बुधवार, 6 जनवरी 2010

आदमी का सर

एक दिन एक महान राजा अपनी सेना के साथ कहिन जा रहा था । उसे अचानक एक गरीब भिखारी दिखा । अपने घोड़े से उतरकरउसके सामने राजा ने सर झुकाया । आगे पड़ाव पर जब सेना थमी तो उसके मातहतों ने आपत्ति ली और कहा कि आप जैसे महान राजा को हर कहिन सर झुका देना ठीक बात नहीं है ।
राजा ने अगले कुछ दिनों बाद महल में पहुँच कर उन लोगों को बुलवाया जो आपत्ति दाखिल कर चुके थे । उन्होंने एक बकरे , एक घोड़े और एक आदमी का सर उन्हें दिया और उसे बेचकर आने को कहा और हिदायत दी कि किसी को जबरदस्ती बेचने कि कोशिश न करें ।
शाम को जब वे लौटे तो किसी ने भी वे खरीदे नहीं थे । राजा ने कहा अब कल इन्हें किसी को वैसे ही बिना मोल के भेंट कर आना । शाम को जब वे लौटे तो बकरे औए घोड़े के सर लोगों ने रख लिए थे मगर आदमी का सर मुफ्त दिए जाने के बाद भी कोई अपने पास रखने को तैयार नहीं था ।
राजा बोला उस दिन मैंने अपना सर एक भिखारी के सामने झुकाया था. क्या उसका मोल अब समझ पा रहे हो या नहीं ?

1 टिप्पणी:

निर्मला कपिला ने कहा…

बहुत सुन्दर बोध कथा धन्यवाद्