मंगलवार, 5 जनवरी 2010

अँगुलियों के पोरों पर

प्यारा ड्रेगन आया
मन में उल्लास छाया
हौले से मैंने उसे उठाया
बैठ अँगुलियों के पोरों पर मेरे
आग का गोला उसने जैसे ही बरसाया
गुम हो गया आखिर जीवन का अंधियारा

4 टिप्‍पणियां:

seema gupta ने कहा…

amezing.........

regards

निर्मला कपिला ने कहा…

वाह बहुत सुन्दर । तस्वीर भी सुन्दर है धन्यवाद्

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत सुंदर

Udan Tashtari ने कहा…

ह्म्म!! ड्रेगन!