गुरुवार, 12 अगस्त 2010

उपवन ......





फोटो में आग भी लग रही खुबसूरत
जाने कैसे लगी?
जानता मैं नहीं मगर
अंदाजा है
यह लगी तो नहीं होगी
लगाई ही होगी
किसी सिरफिरे ने
मगर मशक्कत करना पड़ी होगी
बुझाने को
अब शायद
जमीं को इंतज़ार है?
किसी खरीदार का
जो जोतेगा
फिर उपजेगा
यहाँ भी अन्न
जो कभी था
उपरवाले का दिया
उपवन ....


कोई टिप्पणी नहीं: