मंगलवार, 29 दिसंबर 2009

यमराज नहीं लिखते अब मौत का तरीका .... यह कुछ और ही है

रेलवे ट्रेक पर मौत


3 टिप्‍पणियां:

seema gupta ने कहा…

very painful...

regards

परमजीत बाली ने कहा…

बहुत कुछ कह रही है तस्वीरे....

Udan Tashtari ने कहा…

यह भी विलुप्त होती प्रजाती है.


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यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि आप हिंदी में सार्थक लेखन कर रहे हैं।

हिन्दी के प्रसार एवं प्रचार में आपका योगदान सराहनीय है.

मेरी शुभकामनाएँ आपके साथ हैं.

नववर्ष में संकल्प लें कि आप नए लोगों को जोड़ेंगे एवं पुरानों को प्रोत्साहित करेंगे - यही हिंदी की सच्ची सेवा है।

निवेदन है कि नए लोगों को जोड़ें एवं पुरानों को प्रोत्साहित करें - यही हिंदी की सच्ची सेवा है।

वर्ष २०१० मे हर माह एक नया हिंदी चिट्ठा किसी नए व्यक्ति से भी शुरू करवाएँ और हिंदी चिट्ठों की संख्या बढ़ाने और विविधता प्रदान करने में योगदान करें।

आपका साधुवाद!!

नववर्ष की अनेक शुभकामनाएँ!

समीर लाल
उड़न तश्तरी