शनिवार, 7 नवंबर 2009

ये दोस्ती


दोस्ती भी नायाब तोहफा है
इसमे चाहे जितनी वफ़ा है ।
रंग निराले , खेल निराले हैं
अदाएं प्यारी, मेल निराले हैं ।
खाबों और चाहतों के झमेले हैं अनेक
रहते फ़िर भी सब एक

2 टिप्‍पणियां:

Dr. Smt. ajit gupta ने कहा…

लघु कविता सशक्‍त है। बस सच्‍चे दोस्‍त ही नहीं मिलते।

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत सुंदर