सोमवार, 31 जनवरी 2011

यहाँ डर है मौत का आतंक को भी


आतंक और मौत पर सवार हुए हम क्योंकि यहाँ डर है मौत का आतंक को भी

शुक्रवार, 21 जनवरी 2011

सड़क दुर्घटना मे लकड़बघ्घा मृत




सडकों पर यो तो आये दिन दुर्घटना घटती रहती है मगर रतलाम जिले मे वन्य प्राणियों की मृत्यु के मामले कम होते हैं। विगत १० वर्षों के आंकड़े देखे तो सियार की दुर्घटना ट्रक या अन्य वाहनों से होती रही मगर अनुभव यह रहा की ये सभी रतलाम उज्जैन रोड पर बडनगर के पास देखी गई और वे सभी उज्जैन जिले से सम्बंधित रहीं। आज सवेरे ग्रुप सदस्य नरेंद्र शर्मा ने बताया कि जावरा कि तरफ जाने वाली सड़क पर शायद लकड़बघ्घा मृत पडा है ।बड़े आश्चर्य कि बात है कि यहाँ बड़ी सवेरे कि बेला मे सड़क पार करते वक्त यह लकड़बघ्घा ट्रक कि चपेट मे आया और उसके मुह पर पहिया फिर गया। मौका मुआयना करने पर पाया कि पेट्रोल पम्प के सामने खेत से निकल कर जब लकड़बघ्घा सड़क पर आया होगा तब वह सड़क पार करते वक्त जावरा कि ओर जाने वाली फोरलेन कि बायीं और से जा रहे वाहनों कि रफ़्तार को समझ नहीं पाया ओर चपेट मे आ गया ।तहकीकात करने पर पास कि ढाबा मालकिन संतोष ने बताया कि सवारे नीलगाय का पीछा करते हुए यह जरक सड़क पर आ गया था। विभाग को सूचित किए जाने पर एक दल ने उसका पोस्टमोरटम कराया और अंतिम संस्कार किया। लगभग ४ बरस के इस indian striped hyna कि उपस्थिति वन विभाग को ज्ञात थी। गाँव के लोग इस वरगडा के नाम से भी जानते हैं।

रविवार, 16 जनवरी 2011

मंगलवार, 4 जनवरी 2011

ढ़ाक के तीन पात

उसने अपनी बाईक उठाई और बैठकर स्टार्ट की। मोबाईल पर चल रही बातचीत के बावजूद वाह रुकने का नाम नहीं ले रहा था । तीसरे ही सेकण्ड में उसकी गाडी ज़िप ज़ेप ज़ूम कर ६० किलोमीटर की रफ़्तार पकड़ चुकी थी । कंधे और कान के बीच फंसा मोबाईल उसने हटाया और जेकेट की जेब में डाल लिया । अब वह ब्रिज से उतरकर बाई और घूम कर जाने वाली सड़क पर मुड़ने लगा । आसपास रेंगती गाड़ियों के बीच एक उसी की गाडी सरपट दौड़ रही थी। गाडी को बाएं दायें डुलाते हुए उसका वाहन चालन जारी था । वह अपनी तीव्र गति के चालन का लोहा मनवाना चाह रहा था जैसे । ट्रक को क्रोस कर उसने सामने से आती कार के बीच से अपनी गाडी निकाली तो ट्रक और कार के वाहनों को ब्रेक लगाने पड़े । गाडी को इस तरह निकालकर हमारा यह हीरो चालक अपनी मन में वाह वाह कार अपनी क्षमता को सराह रहा था ।अगले चार रस्ते पर मटरगश्ती करते उसके दोस्त खड़े थे । वह उनके बीच में पहुंचा और सिगरेट निकाल चाय का ऑर्डर पास की दूकान पर उँगलियों के इशारे से किया । कल कब कहाँ किसा किससे मुलाक़ात हुई जाने क्या क्या बातें हुई की बे सर पैर चर्चाये और हंसी का फूहड़ दौर चल पड़ा । समझ में नहीं आया कि घर से उदंचाल चलकर आखिर क्यों चला था जबकि यहाँ कोई ऐसी व्यस्तता या अनिवार्य आवश्यकता नज़र ही नहीं आ रही थी । उसका इतनी हाय तौबा से गाडी चलाने का मकसद भी तो समझ में नहीं आ रहा था। सड़क सुरक्षा सप्ताह के बैनर लगे थे और उन पर दुर्घटनाओं के प्रति आकृष्ट कराते हुए सन्देश भी प्रचारित हो रहे थे । अब चाय पीकर यह नौजवान फिर चला तो उसके पीछे दो साथी और भी आ डटे थे । दो और गाड़ियां भी साथ हो ली थी । अब तीनो वाहन के चालक धूम मूवी कि मानो कोपी करते उड़न चाल से चलने लगे। गियर ब्रेक-ब्रेक गियर का उड़न अंदाज़ और सामने से आ रहे बुज़ुर्ग पर फब्ती कस कर वे ये जा वो जा कि गति पकड़ते और आपस में प्रतिस्पर्धा करते देखे जा सकते थे । उनकी अन्धाधुन्ध रफ़्तार और सड़क के बीच घुस आये कुत्ते से बचाकर सामने से आ रही बाईक से लगभग टकराते से निकाल कर उनकी गाडी सड़क पर सर्कस का नज़ारा पेश कर गई । अब ये हाईवे पर थे और उनकी बिंदास स्पीड मानो हवा से बाते कर रही थी । सड़क से वे महाविद्यालय के परिसर कि तरफ पलटे और वहां लगे गेट में प्रविष्ट होकर उन्होंने वहां खड़े अपने दोस्तों के बीच गाडिया घुसाकर तीव्र ब्रेक लगाए तो उनके दोस्तों के दचकने पर इनके चेहरे कि खुशियों को पढ़ा जा सकता था ।आपसी गुटर-गुं करते इन मित्रों कि निगाह अपनी टीचर पर गई तो इनके चेहरे पर नैतिक शिक्षा का नया पाढ पढ़ा जा सकता था । कपडे से ढंका चेहरा इन माननीया ने जैसे ही खोला तो मेकअप और अदायगी की चली छुरियाँ इन नौजवानों के चेहरे से पढ़ने लायक थी। उनकी साँसों में मदहोशी महसूस की जा सकती थी । बस आह निकलते ही रह गई थी । मेरा नाम जोकर सिनेमा की टीचर का नया रूपांकन यहाँ नए रूप में परिभाषित हो रहा था । हर कोई अपनी इस टीचर को अपने दिल के करीब पा रहा था ।अलग अलग स्कूटर लपर लहराते हुए नव यौवनाओं ने सामूहिक प्रवेश किया और खड़े इन युवकों की टोलियों के बीच से अपने वाहन लहराते और परफ्यूम की गंध से वातावरण को सुरभित कर प्रवेश किया । टीचर को तकते युवकों की अदा पर उनकी हंसी का सामूहिक गान गुंजित हो गया । कुछ तो झेंप गए और कुछ इनकी और अपना दिल उड़ता हुआ महसूस करने लगे ।हमारा हीरो इन नव युवतियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है । उसकी हवाई चाल से बाईक चालन , गौरवपूर्ण बर्ताव , फैशेबल जीवनशैली , प्रतिष्ठित नामचीन घराना , लीडरशीप , और एजुकेशनल कैरियर कालेज गर्ल्स के कालेजों पर छुरियाँ चलाने के लिए काफी हैआज कालेज आते हुए किन्ही दो युवकों की दुर्घटना का समाचार पसारने लगा । अलग अलग बाते हुई कोई कह रहा था की फॉर लेन पर उलटी दिशा से आते वाहन की चपेट में आने से ये दुर्घटना हुई है । ताबड़तोड़ निर्णय हुआ और शहर के समीप हाईवे से जुड़ने वाले रास्ते पर
यातायात अवरुद्ध किए जाने का निर्णय हुआ । वाहन रोकने के प्रयास में जिन वाहन चालको ने वाहन नहीं रोके उन पर पथराव भी किया गया । पुलिस का अमला यहाँ पहुंचा तब तक हमारे हीरो ने ज्ञापन तैयार कर लिया था । पत्रकारों को सूचना दे दी गई थी । अब फ्लैश चमकने लगे थे वीडियो रिकार्डिंग शुरू हो गई थी बयाँ लिए जाने लगे थे। ज्ञापन देते हुए तथा पुलिस द्वारा खदेड़े जाने के शानदार फोटो तैयार होने की ख़ुशी पत्रकारों के चेहरों पर पढ़ी जा सकती थी। चटखारेदार ख़बरों की सुर्ख़ियों में हमारा हीरो छा गया । नॅशनल टी वी पर आ रहे बयानों के बारे भी उसे मोबाइल पर जानकारी मिल रही थी । उसके दिए बयानों में जिसमे उसने पुलिस प्रशासन और बिगड़े यातायात सिस्टम पर दिए थे, बयानों पर शाबाशी और सराहना मिल रही थी ।
इस शानदार उपलब्धि के बाद पार्टी तो होनी ही थी सो हुई भी । डांस फ्लोर पर सखा सहेलियों ने कोकटेल का लुत्फ़ लिया । घायल विद्यार्थियों के प्रति संवेदना भी व्यक्त की गई।
पार्टी के किसी कोने में बैठे एक ग्रामीण विद्यार्थी ने पूछा " ट्राफिक नियमो का पालन जब हम ही नहीं करते तो पुलिस प्रशासन पर दोषारोपण के बाद यह पार्टी और सानंद वातावरण का प्रयोजन क्यों भला?" तो उसी के जैसे दुसरे विद्यार्थी का कहना था " भाई ज्यादा मत बोल कोई सुन लेगा तो तुम्हे पिछड़ा समझेगा । आज की नैतिक शिक्षा यही है कि दोषारोपण व्यवस्था पर करना होता है, किसी दुसरे पर आरोप जड़ना होता है । सक्सेस का मूलमंत्र भी यही है। अब तुम ही बताओ हमने पढ़ा था कि सड़क को जेब्रा क्रोस पर चलकर पार किया जाना चाहिए, ट्राफिक सिग्नल को फालो करना चाहिए, पैदल चलने के लिए फूटपाथ का उपयोग करना चाहिए आदि मगर ये होते कहाँ हैं? गति सीमा के बोर्ड भी होने चाहिए पर वास्तव में ये होते कहाँ है? भाई कागज़ की बाते कागज़ पर रहने दो। इन नियमो को पढ़े और पढ़कर पास हुए हमें कई साल हो गए तब से आज तक कही नियमपूर्वक लगाए गए बोर्ड तुमने देखे भी है? जेब्रा क्रोस कहीं देखा है क्या? तो फिर..........? ये आज जो हमने किया यही सच्चाई है क्योंकि ज़माना चाहे जितना बदल जाए ढ़ाक के रहेंगे वही तीन पात ही ना?