शनिवार, 31 जुलाई 2010

इंतज़ार है तुम्हारा

बैठे हैं तेरी राह में
लिए सपने हसीं हजार
अरे भाई बरसात है
नहीं कोई त्यौहार

आते ही दूंगा तुम्हे
इसलिए लिए बैठा हूँ फूल
इल्तजा है मेरी मुझे न जाना भूल

रविवार, 25 जुलाई 2010

सीढ़ी


मिली एक सीढ़ी तो सोच आप तक पहुंचा दू
मै चढ़ कर अकेला जाऊं यह ठीक नहीं , इंतज़ार है आपका

गुरुवार, 15 जुलाई 2010

बुधवार, 14 जुलाई 2010

आईये धरती बचाएँ : अज़हर हाशमी

बड़ी बड़ी बातों से
नहीं बचेगी धरती
वह बचेगी / छोटी छोटी कोशिशों से
मसलन
हम / नहीं फेंकें कचरा / इधर उधर
स्वच्छ रहेगी धरती
हम / नहीं खोदें गढ्डे / धरती पर
स्वस्थ रहेगी धरती
हम / नहीं होनें दें उत्सर्जित / विषैली गैसें
प्रदुषणमुक्त रहेगी धरती
हम / नहीं काटें जंगल
पानीदार रहेगी धरती
धरती को पानीदार बनाएँ
आईये धरती बचाएँ


मंगलवार, 13 जुलाई 2010

सोमवार, 12 जुलाई 2010

छुपे छुपे से







क्यों है न

शनिवार, 10 जुलाई 2010

सोमवार, 5 जुलाई 2010

हे भगवान् ये तेरी धरती को क्या हो गया ........


हे भगवन तेरी धरती को ये क्या हो गया
इंसान एसा बनाया
सारा जहां बर्बाद हो गया
दुआ करता हु तुझसे
कोई एसा भी हो
जिसने हो जहां बचाया