गुरुवार, 24 मार्च 2011

परीक्षा परिणाम

एक्जाम के रिज़ल्ट का दिन था । कुछ बच्चे सुबह जल्दी उठ गए थे , कुछ उठाए जाने पर भी नहीं उठना चाहते थे ।
मम्मी जल्दी नाश्ता दो और तैयार हो जाओ ! पापा आप भी न , अभी तक नहीं नहाए जल्दी करो ........ ये शब्द उन बच्चो के थे जो परीक्षा में अच्छे अंक लाकर अपना पारितोषिक मम्मी पापा से लेना चाहते थे ।
उठ जाओ ! आज रिज़ल्ट है न ! तुम उठाते क्यों नहीं ? जल्दी उठो .......... परीक्षा में फिसड्डी छात्रों के अभिभावकों की भाषा थी ।
स्कुल के कमरों में लगातार आवाजाही बनी हुई थी कुछ चमचमाते चेहरे थे तो कुछ को रेंक में फर्स्ट न आने का मलाल था। ऐ व ऐ प्लस रेंक वाले बच्चे खुश थे तो बी प्लस रेंक बनाने वाले बच्चे अपनी परफोर्मेंस से संतुष्ट थे ।
स्कूल से घर पहुंचे बच्चो की उत्साह भरी आवाज़ ने पास पड़ोस का माहौल बदल दिया था ।
घर के सामने लगे बगीचे के पौधों पर पड़े पानी में शकरखोरा दरजिन और मेघ केसर फुटकी अपना संगीत सुना कर नहा रहे थे ।
घर में घुसते हुए उन्हें नहाता देख परिधि बोली " कितनी गर्मी है न ? इन चिडियों को भी नहाना पड़ रहा है । "नहीं नहीं ये तो रोज़ नहाती है " पारुल ने जवाब दिया ।
दरवाज़े पर इंतज़ार कर रही दादी बोली " तुम्हारी परीक्षा ख़त्म हो गई रिज़ल्ट आ गया पर अब इन चिडियों के साथ साथ अनेक छोटे बड़े जीवों को कठिन परीक्षा से गुजरना होगा । सारी गर्मी प्यास से बेचैन रहेंगे ये प्राणी । भोजन भी कम ही नसीब होगा और शिकारियों का खतरा भी । कुदरत की इस परीक्षा में जो जीतेंगे वो ऊँची उड़ान भरेंगे जंगल पर और आसमान पर छाए रहेंगे और जो जीत न पाएंगे वे जिंदगी तक से हाथ धो बैठेंगे । प्यास से बचाने को इन्हें मिटटी के बर्तनों में पानी रखना तुम ........
अखबार में अगले दिन रेंकर्स के फोटो छपे थे और मोहल्ले में किसी बच्चे का परीक्षा परिणाम उत्कृष्ट न आ पाने की वजह से आत्म ह्त्या की चर्चा भी थी । स्कुल शिक्षा मंत्री ने आत्महत्या के कारणों में कमी के लिए नियमो में बदलाव करने की सिफारिश की और अब कोई फ़ैल नहीं हो इसके लिए दी गए सुझाव मान्य हो गए ......

मंगलवार, 22 मार्च 2011

WORLD WATER DAY SLOGANS

Save water, it will save you later!Don’t let the water run in the sink, our life’s on the brink!Put a stop to the drop!Water, water everywhere but not a drop to drink!Don't waste it, just taste it!When you conserve water, you conserve life!Save water! Save Life!Save water…it doesn’t grow on trees!Save water, secure the future!Stop the drip to save the drop!Don’t be a fool, cover your pool!Rainwater tank, won’t break the bank!Saving water can save the world!It’s only good until the last drop, than What?
Water covers two-thirds of the surface of the Earth, but Fresh water is 0.002% on Earth!Saving water one drop at a time!Save Water…..It’s not just a drop in the bucket!Water for the future generations….priceless!
Think outside the sink!

World Water Day Theme

World Water Day 2011 Theme - "Water for Cities"
World Water Day 2010 Theme - "Clean Water for a Healthy World"
World Water Day Theme 2009 - "Transboundary Waters"
World Water Day Theme 2008 - "Sanitation"
World Water Day Theme 2007 - "Coping With Water Scarcity"
World Water Day Theme 2006 - "Water and Culture"
World Water Day Theme 2005 - "Water for Life 2005-2015"
World Water Day Theme 2004 - "Water and Disasters"
World Water Day Theme 2003 - "Water for Future"
World Water Day Theme 2002 - "Water for Development"
World Water Day Theme 2001 - "Water for Health"
World Water Day Theme 2000 - "Water for the 21st Century"
World Water Day Theme 1999 - "Everyone Lives Downstream"
World Water Day Theme 1998 - "Groundwater - "The Invisible Resource"
World Water Day Theme 1997 - "The World's Water: Is there enough?"
World Water Day Theme 1996 - "Water for Thirsty Cities"
World Water Day Theme 1995 - "Women and Water"
World Water Day Theme 1994 - "Caring for our Water Resources is Everybody's Business"

शनिवार, 19 मार्च 2011

गाजर घांस की जलेगी होली

आज सुबह नीमच में वन मंडलाधिकारी मनोज जी अर्गल के शासकीय निवास पर अपने मित्रों दिनेश प्रजापति , पुरुषोत्तम गुप्ता , चन्द्रशेखर गुप्ता का परिचय कराया।
पर्यावरणीय मुद्दों को लेकर चर्चा करते हुए दिनेश जी ने भरपूर जानकारियाँ उपलब्ध कराई । उन्होंने बुराई की होली जलाने की बात बताते हुए कहा कि आज नीमच में गाजर घांस की होलिका की आकृति निर्मित की गई है और इसमें लोहे से प्रहलाद बना कर बैठाया जाएगा। होलिका के हाथो में सिगरेट गुटखा तमाखू जैसी बुराईयाँ भी थमाई गई है। बुराई के प्रतीक रावण के बाद आज पहली बार पर्यावरण तथा स्वास्थ्य के लिए घातक पदार्थो को होलिका का स्वरुप दिया जाना ज्ञात हुआ जो एक अचरज की बात थी ।
चाहे जिस किसी के मन में यह विचार पनपा हो है तो अनुकरणीय गाजर घांस कैसे जुटाई गई इस बारे में ज्ञात हुआ कि "गाजर घांस उन्मूलन अभियान" में उखाड़ी गई घांस आज के अवसर के लिए विशेष तौर पर संभाल कर रखी गई है।
धन्यवाद उन सभी का जिन्होंने कुछ नया अपनाया। परम्परागत त्यौहार में लकड़ी फूंकने के बजाय बुराई फूंकने की चाहत जताई

सोमवार, 14 मार्च 2011

sunaami






जलजला

जापान में जलजला आया
विध्वंस का प्रकृति ने मानो
लगता कोई खेल रचाया
धरती खिसक गई धूरी पर
टापू को पीछे धकाया

धधक उठ ज्वालामुखी फिर
गुबार का बादल भी छाया
हिरोशिमा नागासाकी
अब सानरिकू चर्चा में आया
जापान में जलजला है आया

भूगर्भ में प्लेटें खसकी
त्रासदी से जग घबराया
अमेरिका और भारत पर भी
भूकंप का खतरा मंडराया
समाचार पत्र के समाचारों ने
इन बातों का डर उपजाया
विभीषिका इन खतरों की
कोई आज तक सुलझा ना पाया
जापान में जलजला है आया

सुनामी ने रौंद डाला
सारा शहर डूबा पानी में
ज्वालामुखी फूट पडा फिर
सारी दुनिया हैरानी में
भूगर्भ से उठकर है आया
अजब गज़ब विनाश का साया
जापान में जलजला आया

अर्थ व्यवस्था भंग होने का खतरा
अब सारे बाज़ार में छाया
जान माल की हानि ने ये
है कैसा करतब रचाया
कम्पन तो था किसी कोने में
सारा संसार चपेट में आया
प्रकृति ने है कहर बरपाया
जापान में जलजला जो आया

इंसान विपदा और प्रकृतिधर्म

रोने लगे कुत्ते, घबडा गए थे पशु
परिंदों ने भी भरी ऊँची उड़ान थी ।

वो चीखा, वो चिल्लाया
वो देखो भागा-दौड़ा ।

उस सवेरे थरथराई थी धरती
कहते है आया था भूकंप ही
कुछ सोचते करते , मकान /दीवारें आ गिरी
कांपे थे लोग सभी ,
फर्नीचर , भांडे बर्तन भी।

छोटे बड़े और गगनचुम्बी निर्माण, पलभर में
हुए थे तब्दील मलबे में ।

ह्रदय विदारक दृष्य था
गूंज उठा था नाद , क्रन्द्रन का
मदद में आए कम्बल, कपडे, दवाई , तम्बू और भोजन ,
पहुंचने लगे चिकित्सक, फ़ौज और स्वयंसेवी संगठन ।

प्रकृति ने है जताया
मनुष्य उससे जीत नहीं सकता ।

पर्यावरण से छेड़खानी के
भुगतने पड़े हैं दुष्परिणाम
कहीं अवर्षा सूखा है
कही बाढ़ तो भूस्खलन है
शहरों में भर गया है पानी
समंदर तट को धकेल गया सुनामी
अमरीकी रीना, केटरीना स्टैन जैसे चक्रवात भी तूफानी
ज्वालामुखी और परमाणु संयत्र का ख़तरा भी भारी

दूषित हुआ है पेयजल
तो हुआ है वन विनाश भी
मारे गए हैं वन्य-पशु परिंदे
हुआ है, पारिस्थितिकी का नाश भी ।

मत बन अब हैवान
उठ जाग ऐ इंसान
अतिभौतिकतावाद एवं व्यावसायिकीकरण को
देकर तिलांजलि , जीवित कर मानवीयता को ।

प्राकृतिक विपदा से है तुझे सबक सीखना
धर्म प्रकृति का अब तो लो अपना
इस प्रार्थना को ईश्वर भी अवश्य सुनेगा
प्राकृतिक विपदाओं का कहर भी, तब कम ही बरसा करेगा ।

राजेश घोटीकर
६/१६ एल आई जी "बी"
जवाहर नगर
रतलाम (म.प्र।)
मो : ०९८२७३ ४०८३५

रविवार, 13 मार्च 2011

आप हम परिंदे और शिकारी

हमने माना
लिखा था आपने
कि परिंदे
रहते हैं कहाँ
क्या आकार
और
कैसा रंग है
उनका
क्या खाते हैं वे
कब कैसे कहाँ का
करते हैं प्रवास
किस मौसम में
करते हैं प्रजनन
कहाँ बनाते हैं
अपने नीड़ या घोंसले
हमें तो याद कुछ
रहा नहीं
पर अफ़सोस
यह कि
बताने से आपके
शिकारी को मंजिल
मिल गई !

गुरुवार, 10 मार्च 2011

मादा अबलक घायल मिली



पक्षियों का प्रवास हुआ है तो यहाँ के सज्जन मिल तालाब में भी कई पक्षी आने लगे हैं ।
ग्रुप सदस्य भगत सिंह सांखला के निवास पर अबलक पक्षी घायल मिला तो उसने बताया और सहायता मांगी । पहली बार किसी पोचार्ड फिमेल को इतने पास से चुने का अवसर मिला । वह उड़ नहीं पा रही थी तो उसे उठाकर देखा फिर जिला पशु चिकित्सालय ले जा कर ईलाज कराया तो पता चला की वह कहीं किसी बिजली के तार से टकराकर घायल हुई थी ।
खैर इलाज करा कर घर पहुंचा तो परिधि ने अपनी ख़ुशी जाहिर की । उसने इलाज में उसके सहयोग के लिए अपना नाम बताए जाने पर भी ख़ुशी का इज़हार किया ।

बुधवार, 9 मार्च 2011