मंगलवार, 24 दिसंबर 2013

कमर तथा रीढ़ सम्बन्धी रोगो हेतु निशुल्क स्वास्थ्य शिविर

रतलाम
मिर्गी, पुराना सर दर्द, ब्रेन हेमरेज, ब्रेन ट्यूमर,लकवा, आधा सीसी, सेरेब्रल पाल्सी तथा कमर दर्द , स्लिप डिस्क, स्पॉन्डिलिटिस, घुटनो व् जोड़ो का दर्द, जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी से सम्बंधित निशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन दिनांक २९ दिसंबर २०१३ रविवार को सुबह ११ बजे से स्थानीय जी डी  अंकलेसरिया रोटरी हॉल पर आयोजित होगा।
वड़ोदरा के सुपर स्पेशलिस्ट डॉ मोनिश मल्होत्रा, डॉ विरल मेहता एवं डॉ हेमंत माथुर अपनी विशेषज्ञ निशुल्क सेवा प्रदान करेंगे।  उपरोक्त जानकारी देते हुए शिविर संयोजक राजेश घोटीकर , श्रीमती सरिता पीपाड़ा एवं लायन मंजुला शुक्ल ने बताया कि साथी , लायंस क्लब रतलाम समर्पण, इनर व्हील क्लब तथा वडोदरा इंस्टिट्यूट ऑफ़ न्यूरोलॉजिकल साईंसेस के संयुक्त तत्वावधान में उक्त शिविर का आयोजन होगा।
शिविर हेतु पूर्व पंजीयन अनिवार्य रहेगा।  पंजीयन श्रीबाबा मेडिकोस राम मंदिर के सामने, मूणत मेडिकल जैल रोड, इ खबर टुडे स्टेशन रोड, पवित्र मेडिकल स्टोर अलकापुरी, जय मेडिकल वेद व्यास कॉलोनी, गुप्ता मेडिकल सैलाना बस स्टेंड तथा तरुण मेडिकल चांदनी चौक पर संपर्क किया जा सकता है।  
.

गुरुवार, 12 दिसंबर 2013

"आप", "नोटा" और फ्लोटिंग वोट"

देश के पांच राज्यों के चुनाव हाल ही में संपन्न हुए हैं।  भारतीय जनता पार्टी ने तीन तो कांग्रेस ने एक राज्य पर विजय का वरण किया। दिल्ली जो देश की राजधानी का प्रदेश जो शिक्षित राज्यो में माना जाता है, यहाँ त्रिशंकु स्थिति बनी है। 
रमन सिंह, वसुंधरा राजे, शिवराज के साथ नरेंद्र मोदी की लहर का असर इन चुनावो में महसूस किए जाने के साथ त्रिशंकु स्थिति के बावजूद दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी ने अपनी स्थिति सिंगल लार्जेस्ट पार्टी के रूप में दर्ज की है। सरकार बनाने के अंक गणित ने दिल्ली में इस कदर चौंका दिया है की सत्ता किसी भी दल के हाथ सीधे से नहीं गयी है।  
आम आदमी पार्टी यानि "आप" ने सिर्फ दिल्ली में ही चुनाव लड़ा और पहले मुकाबले में सत्तासीन कांग्रेस को हटा दिया तो भाजपा को उसकी प्रचंड लहर के बावजूद सत्तासीन होने से रोक दिया है। सत्ता पाने की होड़ में सभी दल अपने अपने वादों के साथ उपस्थित थे मगर मतदाताओं का रुझान इन वादों के प्रति नगण्य दिखलाई पड़ा।  कांग्रेस कि नीतिया देश में विदेशी निवेश के जरिये अप्रत्य़क्ष विदेशी शासन कि हमराह बनते दिखने लगी और घर में बैठे व्यक्ति को विदेशी निवेश के रिटर्न की  आहट  से भय पैदा होने लगा है।  ऐसे में कांग्रेस का विरोध तो जायज हो सकता है इसके चलते भारतीय जनता पार्टी को बहुमत मिलना बड़ी बात नहीं थी। आप को मिलने वाला वोट भ्रष्टाचार और महंगाई के खिलाफ तो था ही साथ ही यह अण्णा के आंदोलन का समर्थन भी माना जा रहा है।  शासन चलाने कि अनुभवहीनता के चलते "आप" का विपक्ष में बैठने का निर्णय और किसी भी दल को समर्थन न देना या न लेने का निर्णय भी राजनितिक दलो कि नीतियों से सामंजस्य के विपरीत अर्थों  को ही प्रकट करता है।  
कांग्रेस का पूरा ध्यान युवाओं  को आगे लाने में लगा था।  राहुल और ज्योतिरादित्य को स्टार प्रचारक के रूप में इस बात को महसूस किया जा सकता है।  मीडिया ने भी राहुल बनाम मोदी का इलेक्शन मैनेजमेंट रोचक तरीके से प्रस्तुत किया। कांग्रेस ने अपने कार्यो को श्रेष्ठ मानने  कि गलती कि और जनता की  कसमसाहट को दर किनार किया जिसका हश्र तो उसने प्रचंड हार के रूप में देखना तो दूर आपसी जूतम पैजार में अभव्यक्त करना प्रारम्भ कर दिया।  उतारे गए कांग्रेस प्रत्याशियों के प्रति जन भावना कांग्रेस के कार्यो के प्रति न होकर युवा ब्रिगेड को उभरने से रोकने की मानसिकता से दर्ज हुई।  स्थापित नेताओं के दुमछल्लों कि बात भी यहाँ चर्चा में हुई। सोनिया जी द्वारा बुलाई गई बैठक में भी कोई गम्भीर दृष्टिकोण स्थापित न होकर सेबोटेज का मसला ही उजागर रहा।  
देखा जाए तो सारे देश में पहली बार NOTA कि आमद दर्ज हुई।  हालांकि पहले NOTA  कि व्यवस्था से इंकार नहीं किया जा सकता है फिर भी इलेकट्रोनिक वोटिंग मशीन में पहचान का खुलासा न होने के चलते लोगो ने अपना वोट पार्टी के रूप में न बदलकर सीधे NOTA के रूप में अभिव्यक्त किया। राजस्थान में फ्लोटिंग वोट का असर पार्टीगत अभिरुचि में व्यक्त होता रहा है।  इस बार भी कांग्रेस को नकारते हुए यहाँ बीजेपी को प्रचंड बहुमत मिला।  फ्लोटिंग होने वाला वोट अब NOTA के रूप में भी अभिव्यक्त होने लगा है।  मध्य प्रदेश में जितना वोटिंग प्रतिशत बढ़ा लगभग उतना ही प्रतिशत वोट NOTA  में गिरा हुआ नजर आया है।  दिल्ली में जो प्रत्य्क्ष रूझान नजर आया है "आप" के स्वरुप में देश कि पार्टियों कि नीतियों के प्रति असहमति को भी इससे मजबूती मिलती है।  जनता की  मांगों को नकारने , व्यवस्थागत बदलावों पर रूझान न दिखाने का खामियाजा प्रमुख दलों को भुगतना पड़ा है।  प्रमुख दलों द्वारा मनचाहे तरीके से शासन न चले जनता की  साझेदारी सीधे रहे।  सिर्फ जन प्रतिनिधि चुन कर सदन में भेज देने से जनता के मनोगत उत्कर्ष भाव को सबलता नहीं मिलती यह अब राईट टू रिजेक्ट के रूप में विदित होती है।  
प्रमुख प्रत्याशियों की सीटों पर भी NOTA  का असर रहा।  शिवराज सिंह जी चौहान , वसुंधरा राजे को भी NOTA रिजेक्शन मिला होना पार्टियों के प्रति , उनकी नीतियों के प्रति जनता का विपरीत होना दिखलाई पड़ता है।  इसे महसूस किये जाने से नकारा जा सकता है फिर भी कहीं तो कुछ है जो NOTA  का विषय महत्वपूर्ण हो गया है।  
UPA  और NDA  गठबंधन के तौर तरीकों से भी जनता ने भ्रष्टाचार को महसूस किया है सीधे सता किसी भी महत्वपूर्ण राजनितिक दल से दूर रही है बावजूद इसके जनता कि भावनाओं को दर किनार किया जाना शायद  NOTA, राईट टू  रिजेक्ट , राईट टू  रिकाल जैसे तरीकों से हल हो पायेगा ऐसी सोच बनी है।  अब UPA  और NDA  का भी सत्ता में आ पाना लगभग तय नहीं है।  जनता कैसे अपने वोट को इस्तेमाल करेगी यह समय ही बतलायेगा मगर अण्णा  के आंदोलन को मिल रहा समर्थन जाहिर हो चूका है दिल्ली के चुनावों से।  "आप" को हलके में लेना भरी पड़ा यह बात भी उजागर हुई है।  अण्णा  नीतिगत विरोध के लिए सत्ता से दूर बने रहने वाली शख्सियत हैं उनकी टीम से निकल कर आम आदमी पार्टी के रूप में गतिविधि चला रहे दल का भी सत्ता का विपक्ष स्वीकारना प्रमुख राजनितिक दलों कि गतिविधियों पर अंकुश समान विदित है ऐसे में आगामी लोकसभा में "आप" का प्रदर्शन सबल विपक्ष रह पाएगा या नहीं? NOTA  क्या असर करेगा ? जैसे प्रश्नो के उत्तर तय नहीं है।  फिर भी कसक महसूस कर रहे व्यक्ति का रिप्रेजेंटेशन इन्ही दो साधनो में दिखलाई पड़ने कि सम्भावना अधिक है।  राजनैतिक दल किस तरह इस चुनौती को ले पाते है यह समय के साथ ही दिखेगा। 
जनता का मौन वोट कि ताकत के रूप में उभरता रहा है परन्तु इसकी कोई संगठात्मकता नहीं रही है जिससे इसका इस्तेमाल दोषपूर्ण तरीके से होता आया है।  आगामी समय में NOTA  राजनितिक दलों के प्रत्याशी चयन तक ही शायद सीमित न रहे।  अब वक्त है हमें मौन कि भाषा को सीखने का।  बयानो के बजाय अब मौन जो अधिक संवेदनशील हो चला है 













मंगलवार, 17 सितंबर 2013

ye dosti










रविवार, 15 सितंबर 2013

poster


मंगलवार, 10 सितंबर 2013

महाआरती




इसरथुनी पंचमुखी श्री महागणेश मंदिर पर आज ऋषि पंचमी की शाम को रतलाम जिले के ए  एस पी  श्री प्रशांत जी चौबे ने महाआरती का लाभ लिया।
वीडियो इसी अवसर का 

गणेश चतुर्थी पर स्थापन कार्यक्रम





इसरथुनी महागणेश मंदिर पर छप्पन भोग प्रसादी तथा सहस्त्र धारा अभिषेक का भव्य आयोजन संपन्न हुआ।  मुख्य जजमान श्रीमती एवं श्री संजय दवे थे।
गणेश चतुर्थी पर स्थापन कार्यक्रम के दृश्य  

सोमवार, 9 सितंबर 2013

गणेशोत्सव का धूमधाम पूर्वक आयोजन

पंचमुखी श्री महागणेश मंदिर इसरथूनी पर सार्वजानिक गणेशोत्सव का धूमधाम पूर्वक आयोजन प्रारंभ किया गया।  श्री गणेश स्थापना का लाभ श्री संजय दवे जी ने सपत्निक प्राप्त किया।  श्री ॐ सिद्धि विनायक ट्रस्ट द्वारा आयोजित गणेशोत्सव के अंतर्गत सहस्त्रधारा अभिषेक, छप्पन भोग प्रसादी एवं भजन संध्या का आयोजन दस दिवसीय गणेशोत्सव के निमित्त किया गया है ।  दिनांक १० सितम्बर २०१३ को संगीतमय सुन्दरकाण्ड का महा आयोजन रखा गया है उक्त जानकारी ओम नारायण शर्मा ने देते हुए बताया कि रतलाम नगर से दूर प्राकृतिक वातावरण में निर्मित पंचमुखी महागणेश  मंदिर पर उक्त कार्यक्रमों में रतलाम नगर एवं ग्राम इसरथुनी  के अनेको धर्मालुओं ने भाग लिया।
सुरेन्द्र जायसवाल, शरद जोशी, राजेश घोटीकर, रमेश सोनी, दिलीप बर्वे, अशोक बेर्गे, रमेश जोशी आदि उपस्थित थे।  भजन संध्या में कमलकांत खंडेलवाल एवं पार्टी ने भजनों की प्रस्तुति दी।  संध्या आरती का लाभ ने लिया।     

रविवार, 8 सितंबर 2013

महागणेशोत्सव का भव्य सार्वजनिक आयोजन


प्राकृतिक सुरम्य शांत स्थल इसर्थुनी झरने के समीप बनाए गए पंचमुखी श्री महागणेश मंदिर पर दस दिवसीय महागणेशोत्सव का भव्य सार्वजनिक आयोजन किया जा रहां है।  कार्यक्रम की जानकारी देते हुए श्री ॐ सिद्धि विनायक मंदिर ट्रस्ट के सुरेन्द्र जायसवाल एवं ॐ नारायण शर्मा ने बताया कि गणेशोत्सव के प्रथम दिन गणेश चतुर्थी के अवसर पर ९ सितम्बर २०१३ को दोपहर १२ से २ बजे तक विभिन्न कार्यक्रम होंगे जिनमे पार्थिव गणेश स्थापना , पंचमुखी महागणेश का सहस्त्रधारा अभिषेक, छप्पन भोग प्रसादी, सायं ४ बजे भजन संध्या एवं शाम ७ बजे महाआरती का कार्यक्रम होगा।
सम्पूर्ण देश भर के द्वितीय पंचमुखी श्री महागणेश मंदिर पर समस्त दस दिवसीय कार्यक्रम धार्मिक रूप से पंचमुखी श्री महागणेश उत्सव आयोजन समिति के तत्वावधान में होंगे।   

सोमवार, 2 सितंबर 2013

इसरथुनी के पंचमुखी श्रीमहागणेश मंदिर प्रांगण के मुख्य प्रवेश द्वार की स्थापना

इसरथुनि स्थित पर पंचमुखी श्रीमहागणेश की प्रतिमा स्थापित की जा चुकी है। मंदिर का भव्य हाल निर्मित किया जा चुका है सम्पूर्ण ५ बीघा भूमि पर बाऊंड्री वाल और बगीचा बनाया जा चुका है। आज पुष्य नक्षत्र की वेला में विधि विधान से पूजन करके मंदिर प्रांगण के मुख्य प्रवेश द्वार स्थापित किया जाने का कार्य प्रारम्भ किया गया।
कार्यक्रम के प्रमुख जजमान डॉ राजेश शर्मा थे।  मंदिर निर्माण के लिए भूमि प्रदान करने का लाभ लेने वाली शहर की धर्मालु श्रीमती गुलाब बाई जाट, उनके पोते तथा मल्ल विद्या के अंतर्गत पदवी प्राप्त सूरज जाट ने भी पूजन कार्यक्रम में भागीदारी की।
४० टन वजनी लाल पत्थरों से बनाया गया मुख्य प्रवेश द्वार उत्सवपूर्वक रखे जाते समय श्री ॐ सिद्धि विनायक मंदिर ट्रस्ट  सर्व श्री सुरेन्द्र जायसवाल, ओम नारायण शर्मा तथा पंचमुखी श्री महागणेश  उत्सव आयोजन समिति के राजेश घोटीकर, दिलीप बर्वे, रमेश जोशी, राणाप्रताप सिंह सिसोदिया, प्रदीप रावल, अरविन्द व्यास, आशीष सोमानी, दिनेश चौहान तथा नगर के डॉ गिरीश गौड़, श्रीमती लक्ष्मी गौड़, श्री भट्ट , श्री मोहन भाई, मनोहर आदि अनेक धर्मालुजन उपस्थित थे.
शहर से १२ की मी दूर प्रकृति की सुरम्य गोद में इसरथुनी झरने के समीप यह मंदिर भारत भर का दूसरा बड़ा पंचमुखी गणेश मंदिर है.
झलकिया इसी कार्यक्रम की :……………………












गुरुवार, 22 अगस्त 2013

श्री ॐ सिद्धि विनायक मंदिर ट्रस्ट (पं )
ग्राम इसरथुनी , रतलाम (म. प्र.)

महाआरती प्रतिदिन सुबह ९.००, दोपहर १२.०० एवं शाम ७.०० बजे   
सम्पूर्ण भारत भर में स्थापित द्वितीय पंचमुखी गणेश की अद्भूत एवं चमत्कारी प्रतिमा
सर्व मंगलकारी, दुखहारी प्रकल्प में आस्था की एक ईंट के साथ जुड़ने के अभियान में सहभागी बने.
भविष्य के प्रकल्प : सेल्फ पेड वृद्धाश्रम, गौशाला, योग केंद्र, चिकित्सा एवं एम्बुलेंस सुविधा, अनाथ एवं अस्वीकृत शिशु पालन केंद्र।
स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया खाता क्र 6300 373 3265 में अपना अनुदान करें 

गुरुवार, 15 अगस्त 2013

With CM Shri Shivraj sigh ji Chouhan for an Event


Raj jyotishi Pandit Babulal Joshi, Shri Shyam Vinchurkar & me Rajesh Ghotikar are presenting memorandum to start Jyotish in Atal Bihari Vajpai Hindi Vishwavidhyalay.




 M P Govt started Geeta Suktam in School Standards hence Sudarshan is presented to CM





Shri Seva Sansthan is doing its best in recovery of Hemoglobin in  Students of various School. the Poster for that is given to CM by SSS Coordinator Rajesh Ghotikar






Lotus n Ganesh






बुधवार, 14 अगस्त 2013

परम्पराओं पर एतराज और संशय क्यों

समाज एक दर्पण है, जिसमे हम अपना अक्स निरंतर देखते रहते है।  कई लोग उस बच्चे के समान नजर आते है जो बड़ा दिखने की उम्मीद में दर्पण पर दाढ़ी मूछें बनाकर अनुमान लगाता है।  कुछ लोग उस चिड़िया की तरह जो अपने ही अक्स को देख दर्पण पर चोंच मारती देखी जाती है, अपने ही अक्स को प्रतिद्वंद्वी मान बैठते है।  अनेक लोग उस बन्दर का अनुसरण करते दीखते हैं, जो आईने के सामने से देख कर उसके पीछे खड़े किसी अन्य बन्दर से मिलने को लालायित नजर आता है।  कुल मिलाकर इंसान भ्रमित दशा में दुनिया को समझने का जतन  करता है।  समाज का दर्पण मान्यताओं का है, परिपाटीपूर्ण है और इन्ही की तह में संस्कृति छिपी हुई है।  संस्कृति अवधारणाओं पर आधारित सत्य है।  सत्य भी एसा जो मात्र परिलक्षित होता है।
एक व्यक्ति ने दुसरे व्यक्ति से पूछा " मिस्टर एक्स , कहाँ है ?"
दुसरे ने जवाब दिया " अभी उन्ही के चेंबर से निकल कर आ रहा हूँ। "
यह बात जानकर पहला व्यक्ति उनके चेंबर पर पहुंचा।  मगर वे वहां नहीं मिले।
अब सवाल उठता है कि सत्यता क्या है? क्या दूसरा व्यक्ति झूठ बोला था? जब वे वहां पहुंचे तो क्या मिस्टर एक्स ने स्थान छोड़ दिया था ?  कुछ भी रहा हो मगर सत्य एक अनुमान भर है।
तब सवाल ये उठता  है की सत्य आखिर है क्या ?
समय और परिस्थिति का जिस बस नहीं चले शायद वो सत्य कहलाए।  सत्य पहली तरह का अनुमान ही है।  इसे भ्रम या मयाजाल मान लेना भी उचित नहीं होगा।  सत्य अनुमान की तरह भ्रमित करता है।  एक दर्पण की तरह जो वास्तविक बिम्ब को प्रतिबिम्ब के स्वरुप में प्रस्तुत या रूपांकित करता है।
नै पीढ़ी  सत्यता से प्रेरित है।  वे अनुमान, अटकलों, अवधारणाओं या परिपाटीजन्य सत्य को बार बार नकारती है।  बुजुर्गों के पास कई बातों के कोई जवाब जब नहीं मिलते।
शकर की मिठास महसूस होती है , नजर नहीं आती।  कडुआ या कसैला शब्द पढ़ लेने से जबान का स्वाद नहीं बदलता।  शक्कर की मिठास को आदिकाल से मिठास ही माना गया यदि इसे कडुआ माना जाता तो क्या ? मान्यता में शक्कर कडुवी नहीं कहलाती ??? परिपाटी से चला शब्द जब हमें स्वीकार है इसीलिए शक्कर मीठी हुई ना ??
तो फिर संस्कारों के लिए परिपाटीजन्य शब्दों और परम्पराओं पर एतराज और संशय क्यों है भाई ??? 

बुधवार, 7 अगस्त 2013

श्री सेवा संस्थान "डे ऑफ़ इंडिजिनस पिपुल " मनाएगा


रतलाम
 श्री सेवा संस्थान, संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा घोषित "डे ऑफ़ इंडिजिनस पिपुल " निशुल्क स्वास्थ शिविर के माध्यम से मनाएगा। उक्त जानकारी देते हुए संस्थान अध्यक्ष डॉ लीला जोशी ने बताया की संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा घोषित इस दिवस का उद्देश्य संस्कृति से छेड़छाड़ किए बगैर आदिवासी लोगो को मुख्य धारा में जोड़ना है।  श्री सेवा संस्थान द्वारा इस दिवस के उपलक्ष में आदिम जाती कल्याण विभाग द्वारा संचालित ग्राम सरवन के स्कूली छात्रों तथा क्षेत्र की गर्भवती माताओं का परीक्षण किया जाकर चिकित्सा लाभ दिलाया जाएगा।

शिविर में डॉ गणेश आचार्य, डॉ गिरीश गौड़, डॉ गायत्री तिवारी, डॉ नलिनी भट्ट, प्रशिक्षु चिकित्सक, पैरा मेडिकल के भूपेंद्र सिंह बिष्ट, डॉ पगारिया, सिस्टर शहजादी, सुधाकर करकरे, अरविन्द व्यास, राजेश घोटीकर तथा सामाजिक कार्यकर्ता डॉ सुलोचना शर्मा,  ओ पी  मिश्र, कृष्णपाल सिंह राठौर आदि अपनी सेवाए प्रदान करेंगे उपरोक्त जानकारी संस्था सचिव डॉ गोपाल जोस्गी ने प्रदान की है. 

love birds


शनिवार, 3 अगस्त 2013

प्रसिद्धि और सम्मान की भूख बुद्धिमत्ता को निगल जाती है

एक जंगल था। इस जंगल में बड़े सुन्दर पहाड़, नदियाँ, झरने, झील, तालाब थे। फल, फूल, कँद, औषधियाँ और इमारती लकड़ी का बड़ा भण्डार था। छोटे से कीड़े से लगाकर भीमकाय हाथी, अनेक रंग बिरंगी तितलियाँ और परिंदों का आसरा था यह जंगल। जंगल की नदियाँ भी अनेक जलजीवों से भरी थी। शाकाहारी, माँसाहारी और सर्वाहारी जीवों का स्वरूप था यह जंगल।
ऋषि मुनियों की तपोभूमि भी इस जंगल में ही थी। धर्म स्थल भी इस जंगल में ही थे। नदियों का उद्गम भी यहाँ ही थे। भयानक डरावने और जहरीले जन्तुओं को भी अपने में समेटे हुए थी यहाँ की प्रकृति। प्राकृतिक जीवनचर्या अपनी ही गति में थी।
भीषण नीरवता में कभी हूक तो कभी कूक, कभी दहाड़ तो कभी चिंघाड़ से वातावरण गूंज उठता। चिडि़यों की चिट-चिट, पेड़ों के पत्तों के खड़खड़ाने की ध्वनि, टहनियों के चरमराने का स्वर, झरने का झरता संगीत, मस्त कर देने वाली खुशबुएँ, आँखों को लुभाने वाली रोशनी क्या कुछ नहीं था यहाँ।
इसी जंगल की बात है चिंटू खरगोश अपने भाई बहन और माता पिता के साथ एक झाड़ी के नीचे बनाए बिल में रहता था। पास ही के बरगद के नीचे सेही ने भी अपनी मांद खोद रखी थी। श्यामू जो काला हिरण था अपने झुण्ड के साथ अक्सर आसपास दिखाई दे जाया करता था। महिष नाम का काला भैंसा अपने झुण्ड का सरदार था उसके झुण्ड में करीब 200 जंगली भैंसे थे। गब्दु नील गाय का झुण्ड आतंक मचाने आता था मगर चिंटू खरगोश  के बिल के आसपास घनी झाडि़यों की वजह से कोई तकलीफ नहीं हुई मगर सेही को कई बार काँटे झनझनाने पड़ते थे। शांतू चीतल का झुण्ड जब आता तो ‘‘हूपी’’ की वानर सेना भी वहाँ आ डटती थी या कहें लंगूरों को पीछा चीतल किया करते क्योंकि पेड़ों से फल और पत्ते जो भी नीचे गिरता उसमें चीतलों की मौज थी। जंगली सुअर भी इनके बीच बीच में आते जाते रहते।
बिल्ली, सियार, भेडि़ए, लकड़बघ्घे, लोमडि़याँ, तेंदूए, चीते, बाघ, भालू और बब्बर शेर की दिनचर्या शाम को प्रारंभ होती। जब तक सूरज ढलने की तैयारी करता ये सभी अलसाते उठते।  फिर किसी कमजोर प्राणी को शिकार बनाते। शिकारी की गिरफ्त से बचकर भाग निकलने में कई जानवर घायल भी हो जाया करते। भीषण घाव और रक्त के रिसाव और पीड़ा के दुःख भोगते कई प्राणी छोटे शिकारी जानवरों का दर्दनाक ग्रास बनने या कभी गिद्धों का भोजन। उनकी जीवित दशा में भी कई बार उनको नोचा जाता आखिरकार वे दम तोड़ते और भूखे मांसाहारी अपना पेट भरते। इन बातों से जब सारे जानवर जो शाकाहारी थे घबड़ा उठे तो उन्होंने जंगल के राजा शेरूसिंह से इस बारे में चर्चा करने की ठानी। हाथी और भैंसे झुण्ड में ताकतवर रहते हैं सो उनका दल आगे चला। पीछे हिरण और अन्य छोटे जीव थे। शेरूसिंह अपनी मांद में भोजन कर सुस्ता रहा था तभी उसने देखा कि सारे शाकाहारी जानवर उनकी तरफ बढ़े चले आ रहे हैं तो एक बार उसका मन घबरा गया। वह वहाँ से भागने की सोचने लगा। बाहर निकलकर उसने देखा कि वह चारों तरफ से घिर गया है तो उसने भीषण दहाड़ लगाई मगर आज तो सारे शाकाहारी चर्चा का निशच्य करके आए थे और एक संगठित दल के रूप में थे तब भी वे ठिठुक उठे थे हाथी ने शेर से कहा कि आज हम अपनी समस्या पर तुमसे चर्चा करने आए है। आप कृपया नाराज मत होईए। हमारी बात सुनने की कृपा करें।
शेर घबड़ाया हुआ था उसे भी इस बात से तसल्ली हुई कि कोई अनर्थ उसके साथ नहीं होने जा रहा। वह अपने सिंहासन रूपी चट्टान पर जा चढ़ा उसे जंगल का राजा होने का महत्व समझ में आया।
भीड़ में से खरगोश को आगे लाया गया क्योंकि एक वही ठीक प्रकार से बात कर सकता था। ऐसा बाकि जानवर समझते थे। खरगोश ने अभिवादन कर अपनी बात प्रारंभ की। उसने कहा हे महाराज हम सभी शाकाहारी प्राणी रोज के जीवन-मरण के चक्र से व्याकुल हो चुके है इस व्यवस्था में हम आपसे सुधार की अपेक्षा रखते हुए आपके पास आए है।
क्या व्यवस्था चाहते हो? शेर बात पूरी होने के पहले ही दहाड़ा।
खरगोश बोला ‘‘गुस्ताखी माफ हो महाराज मगर आपका शासन दूर देषों तक अपना नाम रोशन करे। आपके देश में अमन चैन कायम हो यही हमारी मंशा है।
तो अभी अमन चैन नहीं है क्या? शेर बोला
जी महाराज ऐसी बात नहीं है मगर व्यवस्था के सुधार दिए जाने से हमारे साथियों में पल रहा भय कम पड़ेगा और घायल हो दम तोड़ते हमारे साथी भी हमारे यहाँ नहीं रहेंगे।
ये क्या बात हुई भला? क्या अभी हमारे देश में घायल प्राणी होते हैं?
जी हुजूर दिन भर की आपाधापी और आपके भय के मारे भागते दौड़ते कईयों के पैर टूट जाते है। कई जगह खरोंच और कांटों से घाव हो जाते है। फिर दर्दनाक मौत का सिलसिला जो देखते भी नहीं बनता।
हमारे शासन में भय क्या बात कह रहे हो ..............
हुजूर गुस्ताखी माफ हो मगर शिकारी जानवरों के घायल किए प्राणी भी इनमें शामिल करें। आप जब देखेंगे तो पता चलेगा कि किस कदर घायल प्राणी इधर उधर मौत की राह तकते पड़े हुए है। कुछ व्यवस्था बनाएँ हुजूर वरना भय का वातावरण हमें यह जगह छोड़ देने को मजबूर कर देगा।
अच्छा तो तुम क्या चाहते हों, बताओ? कुछ तो सोचा होगा?
आप जैसे सहृदय प्राणियों के राजा से हमें यही उम्मीद है कि व्यवस्था सुधारने में आप रूचि दिखाएंगे। हम आपकी इस भावना के प्रति आभारी है। हम चाहते है कि हमारा राज्य भय मुक्त रहे इसलिए आपको भी कड़े परिश्रम की जरूरत न रहे। हममें से कोई एक, रोजाना आपके पास आकर आपकी आहार पूर्ति कर देगा बस आप भी किसी की स्वच्छंदता को न छेड़े यही अपेक्षा है।
ठीक है ऐसा ही सही। मगर यदि तुममें से किसी ने सेवा में गलती कर दी तब?
ऐसा होगा तो नहीं, मगर फिर आपके गुस्से का हमें डर भी तो है। जो चाहिए सजा दे दिजिएगा।
बस यही से व्यवस्था बदल गई प्रतिदिन कोई न कोई प्राणी अपनी बारी आने पर शेर का आहार बनने चला जाता। वो जंगल के घायलों का डर जानता था इसलिए अपनी बारी आने पर उदास मन से प्रस्तुत हो जाता।
शेर के दिन मजे से कट रहे थे और उसके आश्रित भी झूठन से संतुष्ट थे।
एक दिन टॉस किया गया तो खरगोश का नंबर आ गया। छोटी सी जान उदास मन से शेर की ओर चल पड़ी। रास्ते में उसे एक कुआँ नजर आया उसने झाँककर देखा तो उसे वहाँ दूसरा खरगोश झाँकता दिखा। उसके मुँह से ‘वाह क्या बात है’ निकल पड़ा तो आवाज कुएँ से लोट कर आई उसके दिमाग में युक्ति आई और वह खुश हो गया। यह कहानी आपने शायद पढ़ी होगी। खरगोश शेर के पास जब देरी से पहुंचा तो शेर बड़ा क्रोधित हुआ। उसने कहा एक तो छोटी सी जान फिर इतना विलम्ब कर दिया आने में कि मैं मारे भूख के तिलमिला उठा हूँ।
खरगोश अपनी रणनीति के तहत तेजी से दौड़कर पहुँचा था। सो हाँफते हुए पहुंचा था। उसने उखड़ी साँस से कहा महाराजा मुझे क्षमा करें। क्या करूं बड़ी मुष्किल से यहाँ पहुँच पाया हूँ?
क्यो ऐसा क्या हुआ? - शेर ने पूछा।
हुजूर रास्ते में कोई दूसरा शेर मिल गया कह रहा था कि वही यहाँ का राजा है।  कह रहा था तुम्हे अब शेरूसिंह के पास जाने की जरूरत नहीं है। बड़ी मुश्किल से जान बचाकर भागा हूँ साहब। गनीमत है कि आप तक आ पहुँचा हूँ, वरना आपका क्रोध भी तो खराब ही है।
बताओं वो अब कहाँ होगा?
चलिए आपको रास्ता बताता हूँ जहाँ वो दिखा था। शायद आपके डर से यहाँ आने में घबरा गया होगा।
एक तो भूख की तिलमिलाहट फिर खरगोश जैसा आहार उपर से प्रतिद्वंदी की मौजूदगी और शासन पर कब्जे की बात शेरूसिंह का क्रोध सातवें आसमान को छू गया था। खरगोश के पीछे आव देखा न ताव चल पड़ा। खरगोश भी कभी इधर तो कभी उधर ताकता चल पड़ता। वो यकीन दिलाता जाता कि उसकी बात में सच्चाई है। आखिर उस कुएँ के पास ले जाकर उसने भीतर झाँका और बोला हुजूर ये देखो आपके डर के मारे यहाँ भीतर छुपा बैठा है।
शेर ने तुरंत दहाड़ते हुए भीतर झाँका तो भीतर से गुंजकर आई प्रतिध्वनि की दहाड़ और अपनी परछाई दिखी वो कसमसा गया और शेर जो असल में उसी की परछाई थी पर लपक पड़ा और कुएँ में जा गिरा।
क्हते है सूझबूझ से काम लेने पर बड़ी से बड़ी आफत को भी टाला जा सकता है। खरगोश और सिंह की यह कहानी बचपन में पढ़ाई जाती रही थी, थोड़ा सा परिवर्तन कर इसी कहानी को लंबा दिया है। कैसी लगी यह कहानी आपको? पर यह अभी खतम नहीं हुई है।
कुएँ में गिरते ही शेर मरा नहीं था और खरगोश भी सबकी जान बचाकर आम प्राणी की तरह नहीं रहा।
शेर डूबने लगा था। बड़ी मुश्किल से वह वहाँ अपने को बचाने की कोशिश कर रहा था। वहाँ से बड़ी करूण दहाड़ में उसने बचाने की आवाजे की। उसकी आवाज सुनकर उसकी जूठन पर पलने वाले प्राणी दौड़े आए। उन्होंने देखा कि शेर कुएँ में पड़ा है और बचाने के लिए मिमिया रहा है।
शेर ने उन्हें बताया कि खरगोश कैसी चालबाजी में उलझा गया। बचने के सारे जतन समाप्त हो गए और शेर भूख और आधा पानी में लटका कई दिनों पड़ा रहा और फिर वहाँ मर गया।
इधर खरगोश अपनी कामयाबी पर सीना ताने लौटा तो सभी जानवर पहले तो नाराज हो गए कि उसने नई मुसीबत कहाँ पैदा कर डाली सबके लिए। फिर यह जानकर कि मुसीबत से उन्हें सदा के लिए खरगोश की सूझबूझ ने मुक्त करा दिया है तो वे झूम उठे। उनकी सभा में खरगोश का अभिनंदन किया गया। जश्न मना। एक सलाह यह भी आई कि खरगोश से जीवनोपयोगी सबक सीखने की जरूरत है तो उससे शिक्षा लेने का मन बना। गुजारिश की गई फिर खरगोश की क्लास शुरू हो गई।
जानवर नई नई तकनीके सीखने लगे। अपने अनुभवों से सावधानी बरतना आदि उनकी आदतों में शामिल होने लगा। पास के राज्यों तक यह बात फैली तो उनके यहाँ भी डिमाण्ड हुई आखिरकार हर्बिवोरस एंटी पोचिंग एजुकेशनल युनिवर्सिटी कायम हो गई। खरगोश कुलपति बन गया। शाकाहारी सुरक्षा और चकमा देने की विधि सीखने लगे।
दिन ब दिन माँसाहारी प्राणियों का जीना मुहाल होने लगा। उनके हाथों आने वाला शिकार उनको चकमा दे जाया करता। तो सभी ने अपनी समस्या के प्रति उपाय ढूँढने के लिए मिटिंग बुलाई। शेर, चीते, गुलदार, लकड़बघ्घे, सियार, लोमडि़याँ इकट्ठे होने लगे गिद्द, कौवे भी डालों पर आ बैठे।
चर्चा में पता चला कि इन सारी समस्याओं के पीछे खरगोश है जो अब हर्बिवोरस एंटी पोचिंग एजुकेशनल युनिवर्सिटी का कुलपति है। उसके पढ़ाए कई प्राणी अब प्रोफेसर और शिक्षक हैं। सब के सब चिंतित हो उठे। उन्हें अपने जीवन का प्रश्न सताने लगा। तभी लोमड़ी खुशी से नाच उठी। यह देखकर सभी ने उसे डपट लगाई। कहा यहाँ हम अपने जीवन को लेकर चिंतित हैं और तुझे मजाक सूझ रही है? बेवकूफ कहीं की तुझे यही वक्त मिला है खुशी मनाने का?
लोमड़ी बोली अरे नहीं मुझे उपाय सूझा है इसकी खुशी हो रही है सब चुपचाप ध्यान से सुनो।
सारे जानवर चुप हो गए। लोमड़ी की चतुराई को सभी जानते थे, सो शांत होकर एकाग्रचितता से सबने बात कहने को लोमड़ी से कहा।
लोमड़ी बोली ऐसा करते हैं कि हम एक महा आयोजन करते हैं उसमें खरगोश और उसके साथियों ने हमारे राज्य का नाम देश विदेश में ख्यात किया होने का इसमें सम्मान करेंगे। बस यही एक चाल हमकों चलना पड़ेगी।
यहाँ तो जान के लाले पड़े है। फाका करना पड़ रहा है और इसकी सुनो यह सम्मान समारोह आयोजित करने का कह रही है। मान लो हम यह आयोजन करें भी तो क्या वो हमारा निमंत्रण भी स्वीकार करेंगे?
मगर इसके अतिरिक्त कोई उपाय न जानकर सब ने ध्वनिमत से प्रस्ताव पर सहमती दे दी। लोमड़ी को आगाह कर दिया। अगर इससे सफलता नहीं मिली तो उसे बक्षेंगे नहीं।
अब सारी जिम्मेदारी लोमड़ी की थी। जगह, मंच सज्जा निमंत्रण आदि सभी उसी को करना था। कौवे को उसने निमंत्रण देकर आने के लिए "कुरियर क्रो" बनाया।
कौवे को यह भी पता करना था कि इस युनिवर्सिटी का दफ्तर कहाँ है और कैसे प्रभावित करके निमंत्रण देना है। आखिर कौवे ने सफलता अर्जित की और निमंत्रण पत्र पहुँचा दिया।
खरगोश और उसके समस्त स्टाफ ने जब यह पत्र पढ़ा तो सार्वजनिक सम्मान की बात से वे बड़े प्रभावित हुए मगर एक बार उन्हें इस सद्भावना पर विश्वास नहीं जमा। उन्होंने अपने गुप्तचर जंगल में निगरानी पर लगवाए।
इधर माँसाहारी प्राणियों ने कार्यक्रम स्थल की साज-सज्जा, मंच, माला और माईक का बंदोबस्त, स्वागत के लिए हार फूल, स्वागत भाषण की तैयारी आदि प्रारंभ कर दी। यह खबर जब खरगोश को मिली तो उसका संदेह जाता रहा।
जंगल के बीच की खड़ी चट्टान मंच स्थल थी। चारो तरफ हरा भरा मैदान था खुला खुला था। यह मैदान एक तरफ नदी से घिरा था दूसरी तरफ पहाड़ था, तीसरी ओर जंगल का घना झुरमुट था। सुंदर स्थान पर मंच की बात और अभिनंदन की परियोजना का प्रकल्प गुप्तचरों से सुनकर उन्हें वहाँ जाना ठीक मालूम हुआ। फिर भी सावधानी जरूरी थी।
नियत समय और दिन को सारी बाते सुनिश्चित होने के बाद वे वहाँ जाने को तैयार हुए। बड़ी संख्या में जंगल के प्राणी इस समारोह में शामिल हो रहे थे। पास के राज्यों से भी अनेक विषिष्ट मेहमान यहाँ इस अवसर पर बुलवाए गए थे।
जोर शोर की तैयारियों के बीच मंच, माईक और माला का लोभ संवरण न कर युनिवर्सिटी के तमाम विशिष्ट शाकाहारी मंच पर पहुँचे। भाषण वगैरह तो सब धरा रह गया और चारों तरफ से घिरे इन विद्वानों को मांसाहारियों ने शिकार बना डाला। लोगों को शिक्षा देने और बेचने वाले कतिपय बुद्धिजीवी मात्र सम्मान की भूख में काल के ग्रास बन गए। तभी से यह मुहावरा चल पड़ा है कि "प्रसिद्धि और सम्मान की भूख बुद्धिमत्ता को निगल जाती है।"

राजेश घोटीकर
रतलाम


सोमवार, 22 जुलाई 2013

महाराष्ट्रीयन अंतिम संस्कार विधि साठी सामानाची यादी

महाराष्ट्रीयन अंतिम संस्कार विधि साठी सामानाची यादी

पुरुष

३ बांसाच्या किमडया
२ दोरि बण्डल
३ छोटे माठ
५ चारा पिंड्या
५ कंडे
१ चंदनाची खोड़
१ उदबत्तीचा पुडा
१ आगपेटी
१ kg गव्हाचा आटा
२५० gm तूप
१०० gm गुलाल
१०० gm काऴ तिल
१०० gm जव
हार फूल ………… घरातल्या माणसा पुरत्या
पांढ़रा कपड़ा ६ मीटर
१ धोतर
१ ज़ोड़ जान्व ( जनेऊ )
१ शाल

बायकांसाठी
विधवा बाई 

३ बांसाच्या किमडया
२ दोरि बण्डल
३ छोटे माठ
५ चारा पिंड्या
५ कंडे
१ चंदनाची खोड़
१ उदबत्तीचा पुडा
१ आगपेटी
१ kg गव्हाचा आटा
२५० gm तूप
१०० gm गुलाल
१०० gm काऴ तिल
१०० gm जव
हार फूल ………… घरातल्या माणसा पुरत्या
पांढ़रा कपड़ा ६ मीटर
१  पांढ़री साडी + चोळी


सवाष्ण बाई 

३ बांसाच्या किमडया
२ दोरि बण्डल
३ छोटे माठ
५ चारा पिंड्या
५ कंडे
१ चंदनाची खोड़
१ उदबत्तीचा पुडा
१ आगपेटी
१ kg गव्हाचा आटा
२५० gm तूप
१०० gm गुलाल
१०० gm काऴ तिल
१०० gm जव
हार फूल ………… घरातल्या माणसा पुरत्या
पांढ़रा कपड़ा ६ मीटर
१ हिरवी साडी ( अन्यथा हिरव्या बॉर्डर ची सुद्धा चालेल ) + चोळी
८ हिरव्या बांगड्या
२ जोडवी  
१ क़ाली पोत
१ वेणी
१ विडा
१ नारळ
हल्दी + कुंकू

अस्थि संचय तीसरया दिवशी (रात्रि २.३ पर्यन्त पहिला दिवस मानायचा )
मंगल, शनीवार व अमावस्या ला नाही करत

उपरोक्त पद्धति डोळे काकां कडून लिहून लावल्या आहे
सुझाव किवा संशोधन आमंत्रित आहेत 

शुक्रवार, 7 जून 2013

पर्यावरण के सन्दर्भ में बर्ड्स वाचिंग ग्रुप की स्थापना कर जागरूकता अभियान की शुरुआत की।
शीतल तीर्थ एवं रोटरी शताब्दी वन के लिए पौधे उपलब्ध कराए। रोटरी को २००४ में  शताब्दी वन हेतु ७० बीघा शासकीय भूमि ५ वर्षो के लिए दिलाई।
हमारे जीवन में चिड़िया क्यों खास है ? इसके मुख्य बिन्दुओं पर धार्मिक जन धारणा के साथ वैज्ञानिक तथ्यों का समावेश सकारात्मक परिणति देनेवाला रहा।
तालाब बचने के लिए छायाचित्र प्रतियोगिता का आयोजन किया अब सज्जन मिल तालाब गहरीकरण किया जा रहा है।
रतलाम जिले के मानसेवी वन्य प्राणी अभिरक्षक के रूप में नियुक्ति रही और इस दौर में खरमोर जो एक लुप्तप्राय पक्षी है की सुरक्षा बंदोबस्त तथा योजनाओं के जरिये संख्या में बढ़ोतरी संभव हुई।

प्रिजर्व प्लेनेट अर्थ का अवार्ड - क्लब अध्यक्ष की हैसियत से
आउट स्टैंडिंग चैर्मंशिप का अवार्ड
यूनाइटेड नेशंस एनवायरोंमेंट प्रोग्राम का सहभागिता प्रमाण पत्र बर्ड्स वाचिंग ग्रुप को दिलाने का गौरव हासिल।

ब्लॉग साईट - http://birdswatchinggroupratlam.blogspot.com को भी देखें 

शनिवार, 1 जून 2013

black ibis


tithari