शनिवार, 31 दिसंबर 2011

कंचनजंगा के माथे पर सूरज का मुकुट

फिर नई यात्रा पर
सिक्कीम डायरी

(दिनांक ३१.१२.११)
२०११ के आखरी दिन इन्दिरा गांधी हवाई अड्डे के घरेलू टर्मिनल पर सुबह ८.०० बजे हम बागडोगरा जाने के लिए तैयार है। हमारा सामान भीतर जा चुका है और हम बचे है। हमारी सवा ग्यारह बजे है।
  कल यानी ३०.१२.११ का पूरा दिन यात्रा की तैयारियों में गुजर गया। शाम ६.१० पर जम्मूतवी एक्सप्रेस से हमे दिल्ली के लिए निकलना था। ट्रेन १५ मिनट की देरी से आई। हमे बिदा करने के लिए अशोक पिपाडा,अशोक गंगवाल,उदित अग्रवाल प्रदीप जैन के अलावा मन्दसौर से आशुतोष को छोडने आए प्रदीप मुजावदिया,राजकुमार राठोड और घनश्याम शर्मा भी स्टेशन पर मौजूद थे। ये शायद पहला मौका था जब स्टेशन पर अशोक पिपाडा द्वारा लाई गई गजक खाकर यात्रा की शुरुआत की। पिपाडा जी हमारे लिए गुलाब की कलियां भी लाए थे। पिपाडा जी ने ही हमारे गंगटोक में रुकने की व्यवस्था भी करवाई है। वे स्टर्लिंग रिसोर्ट ग्रुप के मैम्बर है और उनकी मैम्बरशिप पर हम पांच लोगों के रुकने और नए साल का जश्र मनाने की व्यवस्था है।
 इस यात्रा में हम तीन मै,आशुतोष और राजेश घोटीकर तो पुराने हैं लेकिन संतोष त्रिपाठी पहली बार हमारे साथ किसी लम्बी यात्रा में है।
देश के तीनो कोने हम देख चुके हैऔर बस यही उत्तर पूर्वी ईलाका बाकी है। इस बार हम  पश्चिम बंगाल,सिक्कीम,भूटान के साथ साथ अरुणाचल प्रदेश, आसाम, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, नागालैण्ड सारे प्रदेश घुमने की योजना बना रहे है। मौसम कितना साथ देगा और हम कहां तक पंहुच पाएंगे ये आने वाले दिन बताएंगे। फिलहाल हम टर्मिनल के १४ न.गेट से सुरक्षा जांच करवा कर हमारे प्लेन तक पहुंचेंगे। हमारा प्लेन हैंगर जी में खडा है और इसका फ्लाईट नम्बर ८८१ है। हम दोपहर डेढ बजे बागडोगरा एयरपोर्ट (प.बंगाल) पंहुचेंगे।
(३१.१२.११ रात १०.५० पर गंगटोक स्टर्लिंग रिसोर्ट)
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर सुबह ५.०० बजे उतरने के बाद थोडी सी मशक्कत के बाद हमे बडी आसानी से वेटिंग रुम मिल गया। वेटिंग रुम में करीब १ घण्टा गुजारने के बाद हम टैक्सी में सवार होकर पालम हवाई अड्डे पर आ गए। जीवन में यह पहला अवसर था जब मैने और मेरे साथियों ने हवाई अड्डे पर कदम रखा था। हमने हवाई अड्डे पर लम्बा समय गुजारा और आखिर कार १०.३० पर पर सवार हो गए। ११.३० पर प्लेन उडा और हम लोग १.३० पर बागडोगरा एयरपोर्ट पर उतरे। नरेन्द्र  की गाडी की व्यवस्था जम नहीं पाई थी,हम प्री पेड बुथ से टैक्सी लेकर गंगटोक के लिए रवाना हो गए। बागडोगरा से गंगटोक १३० किमी है। रास्ते में मल्ली में नरेन्द्र को गाडी में बैठाया और शाम करीब पौने सात बजे गंगटोक पंहुच गए। यहां स्टर्लिंग रिसोर्ट की खोज करके आठ बजे अपने कमरों में टिक गए।
(दिनांक १.१.२०१२ सुबह ७.०० बजे,स्टर्लिंग रिसोर्ट)
सिक्कीम में नए साल की पहली सुबह। कल ड्राइवर ने कहा था कि सुबह ६.१० पर कंचनजंगा पर सूरज का मुकुट चढता हुआ दिखेगा। सुबह सवेरे होटल की छत पर पंहुचे लेकिन होटल नीचे है और यहां से कंचनजंगा नजर नहीं आया। चारों ओर पहाड,सुबह ठण्डक का अहसास भी हो रहा है। हमे ले जाने वाला ड्राइवर जोरथंग से ५ की बजाय ६ बजे निकला है। वह आठ बजे तक पहुंचेगा। तब तक हम आगे जाने की तैयारी कर रहे है।

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