बुधवार, 14 जुलाई 2010

आईये धरती बचाएँ : अज़हर हाशमी

बड़ी बड़ी बातों से
नहीं बचेगी धरती
वह बचेगी / छोटी छोटी कोशिशों से
मसलन
हम / नहीं फेंकें कचरा / इधर उधर
स्वच्छ रहेगी धरती
हम / नहीं खोदें गढ्डे / धरती पर
स्वस्थ रहेगी धरती
हम / नहीं होनें दें उत्सर्जित / विषैली गैसें
प्रदुषणमुक्त रहेगी धरती
हम / नहीं काटें जंगल
पानीदार रहेगी धरती
धरती को पानीदार बनाएँ
आईये धरती बचाएँ


1 टिप्पणी:

राज भाटिय़ा ने कहा…

सब से ज्यादा गंदगी हमारे देशो मै है