शनिवार, 22 मई 2010

सोमवार, 17 मई 2010

एक यादगार दिन

कल इन्दोर में रोटरी की अस्सेम्बली में दिन बिताया ।
रोटरी अंतरराष्ट्रीय के अध्यक्ष के रूप में मिर्वाचित भारतीय मूल के वापी गुजरात के निवासी श्री कल्याण बेनर्जी इस असेम्बली के मुख्य अतिथि थे ।
श्रीमती बिनोटा जी के साथ उनसे मिलने का अवसर मिला ।
भारत के ऐसे बिरली शक्सियत जो सेवा के धरातल पर उभरे और 2०११ - १२ के सत्र में देश को गौरव प्रदान कर हमारी संस्कृति और सेवा के मूल्यों को स्थापित करेंगे , से मिलने का अवसर एक यादगार दिन के रूप में अंकित हुआ ।
डॉ नलिनी लंगर जो रोटरी मंडल ३०४० के लिए सत्र २०१०-११ की प्रथम महिला गवर्नर बनने जा रही है को इस अवसर पर अपना पदभार भी उन्होंने ग्रहण कराया ।
रोटरी अंतरराष्ट्रीय के डायरेक्टर रह चुके और भारत में जल कार्यों के लिए अपनी सेवाए लगातार दे रहे श्री सुशील गुप्ता जो पेशे से होटल व्यवसायी हैं से इस अवसर पर संवाद करने का अवसर भी यादगार रहा है ।

मंगलवार, 11 मई 2010

जाको राखे साईयाँ मार सके न कोय और अगर के मौत हो तो दूर जाकर भी होय







अभी जो द्रश्य आपने देखे यह अलग कहानी है

आगे जो बीती, वो कहानी पढ़ें

ऋषिकेश और हरिद्वार के बीच राजाजी नेशनल पार्क का एक हाथी सड़क पर आगया । आंध्र प्रदेश से जारहे कुम्भ यात्रियों की बस उसे सामने देख खड़ी कर दी गई । हाथी को पास आता देख चालाक ने बस पलटाई जो जैसे भी बस में चढ़ सका दौड़ कर जा चढ़ा । अधिक निकट जान कर बस को हाथी से दूर ले जाने की कोशिश में एक व्यक्ति नीचे ही रह गया । हाथी की सूंड में उस आदमी का पैर आ गया शायद दूसरा पैर हाथी के पैरों में जा उलझा और पल भर में दोनों पैरों के बीच से आदमी फाड़ दिया गया ।
मौत लिखी थी घर से दूर ऋषिकेश के समीप और यह व्यक्ति जा पहुंचा था वहां ।

शुक्रवार, 7 मई 2010

जल पुनर्भरण


पानी का मोल यहाँ है
जीवन का तोल यहाँ है
यहाँ है दुनिया की कीमत
ताकि दुनिया रहे सलामत
सोचो यारों अब तो तुम भी
होगा कमाल अब हर कहीं

रविवार, 2 मई 2010

धरती बचाओ

धरा को धरा है
प्रकृति ने


प्रकृति पर
बरपाया है
कहर
इंसान ने
अपनी वैज्ञानिक
समझ से
और सनझ
है के
धरती को बचाना है

शिखा प्रतिज्ञा

एक चाणक्य था जिसने शिखा प्रतिज्ञा ली। चन्द्रगुप्त के पैरों में कांटा क्या चुभा कंटीली झाड़ियों की जड़ों में मठा डालकर सुका डालने की जिद पकड़ ली। द्रौपदी ने जब तक बदला नहीं ले लिया गया केश नहीं बाँधे।
सत्ता परिवर्तन की उपरोक्त कहानियों की गर्त में संकल्प शक्ति का प्रभाव पेश हुआ है। चाणक्य हो या द्रोपादी ; बदले की आग में क्या कुछ हुआ हम सभी जानते हैं। आज कई संकल्प दिलाये जाते हैं जिनमे संविधान की रक्षा , एकता , सहिष्णुता , प्रेम आदि शामिल हैं। मगर पैसे कमाने का जो संकल्प नई पीढ़ी ने लिया है वह जबरदस्त है। पैसे की आपाधापी में लोकलाज, राष्ट्रधर्म, नैतिकता जैसी भावनाए गौण हो गयी हैं । अब रिश्वत कांड में पकडे जाने पर पैसे की भागमभाग साफ़ दिखाई देती है । कोई ग्लानी उनके द्वारा महसूस होती हो एसा नहीं लगता ।

मगर एक संकल्प जो बरसों से लेते रहने के बाद पूरा नहीं हो रहा है उसे जानकार असमंजस में हूँ ।

पर्यावरण की रक्षा का संकल्प हर साल शोर शराबे से तथा गर्मी की दिनों की तपन और पानी की कमी के दौर में प्रायः लिया जाता रहता है मगर ये पूरा नहीं होता । शायद हमारे सर पर शिखा नहीं और नहिलाओं ने चोटियाँ कटवा ली यह एक वजह हो सकती है संकल्प के पूरे न होने की ।

शनिवार, 1 मई 2010

सकोरे में स्नान



नेशनल जिओग्राफिक द्वारा प्रसारित