रविवार, 6 दिसंबर 2009

मोरनी और मेरा जंगल

मोरनी मेरी

और मेरा ही जंगल

क्या खुबसूरत

है ये दंगल

कुछ सोचो करो

होगा तभी मंगल

नहा रहा बचपन ही देखो


एक बिनती अब तो सोचो


1 टिप्पणी:

seema gupta ने कहा…

dnt knw wt to say........disapearing chilhood really gives pain..

regarsd