मंगलवार, 31 अगस्त 2010

केदारेश्वर पर कुर्सिया लगवाई


शासन अपनी मर्यादाओं मे काम करता है जिसे स्वयं सेवी संगठन सहयोग कर शीघ्रता से पूरा करने मे मदद कर सकते हैं । पर्यावरण पर्यटन एवं धार्मिक महत्त्व के क्षेत्र केदारेश्वर मे बर्ड्स वाचिंग ग्रुप द्वारा किया गया कार्य सराहनीय तो है ही साथ ही यह पर्यावरण के प्रति अपनी सतत सेवाओं को समर्पण भी घोषित करता है । उक्त बात सैलाना के एस डी ऐम श्री बी एस कुशवाहा ने कही । वे बर्ड्स वाचिंग ग्रुप द्वारा आयोजित कार्यक्रम मे मुख्य अतिथि के रूप मे आमंत्रित थे ।रतलाम जिले के पर्यावरण एवं पिकनिक के लिए प्रसिद्ध धार्मिक केदारेश्वर तीर्थ क्षेत्र का सौन्दर्यीकरण, पहुँच मार्ग के सीमेंट से बन जाने के उपरान्त किया जा रहा है । बर्ड्स वाचिंग ग्रुप ने पहल करते हुए यहाँ गार्डन चेयर्स स्थापित करवाई है । बालाचार्य श्री योगीन्द्र सागरजी महाराज सा की निश्रा मे कैलाशवासी श्री विट्ठल राव साठे , वैकुंठवासी श्री मोहनराव घोटीकर की स्मृति मे तथा शीतल तीर्थधाम की व्यवस्थापिका डॉ सविता जैन , सोहैल खान जावरा , डी एस चोहान एवं श्री ऐम एल पडियार द्वारा प्रदत्त गार्डेन चेयर्स का लोकार्पण एस डी ऐम श्री बी एस कुशवाहा , एस डी ओ श्री अरुण कुमार जी जैन , भा ज पा के श्री बजरंग पुरोहित , अशोक पिपाड़ा के कर कमलो से किया गया ।सर्वश्री पद्माकर जी पागे, अशोक गंगवाल, दीपक बरैया रोटरी क्लब रतलाम सेंट्रल, पर्यावरण जाग्रति मंच, योगी सेवा समिति आदि संगठनो के अनेको सदस्य इस अवसर पर मौजूद थे। श्रावण के अंतिम सोमवार को उक्त कार्यक्रम महादेव भगवान् केदारेश्वर के अभिषेक पश्चात किया गया। कार्यक्रम का संचालन बर्ड्स वाचिंग ग्रुप के संस्थापक राजेश घोटीकर ने किया ।

रविवार, 29 अगस्त 2010

सोमवार, 23 अगस्त 2010

मशक मेन


आईये मनाये रक्षाबंधन ऐसे भी





ये सभी
प्रोडक्ट
है
कागज़ के बने
कागज़
बनता पेड़ों से
तो फिर........
क्यों न मनाए
रक्षाबंधन
इन्हें
रक्षा सूत्र
बाँध के
आपके भाई
आपकी रक्षा करें
इसकी
चाहत
होगी
मगर
ये बिना चाहत
आपकी
जीवन रक्षा
में रत
रहते
ही है
फिर ....
क्यों
भूलें
इन्हें
ये देते
सुंदर
प्रकृति भी

रविवार, 22 अगस्त 2010

बुधवार, 18 अगस्त 2010

मंगलवार, 17 अगस्त 2010

बारिश

बारिश के दिन आये

उमड़ घुमड़ कर आसमान में

काले कजरारे बादल छाए

लगे नाचने मोर

बच्चे करने लगे किलोल

प्रस्फुटित मौज स्वरों में वे चिल्लाए

खेत, क्यारियों

पर्वत घाटियों में

हरे हरे अंकुर हैं फूटे

सूखे पेड़ फिर लहलहाए

बारिश के दिन हैं आए ।

नदी , नालिया बह चली

सूखे कुओं में फूटी जलधाराए

बजने लगा टपा टपटप का संगीत

पशु पक्षी कन्दरा में धाए

जब लिया स्वरुप बाढ़ का

सारे प्राणी तब घबराए

भूस्खलन के दृश्य पहाड़ पर

ये अपने साथ ले आए

बारिश के दिन आये ।

कहते बड़े बुज़ुर्ग हमारे

मानसून के दिन हैं आए

समंदर से चले ये बादल

हिमगिरी से जा हैं टकराए

सब कुछ जब हो गया लबालब

तब ये बादल कहीं ऊँचे चढ़ जाए

सावन भादों में बरसकर

अश्विन से फिर गायब हो जाए

देकर समृद्धि धरती को जब वे जाए

कहते हम सब जन समवेत स्वरों में

बारिश के दिन थे आए।।

परियां और माँ की गोद



परियां कल्पनाये है
परिया मन की प्रेरणाए हैं
परियां सुखद संसार आश्वासनों का
परियों से जुडी हैं कपोल कल्पना
परियां आती है सपने में
होता सुन्दर हरदम परीलोक
वे देती उपहार अचरज का
वे हैं माध्यम मिलन का
परियों से जुदा है सब्जबाग़
दादी नानी की कहानी में वे हैं
वे करती दुखों को दूर हैं
सभी चाहते जाना परीलोक
वे चाहत हैं हम सबकी
आराम का ख़याल है उनके साथ महल सा
दृश्य खूबसूरत बाग़ सा
चमत्कार पूर्ण, असामान्य
निराली दुनिया ख्वाब ही ख्वाब
परियो से जुड़े हैं मिलनसारिता , सहयोग, सत्य और प्रेम
सुंदर हो कितना भी परीलोक
सुहाती है बस माँ की गोद

सोमवार, 16 अगस्त 2010

विनायक और गणेश की जन्म श्रुति वराह पुराण से

गणेश चतुर्थी प्रथमेश भगवान् गणपति की आराधना का पर्व है ,जिसे हम सभी भारत वासी श्रद्धा और प्रार्थना कार मनाते है । वराह पुराण में भगवान् गणेश की विघ्नहर, विनायक, गजास्य और भावपुत्र के रूप में उत्पत्ति का उल्लेख है । कथानक इस प्रकार है :
तप ही को धन मानने वाले ऋषियों के मार्ग में विघ्न आने लगे विघ्न निवारण के लिए वे भगवान् शंकर के पास गुत्थी सुलझाने की इच्छा लेकर पहुंचे ।

उन्होंने प्रार्थना कर कहा - " हे महादेव हम देवताओं से भिन्न असुरों के कार्य में ही विघ्न उत्पन्न करना आपके लिए उचित है , हमारे परोपकारी कार्यों में नहीं " ।

देवताओं के कहने पर भगवान् शंकर प्रसन्न हुए और निर्निमेष दृष्टी से भगवती उमा की और देखा । उन्हें विचार आया की पृथिवी , जल, तेज और वायु चक्षुगोचर होती है परन्तु आकाश की कोई मूर्ति नहीं दीखती ? ब्रह्मा जी के मुख से सुने शब्द याद आये की "शरीरधारियों की ही मूर्ति संभव है " और वे हंसने लगे । आकाश का शरीरधारी न होना के कारण इसकी मूर्ति असंभव है। फिर तो शंकर भगवान द्वारा पृथिवी , जल, तेज और वायु के सहयोग से एक अद्भुत कार्य संपन्न हो गया और उनकी हंसी थमने के पूर्व ही वहां उपश्थित समुदाय का समक्ष एक परम तेजस्वी देव कुमार प्रकट हो गया, उसका मुख तेज से चमक रहा था । सभी दिशाए इस तेज से चमकने लगी। भगवान् शिव के समस्त गुण उसमे सन्निहित थे । प्रकट होकर वह अपनी सस्मित दृष्टी , कान्ति, दीप्त मूर्तितथा रूप के कारण उपस्थित समस्त समुदाय को मोहित कर रहा था । उसका रूप बड़ा ही आकर्षक था ।
भगवती उमा उसे निर्निमेष दृष्टी से देखने लगी । माँ उमा की आँखें एकटक बालक को निहार रही देख कर भगवान् शंकर के मन में क्रोध का प्रादुर्भाव हो गया और उन्होंने शापित वाणी में कह दिया -" कुमार! तुम्हारा मुख हाथी के मुख सामान हो जाए और पेट लंबा भी । सर्प तुम्हारा यज्ञोपवित हो जाए । इतना कहने पर भी उनका क्रोध नहीं थमा जैसी जैसे क्रोध में उनका त्रिशूल धारी शरीर हिलता जाता रोम कुपो से तेजोमय जल के साथ अनेक विनायक उत्पन्न होते गए । उन सभी के मुख हाथी के मुख के समान और काले शरीर धारी थे । उनके हाथों में अनेक तरह

के अस्त्र थे । देवता सोचने लगे की हमारी अभिलाषा तो बालक के साथ ही पूरी हो गई थी मगर इसके चारों और ये गण कहाँ से आ गए ?

ब्रह्माजी विमान पर विराज मान होकर वहां आ पहुंचे और देवताओं से कहा की " देवताओं तुम धन्य हो तुमने त्रिनेत्री भगवान् रूद्र के कृपापात्र होकर असुरों के निकृष्ट कर्मो में विघ्न उत्पन्न करने वाले गणेश जी को प्रणाम करने सौभाग्य पाया।"
फिर वे भगवान् शंकर से बोले -" आपके द्वारा उत्पन्न यह जो बालक है इसे इन विनायकों का स्वामी बना दीजिए , यह मेरी प्रार्थना है। वर प्रभाव से आकाश को शरीरधारी बनने का और प्रथिवी आदि अन्य महाभूतो के साथ रहने का सुअवसर प्राप्त हो।" इससे एक ही आकाश अनेक विनायको के साथ व्यवस्थित हो जाए।" इस बात को सुनते ही समस्त विनायक वहां से चले गए । ब्रह्माजी ने कहा -" हे देव! आपके हाथ में समुचित अस्त्र है आप ये अस्त्र तथा वर इस बालक को दे देवे , यह मेरी प्रार्थना है । "
भगवान् शंकर तब उत्पन्न बालक गणेश से बोले -" क्रूर स्वभाव के ये सभी विनायक उग्र स्वभाव के हैं । पर ये सभी तुम्हारी सेवा करेंगे । देवताओं , यग्यदान आदि समस्त शुभ कार्यो में श्रेष्ठ स्थान तुम्हारा होगा । सर्व प्रथम पोजा पाने का अधिकार भी तुम्हारा होगा । एसा न होने पर उस कार्य की सफलता बाधित होगी । यह कहकर विभिन्न तीर्थ क्षेत्रो का जल लेकर भगवान् शिव ने उनका अभिषेक किया ।


देवताओं ने समस्त विघ्न शांत किये जाने की प्रार्थना की । अभिषेक और स्तुति के बाद वे माँ उमा के गोद में शोभा पाने लगे । यह सारी क्रिया चतुर्थी के दिन संपन्न हुई अतः तभी से यह तिथि सर्वश्रेष्ठ स्थान को प्राप्त हुई । इस कथा के पठन और श्रवण मात्र विघ्न कभी भी पास नहीं फटकते हैं ।

शनिवार, 14 अगस्त 2010

गुरुवार, 12 अगस्त 2010

क्या कहें ?

जाके भीतर दूर कहीं पानी में
ले तो आये परिंदे
सुन्दर लगता है फोटो भी
नजारा भी
मगर
क्या कहूँ
इंसान है
ये बचा भी सकता है
और खा भी
क्योंकि
सर्वाहारी है

उपवन ......





फोटो में आग भी लग रही खुबसूरत
जाने कैसे लगी?
जानता मैं नहीं मगर
अंदाजा है
यह लगी तो नहीं होगी
लगाई ही होगी
किसी सिरफिरे ने
मगर मशक्कत करना पड़ी होगी
बुझाने को
अब शायद
जमीं को इंतज़ार है?
किसी खरीदार का
जो जोतेगा
फिर उपजेगा
यहाँ भी अन्न
जो कभी था
उपरवाले का दिया
उपवन ....


मंगलवार, 10 अगस्त 2010

cancer

Dear All! I have forwarded it to the maximum I can। Let it reach the 110 crores Indians and the remaining if any. 'Imitinef Mercilet' is a medicine which cures blood cancer. Its available free of cost at "Adyar Cancer Institute in Chennai". Create Awareness.

From:
"sanat gangwal"

सोमवार, 9 अगस्त 2010

शुक्रवार, 6 अगस्त 2010


पानी का संवाद आप से

दुनिया भर से दिखा रहे
पानी का संकट
जतन कैसे कैसे
मगर हम हैं के मगरूर हैं




इंतज़ार आज भी है


बीत गई सदियाँ
सूने भये रास्ते
चिराग फिर फिर आये
और हम हैं के
इंतज़ार आज भी है

रविवार, 1 अगस्त 2010

UN Declares That Clean Drinking Water is a Human Right

News posted by: Natasha G. 1 day ago

अहिंसा की प्रेरणा, मांसाहारी देशों में