रविवार, 25 जुलाई 2010

सीढ़ी


मिली एक सीढ़ी तो सोच आप तक पहुंचा दू
मै चढ़ कर अकेला जाऊं यह ठीक नहीं , इंतज़ार है आपका

4 टिप्‍पणियां:

संजय भास्कर ने कहा…

बेहद ख़ूबसूरत और उम्दा

Sheetal Teerth ने कहा…

wah sunder sidhi hai

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

सीढी अच्छी है । इसी नाम की मेरी एक कविता है शायद आपको अच्छी लगे ।

seema gupta ने कहा…

something amezing..

regards