शुक्रवार, 1 अप्रैल 2011

स्थापना दिवस पर संकल्प दोहराए

चिड़िया की चहचहाहट एक बार फिर गुंजायमान हो इसके नेपथ्य में बर्ड्स वाचिंग ग्रुप कार्यशील है । पर्यावरण रक्षा में पक्षियों के महत्त्व के बारे में अनेको वैज्ञानिक तथ्य मौजूद हैं जिनसे पता चलता है कि वे कितने मददगार हैं । कीट नियंत्रण में चिडियों की उपयोगिता सर्वविदित है। हमारे लोकगीतों की चिरैया और घर के नन्हे का पहला खिलौना रही चिड़िया आज संकट के दौर में है तो हमारे निष्ठुर स्वार्थपरक रवैये की वजह से। हमें धरती पर श्रेष्ठता के लिए सहभागी रूप में जीना चाहिए न कि उनके प्रति क्रूर बनकर। उपरोक्त विचार एक अप्रैल को बर्ड्स वाचिंग ग्रुप के स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित बैठक में वक्ताओं ने अभिव्यक्त किए । ग्रुप संस्थापक श्री राजेश घोटीकर ने कहा कि बदलता तापमान हम इंसानों के लिए चुनौती बन कर खडा होने लगा है तब प्राणियों कि जीवन रक्षा कि जिम्मेदारी का बोध भी हमें होना चाहिए । प्यास से बेहाल पशु परिंदों कि व्यवस्था में हर जीव दया प्रेमी के मन में भाव जागने जरुरी हैं । सतह पर शुद्ध पेयजल बना रहे इसके सतत प्रयासों कि महती आवश्यकता है। पर्यावरण के प्रति अपनी भूमिका का निर्वहन प्रत्येक व्यक्ति को समर्पित भाव से करने कि जरुरत है। शोषक और शासक मनोवृत्ति से उबरकर देने की प्रवृत्ति धारण करे । मानव जीवन बदहाल न हो इसके लिए जीव दया के प्रति संकल्पित हों। साहित्यकार श्री सत्यनारायण जी भटनागर के निवास पर आयोजित बैठक में पर्यावरण जाग्रति मंच के ईश्वर पाटीदार , राधेश्याम सोनी , सुरेश पुरोहित, मुकेश पंवार, नवीन व्यास , शेखर गुप्ता , एम् एल पडियार आदि ने अपने विचार व्यक्त कर पौधों और जीवों की रक्षा हेतु आगामी ग्रीष्म में प्रतिदिन पेयजल और अन्न प्रबंध का संकल्प दोहराया गया ।

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