मंगलवार, 5 जनवरी 2010

सर्दी ये कैसी हाय



बर्फ जम गयी चेहरे पर

छाई सफेदी है चहुँ ओर

कोई सुलगा दे आग कही

सर्दी बड़ी घन घोर


सूरज में चेहरा है खिल आया

रौशनी ने है चमकाया

बर्फ कि शीतलता ने नहलाया

पर कहते सर्दी ये कैसी हाय

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