुआ । नगर विधायक पारस सखलेचा एवं नगर महापौर श्रीमी आशा मोर्य का विशिष्ट आतिथ्य इसमे समाहित था ।
राज ज्योतिष पं बाबूलाल जोशी इस गतिविधि के परिकल्पक एवं सूत्रधार थे ।

दुसरे चित्र में अनुसंधानात्मक गतिविधि एवं अनुसंधानात्मक लेख के प्रति सम्मान प्राप्त करते हुए मैं स्वयं , इस स्मरणिका का सह सम्पादन मैंने ही किया है ।



नगर के वरिष्ठ साहित्यकार श्री सत्यनारायण भटनागर अपने लेख का सम्मान पाते हुए



बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी भोपाल की गतिविधि में जिसमे सूर्य ग्रहण के बारे में मध्य प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा मंत्री अर्चना चिटनीस कार्य क्रम की मुख्य अतिथि थी के साथ दुसरे चित्र में दाए से तीसरे स्थान पर मैं स्वयं ।

शनिवार, 7 नवंबर 2009

ये दोस्ती


दोस्ती भी नायाब तोहफा है
इसमे चाहे जितनी वफ़ा है ।
रंग निराले , खेल निराले हैं
अदाएं प्यारी, मेल निराले हैं ।
खाबों और चाहतों के झमेले हैं अनेक
रहते फ़िर भी सब एक