रविवार, 1 अगस्त 2010

अहिंसा की प्रेरणा, मांसाहारी देशों में


2 टिप्‍पणियां:

सुज्ञ ने कहा…

अहिसा का स्वर कहीं से भी उठ सकता है।
सारे मानवीय गुण मात्र भारतिय बपौती नहिं।
हमनें तो हिंसा बाहर से बुला के घर में बिठा रखी है।

राजेश जी,
सुन्दर जानकारी लाने के लिये धन्यवाद!

seema gupta ने कहा…

very well said...

regards