शुक्रवार, 12 नवंबर 2010

रूबेला टीकाकरण : ब कलम - राजेश घोटीकर



रोटरी अंतरराष्ट्रीय मंडल ३०४० ने रूबेला टीकाकरण अभियान अपने हाथों में लिया है । रूबेला आखिर है क्या ? यह क्यों किसे और क्यों करवाना चाहिए जैसे विचार अब आपके जेहन में उमड़ पड़े होंगे । आईये इन बातों से रु ब रु हो जाए ?

२००३ में रतलाम पुलिस के साथ पंचायत और समाज कल्याण विभाग के सहयोग से मुझे यह शिविर लगवाने में कामयाबी के बाद जब सुना की हमारी मंडलाध्यक्ष श्रीमती नलिनी लंगर जी ने इस वैक्सीनेशन पर विचार किया है तो मैं सचमुच भीतर से आनादित हो गया ।

जैसा मेरा अनुभव है उसके अनुसार यह वेक्सिनेशन के लिए व्यवस्थाओं का सिलसिला आपको ,आपके क्लब को करना पड़ेगा इसी विचार से आपको आपको सूचित कर रहा हूँ ।

रूबेला क्या है? : रूबेला एक वायरस है । यह हमारे आसपास मौजूद हवा में ही होता है । संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आ जाने से भी यह फैलता है ।

टीकाकरण क्यों ? : जब आप छोटे बच्चे थे लगभग १२ से १५ महीने की आयु के तब आपको एम् एम् आर यानी मम्स मीज़ल्स और रूबेला का वेक्सीन लगाया गया था । आपने बड़े होकर अपने बच्चो को भी इसे लगवाया ही है । यह आपकी संक्रमण से प्रतिरोध क्षमता बढाने के लिए लगाया गया था । सामान्य तौर पर इस वायरस पर कोई ध्यान नहीं देता मगर चुपके से संक्रमित कर यह माँ बनने जा रही गर्भवती माँ के लिए बेहद घातक है । गर्भ गिर जाने से लेकर जन्मजात विकृति लिए पैदा होने वाले बच्चो का महत्वपूर्ण कारण है। जनम लेने वाली संतान में इसका प्रभाव विभिन्न विकृतियों को दिखाता है । आईये जाने जन्मजात विकृतियों को और यह भी की इसका संक्रमण किस तरह का होता है ।

जन्मजात विकृतियाँ

बहरापन ६० से ७५ %

ह्रदय सम्बन्धी खराबियां ४० से ५० %

आँखों की खराबिया ५० से ९० %

मानसिक बाधा २५ से ४० %

उपरोक्त चार्ट देखने भर से आप समाज गए होंगे किरूबेला का संक्रमण एक गर्भवती माता को हो जाना कितना घातक होता है। और इस संक्रमण से प्रभावित होकर जन्मे शिशु परिवार के लिए कितने परेशानी भरे हो सकते हैं ।

भारत में इस वायरस के संक्रमण कि दर ४० से ५० % अनुमानित है ।

अभी पिछले दिनों ट्रेन में चढ़ा तो सामने वाली सीट पर एक परिवार बेहद चंचल बच्चे के साथ चढ़ा । बच्चे को कोक्लियरलगा देख कर बहरेपन कि निशानी जानी । मेरे परिवार से जुडी डॉ गोखले कि पोती के बाद रतलाम से यह दुसरा बच्चा है जिसे कोक्लियर लगाया गया है । इसे लगवाना यानी ७ लाख रुपये के साथ प्रशिक्षण खर्च और प्रतिदिन ३० रुपये बेटरी पर खर्च , मायने रखता है जी । बातचीत में पता चला कि यह बच्चा बहरेपन के अतिरिक्त ह्रदय विकार से भी ग्रस्त है जिसके लिए रूबेला का संक्रमण ही दोषी है ।

रूबेला के लक्षण : रूबेला गंभीर जन्मजात विकृतिया देने के बावजूद कोई विशिस्ट लक्षण संक्रमण के दौरान प्रकट नहीं करता । चुपचाप अपना असर छोड़कर चला जाने वाला वायरस है । इसके संक्रमण से मरीज को हल्का साधारण सा बुखार होता है कभी कभी हलके लाल चकत्ते या रेशे भी दिखाई देते हैं । लगातार चिकत्सक कि निगरानी के बावजूद इसका इन्फेक्शन मालूम नहीं पड़ता ।

मातृत्व के दौरान विभिन्न समय में यह कैसे प्रभावित करता है इसे जाने यह ३से ११ सप्ताह के भीतर १००% , १२ वे सप्ताह में ८०% , १३ से १४ सप्ताह के दौरान ५४% , १४ से १६ सप्ताह में ३५% , २३ से २६ वे सप्ताह में २५% तक अपने संक्रमण से प्रभावित करता है ।

रूबेला संक्रमित व्यक्ति का उपचार संभव नहीं है इसीलिए इसका टीका यानी वेक्सीन सुरक्षा प्रदान करता है । एक बार टीका लगाने भर से १५ वर्ष तक सुरक्षा प्राप्त हो जाती है । तो ठीक ही किया न हमने कि टीकाकरण के बारे में सोच कर ।

वेक्सीन कब : जैसा पहले ही बताया कि १२ से १५ वे माह में एम् एम् आर से हमने अपने बच्चों कि प्रतिरोध क्षमता में वृद्धि की। योवानारम्भ के साथ यह टीका खासतौर पर कन्याओं को लगाए जाने की अनुशंसा चिकित्सा जगत करता है । यह स्वेच्छिक वेक्सीन है मगर इसके बारे में व्यापक जन जाग्रति नहीं है । अगर मै आपको नहीं बताता तो शायद आपको भी इतने विस्तार से जानकारी नहीं होगी । तो अब आप रोटरी का धन्यवाद करें मंडलाध्यक्ष जी का भी धन्यवाद करे क्योंकि आप अब समाजसेवा के एक नए स्वरुप के साक्षी होकर कुछ नया करने जा रहे हैं ।

अब नई समस्या की यह कैसे होगा? यानी वेक्सीन लगाने के लिए किस प्रकार की तैयारियां करना है आदि । चलिए उन्ही बिन्दुओं पर चर्चा करें ।

सबसे पहले आप ९ वी से कोलेज स्तर की छात्राओं को टार्गेट बना ले । किसी स्कूल या कोलेज में ही जाकर प्रशीक्षीत मेडिकल स्टाफ की निगरानी में यह काम कर पायेंगे यह ध्यान रखें । वातावरण में थोड़ी ठंडक आने का इंतज़ार करें । विद्यालय परिवार से संपर्क कर उनसे चर्चा करे । परिक्षा के नजदीक का समय छोड़ दें । फिर एक शिविर के माध्यम से बताए कीआखिर यह वेक्सीन क्यों लगवाया जा रहा है । शिविर में किसी को अपना मुख्य अतिथि बनाए और साथ ही चिकिसक जो उन्हें समज़ाए की इस वेक्सीन का उनके आगामी जीवन से कितना गहरा नाता है ।

इस दौरान जिन्हें ये टीके लगाना है उनके माता ओर पिता की इस बाबत सहमती भी लगेगी इसके लिए उन्हें एक फॉर्म दे देवे जिसमे टीका लगवाने वाले का नाम /उसके माता व् पिता का नाम /पता/ संपर्क के साथ यह घोषणा की वेक्सीन के बारे में उन्होंने समझ लिया है और वे अनुमति देते की यह टीका उनकी पुत्री को लगाया जाए । इसी पर्चे में वेक्सीन लगाए जाते वक्त यह फॉर्म लेकर आने तथा वेक्सीन कब और कहाँ लगाया जा सकेगा इसकी सूचना प्रिंट करा लें ।

जिलाधीश , सी एम् ओ , सिविल सर्जन को पत्र लिख कर सहयोग लेवे । प्रशीक्षीत नर्स की व्यवस्था के बारे में विस्तार से समयबद्ध चर्चा भी कर लेवे । सिर्फ पत्र दे देने भर को ही दायित्व न मान ले ।

पोलियो अभियान के बाद जन्मजात विकृतियों से सामना करने का यह प्रयास रोटरी के जरिये आप का सम्मान बढ़ाएगा इसलिए रोटरी का आभार जरूर मानियेगा ।

कोई टिप्पणी नहीं: