मंगलवार, 24 जुलाई 2012

प्रकृति एवं वन्य जीवन की फोटोग्राफ्स स्लाईड्स का प्रदर्शन

बरसात के साथ प्रकृति का अपना अनोखा रंग जिस तरह अभिव्यक्त होता है उसी प्रकार देश विदेश से भिजवाए गए  प्रतियोगी छायाकारो के शानदार फोटोग्राफ्स में प्रकृति एवं वन्य जीवन की झलक प्रशंसनीय है उक्त बात वन मंडलाधिकारी श्री आर.पी. राय ने "साम सर्किट 2012" के नेचर एवं वाईल्ड लाईफ सेक्शन के फोटोग्राफ्स स्लाईडस  के प्रदर्शन के प्रति अभिव्यक्त किए।
सृजन केमेरा क्लब के सौजन्य से बर्ड्स वाचिंग ग्रुप संस्थापक एवं प्रकृतिविद श्री राजेश घोटीकर ने रतलाम मंदसौर नीमच जिले के रेंज ऑफिसर्स के अवलोकनार्थ उपरोक्त स्लाईड्स उपलब्ध कराई.
श्री घोटीकर  ने जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष IIPC  को नेचर सेक्शन में 434 तथा वाईल्ड लाईफ सेक्शन में 318 एंट्रीयाँ प्राप्त हुई है जिनका प्रदर्शन यहाँ वन विभाग के वरिष्ठ एवं कनिष्ठ अधिकारियों को कराया गया है। छायाचित्रकार को अपने फोटो बनाने के लिए वाटर प्रूफ कैमरा के साथ माइक्रो एवं जूम लेंसों की आवश्यकता पड़ी है तो वाही दुर्गम पहाडो पर ट्रेकिंग, नौका, डाइविंग तथा हेलिकोप्टर्स का महँगा प्रयोग भी करना पडा अनभूत होता है।
"पॉर्चुगीज़ मेन ऑफ़ वार" के लिए जहां समंदर की गहराई की थाह लेना पड़ी है वहीँ अफ्रीकी जंगल "मसाईमारा" के "विंटरबीस्ट एन्युअल माइग्रेशन" के लिए हेलिकोप्टर का उपयोग किया जाना भी समझ में आता है।  दक्षीणी अमेरिका के दलदली इलाके में जाकर "जेगुआर " की जम्प के लिए नौका प्रयोग तो "भराल"  के लिए दुर्गम पहाड़ों की ख़ाक छानना पड़ी होगी. ....
उत्तरी अमेरिका से "प्यूमा", "ब्राउन बीअर" और "बॉब केट", कोटर बनाते "छोटा बसंत" फूलो पर मंडराती तितलियाँ , हमिंग बर्ड तथा "नवरंग " पक्षी, भालू , बब्बर शेर , रेनडीयर, ऊदबिलाव, जंगली हाथी के लिए साहस और धेर्य की आवश्यकता थी। गहरे पानी से मछलियाँ पकड़ते किंग फिशर , ब्लू हेरोन , और ईग्रेट पक्षी के लिए फुर्ती और जूम लेंसों को महसूस किया जा सकता है। फोटोग्राफ्स में अनेक रंग बिरंगे कीट पतंगे हैं तो मकड़ियो, ड्रेगन फ्लाई, ग्रास होपर्स और गुबरेले को भी छायाचित्रकारों ने प्रतिबिम्ब बनाने में कसर नहीं बरती..
प्रदर्शन के अवसर पर सृजन कैमरा क्लब के श्री कमल उपाध्याय, श्री देवेन्द्र शर्मा , श्री विजय यति , श्री गगन गाबा , श्री हेरोल्ड हेरी, पर्यावरण मित्र श्री सुनील व्यास , बर्ड्स वाचिंग ग्रुप के तुषार कोठारी, भूपेश खिलोसिया , सुरेश पुरोहित , मुकेश शर्मा, प्रदीप जैन आदि उपस्थित थे

याद जरुर आयेंगे



" भूल जाने की कर ले कोशिश 
           हम तुझे याद जरूर आयेंगे, 

गहरी नींद में सोने की कर ले कोशिश 
         हम ख्वाब में जरूर आयेंगे ........................!

महफ़िल में भी अपने आपको 
         अकेले ही पाओगे .

बेकरार कर होगी हमारी यादें 
         अपने आपको बेचैन पाओगे ..............................!!

गुरुवार, 19 जुलाई 2012

सोमवार, 2 जुलाई 2012